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लेबनान में इजराइली हमलों से भड़का ईरान, होर्मुज बंद करने का ऐलान; अमेरिका पर वादाखिलाफी का आरोप

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी जहाजों को चेतावनी जारी करते हुए कहा कि वे होर्मुज के पास न आएं, क्योंकि उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

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Strait of Hormuz

तेहरान: ईरान ने शनिवार को एक बार फिर दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की घोषणा कर दी। ईरान के शीर्ष ज्वाइंट मिलिट्री कमांड ने अमेरिका पर हाल में हुए अमेरिका-ईरान समझौता (MoU) का उल्लंघन करने के आरोप और दक्षिणी लेबनान में इजराइल के लगातार हमलों का हवाला देते हुए ये कदम उठाया है।

ईरानी सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित बयान में सैन्य कमान ने कहा कि अमेरिका समझौते की पहली शर्त को लागू करने में विफल रहा है। साथ ही, बयान में दक्षिणी लेबनान में इजराइल की जारी सैन्य कार्रवाई को भी इस फैसले की वजह बताया गया। बयान में कहा गया, ‘यह सिर्फ पहला कदम है। यदि आक्रामकता जारी रही तो आगे की कार्रवाई की भी योजना तैयार है।’

इसी बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी जहाजों को चेतावनी जारी करते हुए कहा कि वे होर्मुज के पास न आएं, क्योंकि उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

लेबनान पर इजराइली हमले ने बढ़ाई तकरार!

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दक्षिणी लेबनान में संघर्ष तेज हो गया है। संघर्ष विराम की खबरों के बावजूद शनिवार को भी इजराइली हमलों में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई। इसमें दावा किया गया कि मृतकों में दो बच्चे भी शामिल हैं। हिजबुल्लाह ने आरोप लगाया कि इजराइल लगातार युद्धविराम का उल्लंघन कर रहा है।

वहीं, इजराइल का कहना है कि हिजबुल्लाह ने रातभर में 50 से अधिक प्रोजेक्टाइल दागे, जिसके जवाब में उसने आतंकी ठिकानों पर हमले किए। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजराइल-हिजबुल्लाह संघर्ष में अब तक 4,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

खतरे में अमेरिका-ईरान समझौता

इसी सप्ताह अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ था, जिसके तहत महीनों के तनाव को खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति बनी थी। इसके बाद जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू हुई थी।

हालांकि, लेबनान पर हमले अब इस समझौते के लिए सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बन गए हैं। ईरान लगातार कहता रहा है कि लेबनान में स्थायी युद्धविराम और कब्जे वाले इलाकों से इजराइली सैनिकों की वापसी समझौते की सफलता के लिए जरूरी शर्तें हैं।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पहले भी कह चुके हैं कि समझौते के तहत अमेरिका की जिम्मेदारी है कि वह ‘लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रुकवाना सुनिश्चित करे।’ वहीं इजराइल ने स्पष्ट किया है कि वह इस समझौते का पक्षकार नहीं है और हिजबुल्लाह से खतरा खत्म होने तक सैन्य अभियान जारी रखेगा।

उधर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि ईरान वास्तव में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की तैयारी कर रहा है। उनका कहना है कि समुद्री मार्ग से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही अभी भी जारी है।

स्विट्जरलैंड वार्ता पर संकट के बादल?

दूसरी ओर तनाव के बावजूद ईरान ने संकेत दिए हैं कि उसका वार्ताकार दल स्विट्जरलैंड जाएगा। हालांकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि जब तक अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, तब तक बातचीत में ठोस प्रगति की उम्मीद कम है।

वहीं जेडी वेंस ने भी कहा है कि वह अगले कुछ दिनों में स्विट्जरलैंड जाकर ईरानी प्रतिनिधियों से बातचीत कर सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि वाशिंगटन अभी भी बातचीत के रास्ते को खुला रखना चाहता है।

स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित वार्ता का उद्देश्य इस सप्ताह हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन को आगे बढ़ाते हुए ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक समझौते का रास्ता तैयार करना है। हालांकि लेबनान में जारी हिंसा ने इन प्रयासों पर अनिश्चितता के बादल खड़े कर दिए हैं।

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...

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