मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप की लैब जांच में पुष्टि हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, पाइपलाइन में रिसाव के चलते सीवेज मिला पानी पीने से यह संक्रमण फैला, जिसमें अब तक कम से कम 7 से 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,400 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं।
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि एक शहर के मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में साफ हुआ है कि भागीरथपुरा में सप्लाई किया जा रहा पानी दूषित था। यह रिसाव एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पाइपलाइन में पाया गया, जहां पाइप के ऊपर सार्वजनिक शौचालय बना हुआ था। हालांकि, रिपोर्ट का विस्तृत ब्योरा साझा नहीं किया गया है।
हजारों लोग चपेट में, सैकड़ों अस्पताल में भर्ती
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, पिछले आठ दिनों में 1,714 घरों के सर्वे में 8,571 लोगों की जांच की गई। इनमें 338 लोगों में हल्के लक्षण मिले, जिन्हें घर पर प्राथमिक इलाज दिया गया।
अब तक 272 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 71 को छुट्टी दी जा चुकी है। फिलहाल 201 मरीज अब भी अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें 32 की हालत गंभीर बताई जा रही है और वे आईसीयू में हैं।
अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि पूरी जल आपूर्ति लाइन की जांच की जा रही है, ताकि कहीं और रिसाव न हो। गुरुवार को पाइपलाइन से साफ पानी की आपूर्ति बहाल कर दी गई है, लेकिन एहतियातन लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है। पानी के नए सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
दुबे ने कहा कि इस घटना से सबक लेते हुए पूरे राज्य के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्थिति को आपात जैसी बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। 31 दिसंबर को उन्होंने अस्पतालों का दौरा कर मरीजों की हालत जानी और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। सरकार ने मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और इलाज का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की है। एक जांच समिति भी गठित की गई है।
गुरुवार को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया को बताया कि पूरे प्रभावित इलाके की गहन जांच कराई जा रही है, जिसमें आठ से दस दिन का समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि आशंका थी कि पीने के पानी में नाले का गंदा पानी मिल गया है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में पहले से काम चल रहा था और फिलहाल भी जांच जारी है।
उन्होंने कहा कि पुलिस चौकी के पास का इलाका जांच के लिहाज से सबसे अहम है और उसी बिंदु को केंद्र में रखकर पूरे मामले की पड़ताल की जाएगी। विजयवर्गीय ने यह भी बताया कि उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की है।
मानवाधिकार आयोग और हाई कोर्ट सख्त
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जीवन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन बताया है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
पीआईबी के मुताबिक, स्थानीय लोग कई दिनों से दूषित पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। आयोग ने जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ितों को राहत की जानकारी तलब की है। उधर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने भी राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
इस बीच मौतों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों में 4 से 7 मौतें बताई जा रही हैं, जबकि स्थानीय लोग और कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या 10 से 13 तक बताई जा रही है, जिनमें एक 6 महीने का बच्चा भी शामिल है।
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि अब तक कुल आठ मौतें सामने आई हैं, जिनमें से दो से तीन मौतें प्राकृतिक कारणों से होने की बात कही जा रही है। हालांकि, अगर डॉक्टर यह स्पष्ट करते हैं कि इन मामलों में भी दूषित पानी पीना वजह रहा है, तो उन्हें भी प्रकोप से जुड़ी मौतों की सूची में शामिल किया जाएगा।



