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ईंधन निर्यात पर सरकार का बड़ा फैसला, डीजल पर ड्यूटी बढ़कर ₹55.5 हुई, ATF पर भी टैक्स बढ़ा

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में हाल के हफ्तों में तेजी देखी गई है। इसी के मद्देनजर 26 मार्च को सरकार ने डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क लागू किया था, ताकि घरेलू आपूर्ति प्रभावित न हो और निर्यात से होने वाले अतिरिक्त मुनाफे पर नियंत्रण रखा जा सके।

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(Photo- IANS)
फाइल फोटो

सरकार ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच शनिवार को डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क में बड़ा इजाफा किया है। डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि एटीएफ पर यह शुल्क 29.5 रुपये से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। पेट्रोल पर हालांकि कोई बदलाव नहीं किया गया है और इसकी निर्यात ड्यूटी शून्य ही रखी गई है।

सरकार का यह निर्णय घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और रिफाइनरियों के अत्यधिक मुनाफे पर लगाम लगाने के उद्देश्य से लिया गया है।

क्यों बढ़ाया गया टैक्स?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस बढ़ोतरी का प्राथमिक उद्देश्य राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देना है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ऐसे में भारतीय रिफाइनरियां घरेलू बाजार के बजाय निर्यात को प्राथमिकता देकर अनुचित लाभ (Windfall Profit) न कमा सकें, इसके लिए समय-समय पर इस टैक्स की समीक्षा की जाती है।

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में हाल के हफ्तों में तेजी देखी गई है। इसी के मद्देनजर 26 मार्च को सरकार ने डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क लागू किया था, ताकि घरेलू आपूर्ति प्रभावित न हो और निर्यात से होने वाले अतिरिक्त मुनाफे पर नियंत्रण रखा जा सके।

28 फरवरी को अमेरिका और इजराFल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ी। हालांकि 8 अप्रैल को ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति से बाजार को कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन स्थिति अब भी अनिश्चित बनी हुई है। ऐसे में सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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