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नहीं रहे हिंदुजा ग्रुप के चेयरमैन गोपीचंद हिंदुजा, ब्रिटेन में 85 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

गोपीचंद हिंदुजा का जन्म एक सिंधी कारोबारी परिवार में हुआ था, जिसके मुखिया उनके पिता परमानंद दीपचंद हिंदुजा थे। उन्होंने मुंबई के जय हिंद कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की और 1959 में पारिवारिक कारोबार से जुड़ गए। यहीं से उन्होंने कंपनी के दायरे को भारत से आगे बढ़ाकर मध्य पूर्व और यूरोप तक फैलाया।

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गोपीचंद हिंदुजा। फोटोः एक्स

हिंदुजा ग्रुप के चेयरमैन और ब्रिटेन के सबसे अमीर उद्योगपतियों में शुमार गोपीचंद पी. हिंदुजा का मंगलवार को निधन हो गया। वे 85 वर्ष के थे। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदुजा पिछले कुछ सप्ताह से बीमार चल रहे थे और लंदन के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

गोपीचंद हिंदुजा, हिंदुजा परिवार की दूसरी पीढ़ी के सदस्य थे और अपने संतुलित स्वभाव, तेज कारोबारी समझ और कम प्रचार वाले व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे। उन्होंने हिंदुजा ग्रुप को न सिर्फ व्यावसायिक सफलता दिलाई, बल्कि उसे विश्व स्तर पर प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता भी दिलाई।

वे अपने पीछे पत्नी सुनीता, दो बेटे संजय और धीरज, और बेटी रीता को छोड़ गए हैं। अपने बड़े भाई श्रीचंद हिंदुजा के मई 2023 में निधन के बाद उन्होंने चेयरमैन का पद संभाला था। इस साल की संडे टाइम्स रिच लिस्ट के अनुसार, गोपीचंद हिंदुजा और उनका परिवार लगातार ब्रिटेन के सबसे अमीर लोगों की सूची में शीर्ष स्थान पर बना हुआ था। गोपीचंद

‘जेपी’ के नाम से थे मशहूर

उद्योग जगत में गोपीचंद ‘जीपी’ के नाम से प्रसिद्ध थे। वे हिंदुजा ग्रुप और हिंदुजा ऑटोमोटिव लिमिटेड (यूके) के चेयरमैन थे। उन्होंने 1959 में मुंबई से अपने पारिवारिक कारोबार के साथ करियर की शुरुआत की और कंपनी को एक इंडो-मिडल ईस्ट ट्रेडिंग फर्म से एक बहुराष्ट्रीय कॉरपोरेट समूह में बदलने में अहम भूमिका निभाई।

1984 में गल्फ ऑयल का अधिग्रहण और 1987 में संघर्षरत अशोक लेलैंड की खरीद उनके नेतृत्व में लिए गए रणनीतिक फैसले थे। अशोक लेलैंड में यह निवेश भारतीय प्रवासी समुदाय (NRI) का भारत में पहला बड़ा निवेश माना गया, जिसने आगे चलकर इसे भारत की सबसे सफल औद्योगिक कहानियों में शामिल कर दिया।

एक दूरदर्शी कारोबारी के रूप में उन्होंने हिंदुजा ग्रुप का विस्तार ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में किया और देश भर में कई पावर प्रोजेक्ट्स की नींव रखी। गोपीचंद हिंदुजा ने 1959 में मुंबई के जय हिंद कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली थी। उन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिंस्टर से लॉ में और लंदन के रिचमंड कॉलेज से इकोनॉमिक्स में मानद डॉक्टरेट की उपाधि मिली थी।

1919 में परमानंद दीपचंद हिंदुजा द्वारा स्थापित हिंदुजा ग्रुप की शुरुआत सिंध (अब पाकिस्तान में) से हुई थी। बाद में कारोबार का मुख्यालय ईरान और फिर 1979 में लंदन स्थानांतरित हुआ। आज हिंदुजा ग्रुप करीब 30 देशों में कारोबार करता है।

आज यह समूह बैंकिंग, फाइनेंस, ऊर्जा, मीडिया, ट्रक, लुब्रिकेंट और केबल टेलीविजन जैसे कई क्षेत्रों में सक्रिय है और दुनियाभर में करीब 2 लाख लोगों को रोजगार देता है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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