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केजीएमयू प्रशासन ने जबरन धर्मांतरण मामले में डॉक्टर को किया निलंबित, सीएम योगी ने निष्पक्ष जांच का दिया आश्वासन

KGMU प्रशासन ने जबरन धर्मांतरण के मामले में एक आरोपी को निलंबित कर दिया है। पीड़िता ने बीते दिनों आत्महत्या का प्रयास किया था।

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केजीएमयू प्रशासन ने डॉक्टर को किया निलंबित, फोटो_ IANS

लखनऊः किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में धर्म परिवर्तन के मामले में आरोप लगे एक डॉक्टर को निलंबित कर दिया है। केजीएमयू प्रशासन के डीन ऑफ एकेडमिक्स प्रोफेसर वीरेंद्र आतम ने मंगलावर, 23 दिसंबर को एक आदेश किया है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार, 22 दिसंबर को पीड़िता से बात कर निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया था।

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी आदेश में डॉक्टर को जांच पूरी होने तक कैंपस में आने पर रोक लगाई गई है। हालांकि आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जांच समिति द्वारा बुलाए जाने पर डॉक्टर को कैंपस में आना पड़ेगा। इसके साथ ही जांच के दौरान डॉक्टर को लखनऊ छोड़कर बाहर जाने पर भी रोक लगाई गई है।

सीएम कार्यालय ने केजीएमयू प्रशासन से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

सीएम कार्यालय ने इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन से एक विस्तृत रिपोर्ट की मांग की है। वहीं पीड़िता डॉक्टर की सुरक्षा के लिए 24 घंटे सुरक्षा गार्ड तैनात किया गया है। इसके अलावा कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न अधिनियम (POSH Act) के तहत गठित विशाखा समिति केजीएमयू के कुलपति को आज (23 दिसंबर) को जांच सौंपेगी।

यह विवादित मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पुहंचा। दैनिक भास्कर इंग्लिश की रिपोर्ट के मुताबिक, सीएम योगी ने मामले को समझने के लिए पीड़ित डॉक्टर को बुलाया। पीड़ित डॉक्टर ने मुख्यमंत्री को बताया कि डॉक्टर रमीज ने कथित तौर पर जबरन धर्म परिवर्तन कराने वाले गिरोह का संचालन किया। सीएम योगी ने इस मामले में निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया और कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित महिला डॉक्टर केजीएमयू के पैथालॉजी विभाग में एमडी कर रही है। वहीं आरोपी रमीज जो एक वरिष्ठ रेजिडेंट हैं, वह एमडी पैथालॉजी के तीसरे वर्ष में हैं। रमीज उत्तराखंड का रहने वाला है, वहीं पीड़ित महिला डॉक्टर पश्चिम बंगाल की रहने वाली हैं।

शुरुआती जांच में आरोपी के खिलाफ सबूत मिले हैं जिसके आधार पर निलंबित किया गया है।

वहीं, इस मामले में राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्ण यादव ने सोमवार (23 दिसंबर) को कथित धर्म परिवर्तन मामले में कड़ा रुख लिया था। पीड़िता के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने के दौरान अपर्णा यादव ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ डॉक्टर ने जूनियर डॉक्टर को प्यार के नाम पर झांसा दिया और उस पर धर्मांतरण करने का दबाव बनाया।

उन्होंने मामले को ‘लव जिहाद’ बताते हुए कड़ी चेतावनी दी और कहा कि ऐसे कृत्यों में जो शामिल हैं, उन्हें सुधरना होगा अन्यथा कड़े परिणाम झेलने होंगे।

उन्होंने कहा कि जब जूनियर डॉक्टर ने पीछे हटने का प्रयास किया तो वरिष्ठ डॉक्टर ने कथित तौर पर दबाव बनाया और उन्हें उकसाया। अपर्णा ने आगे कहा कि आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और जेल भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि महिला आयोग अदालत में आरोपी के लिए कड़ी सजा की मांग करेगी। उन्होंने आगे कहा कि इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी और उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने क्या कहा?

दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक, अपर्णा यादव ने बताया था कि यह मामला ज्यादा पुराना नहीं है। उन्होंने कहा कि पीड़िता इस बात से अनजान थी कि रमीज पहले शादीशुदा है। उन्होंने कहा कि उसकी पहली पत्नी भी हिंदू थी जिसका धर्मांतरण कराया गया था।

अपर्णा के मुताबिक, डॉक्टर ने पीड़ित डॉक्टर को जुलाई में गुमराह करके बातचीत शुरू की। जब पीड़िता को पता चला कि वह पहले से शादी कर चुका है तो उसने दूरी बनाने की कोशिश की जिसके बाद उसने कथित तौर पर शोषण और उत्पीड़न किया गया।

पीड़िता ने बताया कि झूठ के आधार पर उसका बार-बार शोषण किया गया और वह बेहद डरी हुई है। उसने कहा, “जुलाई से मेरा उससे संबंध था। बाद में मुझे पता चला कि वह शादीशुदा है। जब मैंने उससे दूर जाने की कोशिश की तो उसने मुझे परेशान करना शुरू कर दिया।”

पीड़िता ने आत्महत्या करने की कोशिश की

उसने बताया कि उसने महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई है और आरोपी के लिए कड़ी सजा की मांग की है। उसने यह भी कहा कि वह अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।

पीड़िता केजीएमयू कैंपस के एक हॉस्टल में रहती है। उसने 17 दिसंबर को कथित तौर पर आत्महत्या करने का प्रयास किया। उसने भारी मात्रा में दवाइयां खा ली थीं। इसके बाद उसे गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। 19 दिसंबर को उसे अस्पताल से छुट्टी मिली।

पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि डॉक्टर रमीज मलिक ने उनकी बेटी से शादी करने के लिए इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया। उन्होंने दावा किया कि फरवरी में आरोपी ने एक अन्य हिंदू महिला से उसका धर्मांतरण कराने के बाद शादी की थी।

उन्होंने बताया कि राज्य महिला आयोग और मुख्यमंत्री जन शिकायत पोर्टल पर शिकायत की जिसके बाद आयोग ने कार्रवाई शुरू की।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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