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कानपुर लेम्बोर्गिनी कांड में आरोपी शिवम 4 दिन बाद गिरफ्तार, मामले में अब तक क्या कुछ हुआ है?

शिवम मिश्रा कानपुर के अरबपति तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का बेटा है। मामला हाई प्रोफाइल होने की वजह से पुलिस की शुरुआती कार्रवाई को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे थे। आरोप ये भी है कि शिवम को बचाने के लिए उसके परिवार की ओर से एक दूसरा ड्राइवर बतौर आरोपी कोर्ट में पेश किया गया था।

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कानपुर: लेम्बोर्गिनी कार हादसे के आरोपी और तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। इस कार हादसे में छह लोग गिरफ्तार घायल हुए थे। यह गिरफ्तारी तब हुई जब अदालत ने उस शख्स की सरेंडर याचिका खारिज कर दी, जिसने दुर्घटना के समय खुद को कार का चालक बताया था।

कानपुर के वीआईपी रोड पर 8 फरवरी को हुए हादसे के बाद बढ़ते जन आक्रोश और कारोबारी के बेटे को बचाने के प्रयासों के आरोपों के बीच पुलिस ने शिवम मिश्रा को गिरफ्तार किया है। शिवम को गुरुवार सुबह आर्य नगर स्थित उनके आवास के बाहर से हिरासत में लिया गया और बाद में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एजेसीएम) की अदालत में पेश किया गया।

शिवम मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद मीडिया से बात करते हुए कानपुर के डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने कहा, ‘हमें सूचना मिली थी कि वह कानपुर में है। पांच टीमें गठित की गईं और हमने उसे गिरफ्तार कर लिया है। उसे अदालत में पेश किया गया है। जांच में पता चला है कि दुर्घटना के समय शिवम मिश्रा गाड़ी चला रहा था।’

क्या है मामला…पुलिस पर भी उठे थे सवाल

दरअसल, 8 फरवरी को वीआईपी रोड पर एक तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी कार ने छह लोगों को टक्कर मार दी थी। यह लग्जरी कार शिवम मिश्रा के नाम पर पंजीकृत है। दुर्घटना के तुरंत बाद, पुलिस द्वारा मामले की प्रारंभिक जांच पर सवाल उठने लगे थे।

हादसे के बाद रसूखदार परिवार से मामला जुड़ा हुआ देखते हुए लेम्बोर्गिनी कार को पुलिस थाने में वीआईपी ट्रीटमेंट देने जैसे आरोप लगे। लेम्बोर्गिनी को पुलिस स्टेशन के अंदर उस स्थान पर खड़ा किया गया था जो आमतौर पर थानेदार के वाहन के लिए आरक्षित होता है। बताया जाता है कि कार को ढका गया था और उसकी सुरक्षा की जा रही थी, यहां तक ​​कि बाउंसर भी तैनात थे। आरोपी के प्रभावशाली पृष्ठभूमि के कारण पुलिस पर ‘वीआईपी ट्रीटमेंट’ देने का आरोप भी लग रहा था।

हैरानी वाली बात ये रही कि शुरुआत में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ही पुलिस ने रात करीब 8:30 बजे वाहन नंबर के आधार पर एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाने के बाद मामला जल्द ही राजनीतिक चर्चा में आ गया, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त कार्रवाई के आदेश दिए। 24 घंटे के भीतर पुलिस ने शिवम मिश्रा को आरोपी चालक के रूप में नामित किया।

शिवम को बचाने के लिए ड्राइवर को कोर्ट में किया गया पेश!

11 फरवरी को इस मामले में एक नाटकीय मोड़ तब आया जब मिश्रा परिवार के ड्राइवर के रूप में पेश किए गए मोहन ने अपने वकील नरेंद्र कुमार यादव के साथ कानपुर की एक अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। मोहन ने दावा किया कि दुर्घटना के समय वह लेम्बोर्गिनी चला रहा था।

उसने अदालत को बताया कि गाड़ी चलाते समय शिवम को दौरा पड़ गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। मोहन ने दावा किया, ‘मैं गाड़ी चला रहा था। शिवम को दौरा पड़ा। मैं घबरा गया और गाड़ी पर से नियंत्रण खो बैठा, और दुर्घटना हो गई।’ ड्राइवर ने आगे बताया कि विंडशील्ड टूटने और दरवाजा खुलने के बाद वह नीचे से बाहर निकल गए, जबकि बाउंसरों ने शिवम को गाड़ी से बाहर निकाला और दूसरी गाड़ी में बैठाया।

हालांकि, अदालत ने मोहन की आत्मसमर्पण याचिका खारिज कर दी। पुलिस रिपोर्ट में शिवम को आरोपी बताया गया है और मोहन का कहीं भी जिक्र नहीं है, इसलिए अदालत ने मोहन को इस मामले में आरोपी मानने से इनकार कर दिया। लग्जरी कार पुलिस हिरासत में ही रहेगी।

अदालत के बाहर पूछताछ के दौरान मोहन ने दावा किया कि लेम्बोर्गिनी में 9 गियर थे। हालांकि, इस मामले में सलाह लिए गए ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि संबंधित मॉडल में सात फॉरवर्ड गियर और एक रिवर्स गियर है – कुल मिलाकर आठ। ऐसे में मोहन के बयान ने कार चलाने के उसके दावे पर संदेह को और बढ़ा दिया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि वीडियो साक्ष्य और तकनीकी निष्कर्ष मोहन के बयान के विपरीत हैं।

दुर्घटना के तुरंत बाद रिकॉर्ड हुए एक वीडियो में लैम्बोर्गिनी के पीछे चल रहे एक वाहन से बाउंसर निकलते हुए दिखाई देते हैं। वे ईंट से विंडशील्ड तोड़ते हैं, दरवाजा खोलते हैं और शिवम को ड्राइवर की सीट से बाहर खींचकर दूसरी गाड़ी में ले जाते हैं। फुटेज में ड्राइवर की सीट से किसी दूसरे व्यक्ति के निकलने का कोई संकेत नहीं मिलता है।

शिवम के खिलाफ सबूत और ‘समझौते’ का खेल

जांच अधिकारी दिनेश सिंह ने 10 से अधिक प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए। सभी ने बताया कि शिवम गाड़ी चला रहा था और गाड़ी में कोई अन्य व्यक्ति नहीं था। उन्होंने पुष्टि की कि दुर्घटना के बाद बाउंसरों ने उसे ड्राइवर की सीट से उतार दिया था।

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से पता चलता है कि दुर्घटना के समय शिवम का मोबाइल फोन वीआईपी रोड पर दुर्घटनास्थल पर मौजूद था। कुछ सीसीटीवी फुटेज में भी घटनाक्रम कैद हुआ है। पुलिस के अनुसार, फुटेज से पता चलता है कि वाहन में केवल एक ही व्यक्ति मौजूद था।

हादसे के बाद कानपुर के चमनगंज घुसियाना निवासी मोहम्मद तौसीफ ने एफआईआर दर्ज कराई थी। अपने प्रारंभिक बयान में, उन्होंने वीडियो फुटेज के माध्यम से पुष्टि करने के बाद शिवम को लेम्बोर्गिनी कार चलाने वाले व्यक्ति के रूप में पहचाना था।

दूसरी ओर अदालत में मोहन के वकील ने दावा किया कि मोहन और शिकायतकर्ता मोहम्मद तौसीफ के बीच समझौता हो गया है। अदालत में प्रस्तुत समझौते के आवेदन में कहा गया है कि तौसीफ को चिकित्सा उपचार के लिए मुआवजा मिल चुका है और अब वह इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते। हालांकि, पुलिस उपायुक्त (मध्य) अतुल कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस को ऐसे किसी समझौते की कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है।

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...

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