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J&K: 12,000 फीट की ऊंचाई पर सेना ने ध्वस्त किया आतंकियों का ‘कारगिल स्टाइल’ बंकर; ‘ऑपरेशन त्रिशूल-I’ तीसरे दिन भी जारी

आतंकियों ने बंकर में महीनों तक छिपे रहने का पूरा इंतजाम कर रखा था। ठिकाने से 50 पैकेट मैगी, 20 किलो बासमती चावल, ताजी सब्जियां (टमाटर और आलू), 15 तरह के मसाले, अनाज, कुकिंग गैस और जलाने के लिए सूखी लकड़ी बरामद हुई है।

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Photo: IANS

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकियों के खिलाफ चल रहा बड़ा अभियान अब तीसरे दिन में प्रवेश कर गया है। इस बीच जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के दुर्गम और बर्फीले पहाड़ों में सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को सुरक्षा बलों ने 12,000 फीट की ऊंचाई पर जैश-ए-मोहम्मद के एक ऐसे ‘फोर्टिफाइड’ बंकर का ध्वस्त किया, जिसे ‘कारगिल युद्ध’ की तर्ज पर पत्थरों से बेहद मजबूत बनाया गया था।

आतंकियों ने जमा किया था 4 महीने का राशन

बंकर से बरामद सामान को देखकर सुरक्षा एजेंसियां भी हैरान हैं। आतंकियों ने वहां महीनों तक छिपे रहने का पूरा इंतजाम कर रखा था। ठिकाने से 50 पैकेट मैगी, 20 किलो बासमती चावल, ताजी सब्जियां (टमाटर और आलू), 15 तरह के मसाले, अनाज, कुकिंग गैस और जलाने के लिए सूखी लकड़ी बरामद हुई है। यह सारा सामान कम से कम चार आतंकियों के लिए कई महीनों तक काफी था।

माना जा रहा है कि इस ठिकाने का इस्तेमाल पाकिस्तानी मूल का जैश कमांडर सैफुल्लाह और उसका डिप्टी आदिल कर रहे थे। इस ठिकाने को किलानुमा बनाया गया था जिसमें कई एंट्री और एग्जिट पाइंट बनाए थे। इसे मुठभेड़ झेलने लायक बनाया गया था।

रविवार को जब सुरक्षा बलों ने चतरू इलाके के मंडल-सिंहपोरा के सोनार गांव के जंगलों में घेराबंदी की, तो आतंकियों ने ग्रेनेड से हमला कर दिया। इस हमले में सात सैनिक घायल हो गए। आतंकवादी जंगल के भीतर भागने में कामयाब रहे, लेकिन उनका ठिकाना सुरक्षा बलों ने नष्ट कर दिया।

बाद में सेना के पैरा स्पेशल फोर्स के हवलदार गजेंद्र सिंह ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मंगलवार को जम्मू के सतवारी में उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई, जिसके बाद उनका पार्थिव शरीर उत्तराखंड स्थित उनके पैतृक गांव भेज दिया गया। घायल जवानों का इलाज जारी है।

स्थानीय नेटवर्क का खुलासा, 4 हिरासत में

इस कार्रवाई के बाद स्थानीय ओवरग्राउंड नेटवर्क की भूमिका भी सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इतनी ऊंचाई और दुर्गम इलाके में ऐसा बंकर बनाना और भारी मात्रा में राशन व अन्य सामान पहुंचाना स्थानीय मदद के बिना संभव नहीं था। इसी कड़ी में अब तक चार स्थानीय लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।

फिलहाल, आतंकियों को पकड़ने के लिए ‘ऑपरेशन त्रिशूल-I’ तीसरे दिन भी जारी है। ड्रोन, स्निफर डॉग्स और आधुनिक उपकरणों की मदद से सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की टीमें घनी हरियाली और खड़ी ढलानों वाले मुश्किल इलाकों में तलाशी ले रही हैं।

गणतंत्र दिवस के मद्देनजर पूरे जम्मू क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। खुफिया इनपुट मिले हैं कि सीमा पार बैठे आका शांति भंग करने के लिए और अधिक आतंकियों को घुसपैठ कराने की फिराक में हैं। आईजीपी जम्मू जोन और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी खुद मुठभेड़ स्थल पर मौजूद रहकर ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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