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करूर त्रासदी के बाद अभिनेता विजय के घर को बम से उड़ाने की मिली धमकी, भगदड़ केस में अब तक क्या हुआ?

रविवार को विजय की पार्टी ने करूर हादसे की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है। इसके लिए पार्टी के चुनाव अभियान प्रबंधन सचिव आधार अर्जुना ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।

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तमिलनाडु के करूर में हुई भगदड़ को लेकर एक्टर विजय के घर पर बम की धमकी मिली है। 27 सितंबर को विजय अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (टीवीके) के लिए एक रैली कर रहे थे, इसी दौरान भगदड़ मच गई जिसमें अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे में कई घायल अब भी अस्पताल में भर्ती हैं।

चेन्नई पुलिस को एक कॉल के जरिए यह धमकी मिली, जिसके बाद विजय के नीलांकरई स्थित घर के बाहर तुरंत सुरक्षा तैनात कर दी गई। साथ ही अभिनेता के घर के बाहर स्निफर डॉग्स के साथ एक बम निरोधक दस्ते को तैनात किया।

विजय ने अपनी ओर से मृतकों के परिवारों को 20 लाख रुपये और घायलों को 2 लाख रुपये देने की घोषणा की है। विजय ने सोशल मीडिया पर लिखा, “इतने बड़े नुकसान के सामने यह राशि बहुत छोटी है। फिर भी, इस दुख की घड़ी में परिवार का सदस्य होने के नाते मेरा कर्तव्य है कि मैं आप सबके साथ खड़ा रहूं। जिन चेहरों से मैं मिला हूं, वे लगातार मेरी आंखों के सामने आ रहे हैं। मेरे अपने लोग, जिन्होंने स्नेह और अपनापन दिखाया, उन्हें याद करके दिल और भारी हो जाता है।”

विजय के अलावा मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राहत कोष से भी 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये दी जाएगी। वहीं, तमिलनाडु सरकार ने भी मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल मरीजों को 1 लाख रुपये देने का ऐलान किया।

हादसे को लेकर विजय के खिलाफ लोगों का गुस्सा भी उभरा है। वहीं इसको लेकर राजनीति भी गरमाई हुई है। सोमवार को तमिलनाडु छात्र संघ ने एक्टर विजय की निंदा करते हुए करूर में उनके पोस्टर लगाए। पोस्टर में उनके हाथ खून से सने दिखाए गए थे। इस पोस्टर के साथ छात्र संघ ने एक्टर के खिलाफ प्रदर्शन किया।

विजय की पार्टी ने जहां इसमें साजिश की आशंका जताते हुए सीबीआई जांच की मांग की है तो वहीं भाजपा ने इस हादसे के लिए सीधे तौर पर डीएमके को जिम्मेदार ठहराया है।

हादसे के बाद रविवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने डीएमके सरकार से जवाबदेही की मांग की। स्टालिन द्वारा मृतकों के परिवारों के लिए घोषित 10 लाख रुपये के मुआवजे को घोर अपर्याप्त बताया। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा और घायलों के लिए पर्याप्त सहायता की मांग की है।

उन्होंने इस साल की शुरुआत में हुई कल्लाकुरुचि शराब त्रासदी का जिक्र करते हुए उनपर निशाना साधा और कहा कि तब 65 लोगों की मौत हुई थी, फिर भी मुख्यमंत्री ने दौरा नहीं किया। हर बार जवाबदेही गायब रहती है। उन्होंने करूर आपदा के लिए जिम्मेदार लोगों से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की है।

रविवार को विजय की पार्टी ने करूर हादसे की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है। इसके लिए पार्टी के चुनाव अभियान प्रबंधन सचिव आधार अर्जुना ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार और पुलिस ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। टीवीके की रैलियों के लिए छोटे और अनुपयुक्त स्थल दिए गए, कार्यक्रमों के दौरान बार-बार बिजली काटी गई और करूर रैली में असामाजिक तत्वों ने घुसकर विजय और भीड़ पर पत्थर और चप्पलें फेंकीं।

डीएमके सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश अरुणा जगदीशन की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया है जो करूर जाकर मामले की जांच करेगा और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने कहा किउन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन रिपोर्ट के आधार पर उपयुक्त कदम उठाएंगे।

हादसा कैसे हुआ?

13 सितंबर को विजय ने त्रिची से अपनी राज्यव्यापी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी। हर जगह उन्हें देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ रही थी। हालात इतने बिगड़े कि त्रिची एयरपोर्ट की रेलिंग, एक टोल गेट और स्कूल का शौचालय भीड़ के दबाव में टूट गए। पुलिस ने कई मामलों में पार्टी कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज किए। 27 सितंबर को विजय का करूर और नामक्कल में कार्यक्रम तय था।

तमिलनाडु के डीजीपी जे. वेंकटारमण के मुताबिक, टीवीके ने पुलिस को बताया था कि रैली दोपहर 3 बजे शुरू होगी और करीब 10,000 लोग जुटेंगे। लेकिन पार्टी के सोशल मीडिया अकाउंट से समय 12 बजे घोषित किया गया। नतीजा यह हुआ कि सुबह 10 बजे से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई और शाम तक संख्या दोगुनी हो गई। लोग भूखे-प्यासे घंटों खड़े रहे।

नामक्कल से विजय का काफिला निकला तो सैकड़ों लोग उनके पीछे-पीछे करूर तक चले आए। पीछा छुड़ाने के लिए विजय ने अपनी बस की काली खिड़कियाँ बंद कर दीं, लेकिन समर्थक फिर भी 40 किलोमीटर तक उनका पीछा करते रहे। यह सफर तीन घंटे में पूरा हुआ। जब विजय रात 7:40 बजे करूर पहुंचे तो पहले से मौजूद भीड़ और उनके पीछे-पीछे आए लोगों का मिलन हुआ। पुलिस का अनुमान है कि वहां करीब 27,000 लोग मौजूद थे।

जैसे ही विजय की बस भीड़ के बीच धकेली गई, जगह और कम हो गई। विजय बस की छत पर चढ़कर लोगों को संबोधित करने लगे। बेहतर देखने-सुनने के लिए कई लोग पास के पेड़ पर चढ़ गए। एक डाल टूटते ही दर्जनों लोग नीचे गिरे और भगदड़ मच गई। कई लोग दब गए, कुछ दम घुटने से मर गए। इस दौरान विजय को लोगों की ओर पानी की बोतलें फेंकते देखा गया ताकि बेहोश हो रहे लोगों को संभाला जा सके।

हंगामे में एक 9 साल की बच्ची गुम हो गई। विजय ने बस से इसकी घोषणा की और अपील की, जिससे अफरा-तफरी और बढ़ गई। एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं और विजय वहीं से चेन्नई के लिए रवाना हो गए।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हादसे के बाद से टीवीके का करूर पश्चिम जिला कार्यालय बंद मिले और कई स्थानीय पदाधिकारी लापता बताए गए। पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने स्वीकार किया कि रैली स्थल पर नेता और पदाधिकारी अपने परिवारों के साथ घबराकर निकल गए, जिससे मदद के लिए आए लोग असहाय रह गए। यह स्थिति उस पार्टी के लिए चिंता का विषय है, जिसने कभी रक्तदान और चिकित्सा शिविरों से अपनी पहचान बनाई थी।

पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?

पुलिस ने विजय को छोड़ कई लोगों पर एफआईआर दर्ज की है। करूर टाउन पुलिस ने टीवीके महासचिव एन. आनंद, संयुक्त महासचिव सीटी निर्मल कुमार, करूर पश्चिम जिला सचिव वी.पी. मथियालगन और तीन अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

उन पर गैर इरादतन हत्या, गैर इरादतन हत्या का प्रयास, मानव जीवन को खतरे में डालने, आदेशों की अवहेलना और तमिलनाडु पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 3 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। अभी तक विजय के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं हुआ है, क्योंकि रैली की अनुमति उनके नाम पर नहीं, बल्कि टीवीके के नाम पर ली गई थी। इस वजह से शुरुआती जिम्मेदारी आयोजकों पर ही डाली गई है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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