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ईरान ने अमेरिका के साथ शांति वार्ता के दूसरे दौर का प्रस्ताव ठुकराया, तेहरान ने क्या मुख्य वजहें गिनाई हैं?

ईरान-अमेरिका के बीच 8 अप्रैल को हुए दो सप्ताह के संघर्षविराम समझौते की अवधि दो दिन बाद यानी 22 अप्रैल को खत्म हो रही है। इस्लमाबाद में पीस वार्ता के दौरान होर्मुज प्रमुख विवादों में से एक था।

तेहरान/वॉशिंगटनः पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित शांति वार्ता के दूसरे दौर में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, यह वार्ता पाकिस्तान में होने जा रही थी, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में तेहरान ने इससे दूरी बना ली है।

आईआरएनए ने ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में लिखा है कि ईरान ने इस अनुपस्थिति के लिए अमेरिका के अड़ियल रुख को जिम्मेदार ठहराया है। तेहराइन ने इसके पीछे के कारण- वाशिंगटन की बेतुकी मांगों, अमेरिका के रुख में बार-बार होने वाला बदलाव, विरोधाभासी बयान और उसके द्वारा की गई होर्मुज नाकाबंदी को बताया है।

ईरान ने दूसरे दौर की शांति वार्ता से साफ इनकार किया

आईआरएनए ने यह भी कहा कि इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता को लेकर जो खबरें सामने आई हैं, वे सही नहीं हैं। एजेंसी ने अमेरिका की ओर से आई खबरों को मीडिया का खेल और दोषारोपण की रणनीति बताया, जिसका मकसद ईरान पर दबाव बनाना है।

एजेंसी ने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में बातचीत से किसी अच्छे नतीजे की उम्मीद बहुत कम है।

अमेरिकी नाकेबंदी तक वार्ता नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार कहा था कि उनके देश के वार्ताकार सोमवार को ईरान के साथ दूसरे दौर की बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचेंगे। साथ ही ट्रंप ने धमकी दी कि अगर ईरान अमेरिका के प्रस्तावित समझौते को स्वीकार नहीं करता है, तो वह ईरान में नागरिक बुनियादी ढांचे को नष्ट कर देगा।

ये भी पढ़ेंः ‘होर्मुज पर फैसला सोशल मीडिया पर नहीं, जमीन पर होगा’, ट्रंप के दावों पर ईरान का पलटवार

ईरान ने अपने बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रहने तक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर रोक लगाने के फैसले पर और कड़ा रुख अपना लिया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने शनिवार देर रात सरकारी टेलीविजन को दिए साक्षात्कार में कहा, जब हमारे खुद के जहाज होर्मुज से नहीं गुजर सकते तो दूसरों को भी इस रास्ते से गुजरने देना संभव नहीं है। ट्रंप के बयान पर उन्होंने कहा कि जब तक अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहेगी, उनका देश वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजेगा।

आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच एक अस्थायी युद्धविराम हुआ था। इसके बाद 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद (पाकिस्तान) में पहले दौर की लंबी बातचीत हुई, जो बेनतीजा रही। ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने होर्मुज पर नाकाबंदी लागू कर दी, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को हुए दो सप्ताह के संघर्षविराम समझौते की अवधि दो दिन बाद यानी 22 अप्रैल को खत्म हो रही है। इस्लमाबाद में पीस वार्ता के दौरान होर्मुज प्रमुख विवादों में से एक था। इसको लेकर गतिरोध और बढ़ गया जब ईरान ने इस संकरे समुद्री मार्ग को पार करने की कोशिश कर रहे जहाजों पर गोलीबारी की, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखी। रविवार को ट्रंप ने कहा कि ईरान की किलिंग मशीन का अंत करने का समय आ गया है।

खबर यह भी है कि अमेरिका ने एक ईरानी जहाज को अपने कब्जे में ले लिया है। ट्रंप के मुताबिक अमेरिकी सेना ने एक ईरानी झंडे वाले कंटेनर शिप को अपने कंट्रोल में ले लिया है, जिसने होर्मुज स्ट्रेट के पास एक अमेरिकन नेवल ब्लॉकेड को पार करने की कोशिश की।।

ये भी पढ़ेंंः होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कड़ा रुख- स्थायी शांति बहाली तक जहाजों पर रहेगा सैन्य नियंत्रण

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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