चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी शत्रुजीत कपूर (Shatrujeet Kapur) को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पद से हटा दिया है। यह फैसला आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की संदिग्ध मौत को लेकर उठे विवाद के करीब दो महीने बाद लिया गया है। कपूर अक्टूबर में इसी मामले के चलते अवकाश पर भेजे गए थे। अब सरकार ने औपचारिक रूप से डीजीपी पद से उन्हें मुक्त कर दिया है और नए पुलिस प्रमुख की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी ओपी सिंह, जो अब तक अतिरिक्त प्रभार के तौर पर डीजीपी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, उन्हें अगले आदेश तक कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया गया है। हालांकि ओपी सिंह 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, ऐसे में सरकार 1 जनवरी 2026 से नए स्थायी डीजीपी की नियुक्ति करना चाहती है।
सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शत्रुजीत कपूर डीजीपी का प्रभार छोड़ने के बाद भी हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन, पंचकूला के चेयरमैन बने रहेंगे। इंजीनियरिंग स्नातक कपूर को अगस्त 2023 में डीजीपी नियुक्त किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसले के तहत उन्हें न्यूनतम दो साल का कार्यकाल मिला था, जो अब पूरा हो चुका है। नियमों के अनुसार वह अक्टूबर 2026 तक डीजीपी बने रह सकते थे।
आईपीएस अधिकारी की मौत से जुड़ा है मामला
7 अक्टूबर को 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार (52) मृत पाए गए थे। पूरन कुमार ने आठ पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा था जिसमें उन्होंने शत्रुजीत कपूर समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों पर जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और सार्वजनिक अपमान के गंभीर आरोप लगाए थे। इस घटना के बाद विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का दबाव बढ़ा, जिसके चलते सरकार ने पहले रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारनिया का तबादला किया और बाद में 14 अक्टूबर को कपूर को अवकाश पर भेज दिया गया।
पूरन कुमार की पत्नी, आईएएस अधिकारी अमनित पी. कुमार ने एक सप्ताह बाद पोस्टमॉर्टम की सहमति दी थी। यह सहमति उन्हें चंडीगढ़ पुलिस की निष्पक्ष जांच के आश्वासन और हरियाणा सरकार की ओर से दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के भरोसे के बाद दी गई थी।
यूपीएससी को भेजा जाएगा वरिष्ठ IPS अधिकारियों का पैनल
राज्य सरकार ने नए डीजीपी की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें पांच वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का रिकॉर्ड शामिल किया जाएगा, ताकि यूपीएससी की अध्यक्षता वाली एम्पैनलमेंट कमेटी तीन नामों का पैनल तैयार कर सके।
हालांकि यूपीएससी ने सरकार को यह भी याद दिलाया है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रस्ताव रिक्ति से पहले भेजा जाना चाहिए। आयोग ने यह टिप्पणी इसलिए की थी क्योंकि कपूर केवल अवकाश पर थे और कभी भी DGP के रूप में लौट सकते थे, जिससे औपचारिक रिक्ति नहीं बनती थी। अब उन्हें डीजीपी पद से हटाए जाने के बाद यह बाधा दूर हो गई है।
यूपीएससी को भेजे जाने वाले प्रस्ताव में शत्रुजीत कपूर का नाम भी शामिल होगा, क्योंकि उनके पास अभी दस महीने से अधिक की सेवा शेष है। अन्य चार अधिकारियों में 1991 बैच के संजीव कुमार जैन, 1992 बैच के अजय सिंघल और 1993 बैच के आलोक मित्तल व अर्शिंदर चावला भी हैं। ये सभी पे मैट्रिक्स लेवल-16 में डीजीपी रैंक पर तैनात हैं।
हालांकि सूत्रों का कहना है कि कपूर का नाम प्रस्ताव में होने के बावजूद यूपीएससी उन्हें अंतिम तीन के पैनल में शामिल न करे, इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे पहले 2021 में भी तत्कालीन डीजीपी मनोज यादव का नाम सेवा शेष होने के बावजूद पैनल में शामिल नहीं किया गया था, क्योंकि उन्होंने इस पद के लिए सहमति नहीं दी थी।



