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फिल्म निर्माताओं के संगठन IFTPC का आरोप- नकारात्मक रिव्यू की धमकी देकर इन्फ्लुएंसर कर रहे वसूली

आईएफटीपीसी ने साफ किया कि वह अभिव्यक्ति की आजादी या सच्ची आलोचना के खिलाफ नहीं है। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि इन बेईमान लोगों द्वारा किए जाने वाले फिरौती जैसे काम जायज रिव्यू से बहुत अलग हैं…

मुंबई: इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन प्रोड्यूसर्स काउंसिल (आईएफटीपीसी) ने जानबूझकर फिल्मों की नकारात्मक और बदनाम करने की मंशा से की गई फिल्म समीक्षा के बढ़ते ट्रेंड पर चिंता जाहिर की है। 375 से ज्यादा बड़े निर्माताओं की इस संस्था ने इसको लेकर एक सख्त बयान जारी किया है।

आईएफटीपीसी ने बयान में कुछ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स पर फिल्मों को जानबूझकर बदनाम करने के लिए नकारात्मक रिव्यू पोस्ट करने का आरोप लगाया है। संस्था ने अपने एक्स पोस्ट में इसे एक ‘चौंकाने वाला ट्रेंड’ बताया है।

आईएफटीपीसी ने कहा है कि वह ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी सलाह ले रही है, ताकि ‘दीवानी और आपराधिक’ दोनों तरह के कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सके। संगठन ने इसे कुछ इंफ्लुएंसर्स द्वारा की जा रही ‘फिरौती’ बताया है।

‘पैसे नहीं दिए तो फिल्म को करेंगे फ्लॉप’

इस नए ट्रेंड पर चिंता जताते हुए काउंसिल ने कहा, यह एक चिंताजनक चलन है, जहाँ कुछ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स निर्माताओं से पैसे की माँग करते हैं। ऐसा न करने पर वे फिल्मों, वेब सीरीज और अन्य कंटेंट के बारे में गलत और अपमानजनक रिव्यू या रिएक्शन वीडियो जारी करने की धमकी देते हैं।

बयान में संस्था ने आगे कहा है कि अगर उनकी यह मांग पूरी नहीं की जाती, तो ये इंफ्लुएंसर्स जानबूझकर फिल्म को बर्बाद करने और उसकी कमाई को नुकसान पहुँचाने के लिए एक अभियान चला देते हैं।

‘यह अभिव्यक्ति की आजादी नहीं’

आईएफटीपीसी ने साफ किया कि वह अभिव्यक्ति की आजादी या सच्ची आलोचना के खिलाफ नहीं है। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि इन बेईमान लोगों द्वारा किए जाने वाले फिरौती जैसे काम जायज रिव्यू से बहुत अलग हैं और ये भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के आर्थिक और रचनात्मक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा हैं।

संगठन ने कहा कि वह सोशल मीडिया प्रभावशाली लोगों द्वारा की जाने वाली इस तरह की जबरन वसूली से निर्माताओं की रक्षा के लिए कानूनी सलाह ले रहे हैं। बयान के अंत में कहा गया कि आईएफटीपीसी इन जबरन वसूली के ट्रेंड पर जल्द और निर्णायक रोक लगाने के लिए दीवानी और आपराधिक दोनों कानूनों के तहत हम कानूनी सलाहकारों से राय ले रहा है।

गौरतलब है पिछले एक दशक से सोशल मीडिया के बढ़ते चलन के कारण भारत में फिल्मों की समीक्षा का तरीका पूरी तरह बदल गया है। फिल्म पत्रकारों, समीक्षकों के अलावा सोशल मीडिया पर कटेंट क्रिएटर्स भी फिल्मों, वेब सीरीज, टीवी सीरियलों की समीक्षा कर रहे हैं। पारंपरिक मीडिया के अलावा, अब लाखों यूट्यूबर्स और इंफ्लुएंसर्स रिव्यू चैनल चला रहे हैं, जिनमें से कुछ के लाखों व्यूज और सब्सक्राइबर्स हैं।

क्या है आईफएटीपीसी?

भारतीय फिल्म और टेलीविजन प्रोड्यूसर्स काउंसिल यानी आईएफटीपीसी देश के फिल्म और टेलीविजन निर्माताओं की सबसे बड़ी और सबसे सक्रिय संस्था है। इस संगठन की शुरुआत 1990 में हुई थी। पहले इसे एसोसिएशन ऑफ मोशन पिक्चर्स एंड टेलीविजन प्रोग्राम प्रोड्यूसर्स के नाम से जाना जाता था। साल 2013 में इसका नाम बदलकर आईएफटीपीसी कर दिया गया। 2017 तक आते-आते, आईएफटीपीसी शो बिजनेस से जुड़े फिल्म और टेलीविजन निर्माताओं का सबसे बड़ा संगठन बन गया, जो लगातार अपने सदस्यों के हितों की रक्षा करता है। मशहूर फिल्म निर्माता साजिद नाडियाडवालाल इसके अध्यक्ष हैं।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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