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भारत में इस साल 40 प्रतिशत कम बारिश की आशंका लेकिन लद्दाख में 96 फीसदी अधिक वर्षा क्यों हैं चिंता का कारण?

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 4 जून से 17 जून के बीच बारिश के ताजा आंकड़ों के मुताबिक केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में सामान्य 2.2 मिमी बारिश के मुकाबले 4.3 मिमी बारिश दर्ज की गई जो सामान्य से 96 प्रतिशत अधिक है।

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फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

लद्दाख: भारत के बड़े हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर रहने और देश में बारिश की 40 प्रतिशत कमी होने के बावजूद एक इलाका ऐसा है जहां स्थिति बिल्कुल अलग रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 4 जून से 17 जून के बीच बारिश के ताजा आंकड़ों के मुताबिक केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में सामान्य 2.2 मिमी बारिश के मुकाबले 4.3 मिमी बारिश दर्ज की गई जो सामान्य से 96 प्रतिशत अधिक है।

इन दोनों स्थितियों में जमीन-आसमान का फर्क है। जहां महाराष्ट्र, गुजरात, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य 60 से लगभग 100 प्रतिशत तक बारिश की भारी कमी से जूझ रहे हैं, वहीं लद्दाख के ठंडे रेगिस्तानी इलाके में इस दौरान सामान्य से लगभग दोगुनी बारिश हुई है।

IMD का मानसून मैप चिंतित करने वाला

IMD के ताजा बारिश का नक्शा मौजूदा मानसून सीजन की असामान्य प्रकृति को दिखाता है। पूरे देश में 4 जून से 17 जून के बीच सामान्य 65.9 mm बारिश के मुकाबले भारत में सिर्फ 39.7 mm बारिश हुई है। बारिश की कमी और बढ़ गई है क्योंकि मध्य और पश्चिमी भारत में मानसून का आगे बढ़ना रुक गया है जिससे देश के बड़े हिस्सों में अच्छी बारिश का इंतजार बना हुआ है।

हालांकि ज्यादा ऊंचाई वाले हिमालयी इलाके में मौसम का मिजाज अलग रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तरी भारत से गुजरने वाले वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और पड़ोसी इलाकों से आने वाली नमी के कारण लद्दाख में बारिश और बर्फबारी हुई है। भारत के ज्यादातर हिस्सों में जून के दौरान बारिश मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भर करती है लेकिन लद्दाख का मौसम अक्सर वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और वहां की स्थानीय भौगोलिक स्थितियों के मिले-जुले असर से तय होता है।

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देश के दूसरे हिस्सों में होने वाली भारी बारिश की तुलना में 4.3 mm बारिश भले ही कम लगे लेकिन लद्दाख की शुष्क जलवायु के लिहाज से यह सामान्य स्थितियों से एक बड़ा बदलाव है।

लद्दाख समेत हिमालयी इलाकों में बारिश क्यों है चिंता का विषय?

हिमालय में मौसम के बदलते पैटर्न को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच ज्यादा बारिश हो रही है। वैज्ञानिकों ने देखा है कि उन इलाकों में भी अब अक्सर बारिश हो रही है जहां आम तौर पर बर्फबारी होती थी या मौसम सूखा रहता था। ऐसे बदलावों से पहाड़ों के संवेदनशील इलाकों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड), जमीन खिसकने (लैंडस्लाइड) और ग्लेशियर की झील फटने से आने वाली बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

इस बीच भारत के ज्यादातर हिस्सों में मानसून के फिर से जोर पकड़ने का इंतजार हो रहा है। IMD का अनुमान है कि 20 जून के बाद बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे सुधार होगा क्योंकि अरब सागर से नमी आने का सिलसिला तेज हो जाएगा।

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भारत के बारिश वाले मैप में इस साल अब तक लद्दाख उन जगहों में शामिल है जहां अच्छी बारिश हुई है। यह एक ऐसा दुर्लभ इलाका है जहां सामान्य से काफी ज्यादा बारिश दर्ज की गई। जबकि देश का ज्यादातर हिस्से मानसून की कमी से जूझ रहे हैं और बारिश के इंतजार में हैं।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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