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JNU में लाल झंडे का दबदबा कायम, ABVP का खाता तक नहीं खुला

JNU में छात्र संघ चुनावों में लेफ्ट दलों ने चारों पदों पर जीत हासिल की है। वहीं, एबीवीपी का खाता नहीं खुल सका है। अध्यक्ष पद के लिए अदिति मिश्रा ने जीत हासिल की है।

JNUSU ELECTION RESULT LEFT CLEAN SWEEP BY WINNING ALL FOUR SEATS ABVP UNABLE TO SECURE A SINGLE SEAT
JNU छात्र संघ चुनाव में लेफ्ट का दबदबा, फोटोः एक्स

JNUSU Result 2025: देश की प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में लेफ्ट ने एक बार फिर से जीत का परचम लहराया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का खाता नहीं खुल सका। लेफ्ट उम्मीदवारों ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव के पदों पर जीत हासिल की।

जेएनयू में अध्यक्ष पद के लिए लेफ्ट उम्मीदवार अदिति मिश्रा को जीत मिली है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, इस पद के लिए उन्हें 1,861 वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वंदी एबीवीपी उम्मीदवार विकास पटेल को 1,447 वोट मिले। अदिति ने 414 वोटों से जीत दर्ज की।

JNU में लेफ्ट का दबदबा कायम

अध्यक्ष पद के अलावा उपाध्यक्ष पद पर लेफ्ट उम्मीदवार के.गोपिका ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें 2,966 वोट मिले जबकि एबीवीपी की तान्या कुमारी को 1,730 वोट मिले। गोपिका को 1236 वोटों से जीत मिली।

वहीं, महासचिव के पद पर लेफ्ट के सुनील यादव को जीत मिली है। सुनील को 1915 वोट मिले जबकि उनके एबीवीपी प्रतिद्वंद्वी राजेश्वर कांत दुबे को 1,841 वोट मिले। उन्होंने 74 मतों से जीत दर्ज की।

संयुक्त सचिव पद के लिए लेफ्ट उम्मीदवार दानिश अली ने जीत दर्ज की। दानिश को 1991 मत मिले वहीं, एबीवीपी के अनुज दमारा को 1762 वोट मिले। दानिश ने 229 मतों से जीत हासिल की।

इस तरह से जेएनयू में एक बार फिर से लेफ्ट पार्टियों की बादशाहत बरकरार रही है। उन्हें छात्रसंघ में मुख्य चारों पदों पर जीत मिली है।

चारों पदों पर मिली जीत जेएनयू में लेफ्ट के वर्चस्व को दर्शाती है। छात्र संघ में तीन महत्वपूर्ण पदों अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव पद के लिए महिला उम्मीदवारों को जीत मिली है।

JNU में 4 नवंबर को हुई थी वोटिंग

गौरतलब है कि जेएनयू में 4 नवंबर, मंगलवार को वोटिंग हुई थी। इस दिन दो फेज में वोटिंग पूरी हुई थी। बीते साल की तुलना में इस साल कम वोट पड़े। इस साल 67 फीसदी मतदान हुआ जबकि पिछले चुनाव में 70 फीसदी मतदान हुआ था।

इससे पहले 2023-24 में यह आंकड़ा 73 फीसदी था जो पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा था। इस साल के चुनाव में कुल 9,043 छात्र मत देने के योग्य थे। इन्हें छात्र संघ के 4 पदों के अलावा विभिन्न स्कूलों के पार्षदों (काउंसिलर) का चुनाव करना था।

इस बार का मुख्य मुकाबला लेफ्ट पार्टियों (एआईएसए, एसएफआई, डीएसएफ) और एबीवीपी के बीच था। जीत का सबसे कम अंतर महासचिव पद के लिए रहा। इस सीट पर एबीवीपी उम्मीदवार राजेश्वर कांत दुबे ने कांटे की टक्कर दी। हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

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पिछले चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए लेफ्ट उम्मीदवार नीतीश कुमार ने जीत हासिल की थी। इस चुनाव में भी लेफ्ट ने चार पदों पर जीत हासिल की थी। संयुक्त सचिव के पद पर एबीवीपी को जीत मिली थी।

इससे पहले भी लेफ्ट उम्मीदवार धनंजय ने अध्यक्ष पद जीता था। धनंजय फिलहाल बिहार विधानसभा चुनाव में भोरे विधानसभा सीट में महागठबंधन के प्रत्याशी हैं। इस दौरान चारों पदों पर लेफ्ट उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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