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HAL ने रूसी कंपनी के साथ MoU पर किए हस्ताक्षर, भारत में बनेगा यात्री विमान एसजे-100

HAL ने भारत में यात्री विमान एसजे-100 के उत्पादन के लिए रूसी कंपनी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत रोजगार सृजन की उम्मीदें बढ़ने की संभावना है।

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HAL ने रूसी कंपनी के साथ किया समझौता, फोटोः आईएएनएस

नई दिल्लीः भारत के नागरिक उड्डयन विनिर्माण के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारत में SJ-100 नागरिक कम्यूटर विमान के उत्पादन हेतु रूस की सार्वजनिक संयुक्त स्टॉक कंपनी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (PJSC-UAC) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

HAL की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार दोनों देशों के बीच यह समझौता मॉस्को में हुआ। इस समझौते के तहत तीन दशकों में ऐसा पहली बार होगा जब पूर्ण यात्री विमान का निर्माण भारत में किया जाएगा।

एचएएल द्वारा जारी किए गए विवरण के मुताबिक, “एचएएल और सार्वजनिक संयुक्त स्टॉक कंपनी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (पीजेएससी-यूएसी) रूस ने 27 अक्टूबर, 2025 को मॉस्को, रूस में सिविल कम्यूटर विमान एसजे-100 के उत्पादन के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।”

SJ-100 विमान क्या है?

वर्तमान में 16 से ज्यादा वाणिज्यिक एयरलाइन ऑपरेटरों के साथ परिचालन में SJ-100 एक दोहरे इंजन और संकीर्ण शरीर (नैरो बॉडी) वाला विमान है। ऐसे 200 से ज्यादा विमानों का उत्पादन पहले ही किया जा चुका है।

नए एमओयू के तहत, HAL को भारत के घरेलू ग्राहकों के लिए SJ-100 के निर्माण का अधिकार होगा। इसे सरकार की उड़ान योजना के तहत छोटी दूरी की कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

दोनों कंपनियों ने एक बयान में कहा कि “यह सहयोग एचएएल और यूएसी के बीच आपसी विश्वास और दीर्घकालिक साझेदारी का प्रमाण है।”

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इसमें आगे कहा गया कि “यह नागरिक विमान उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भारत की यात्रा में एक नया मील का पत्थर है।”

यह सहयोग AVRO HS-748 परियोजना, जो 1961 में शुरू हुई और 1988 में समाप्त हुई, के बाद पहली बार भारत में एक “पूर्ण यात्री” विमान का उत्पादन करेगा।

विमानन जरूरतों के पूरा होने की उम्मीद

इस पहल से भारत की बढ़ती विमानन जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। उद्योग के अनुमान बताते हैं कि अगले दशक में, क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने के लिए देश को इस श्रेणी के 200 से ज्यादा जेट विमानों की जरूरत होगी। इसके साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र और आस-पास के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मार्गों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 350 अतिरिक्त विमानों की भी जरूरत होगी।

HAL ने कहा कि इस परियोजना से स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा मिलने, निजी उद्योग की भागीदारी के लिए अवसर उपलब्ध होने तथा विमानन मूल्य श्रृंखला में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। ऐसे में इसके जरिए लोगों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध होने की संभावना बढ़ेगी।

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इस समझौते पर हस्ताक्षर भारत और रूस के बीच के पुराने रिश्तों को दर्शाता है। भारत और रूस एक-दूसरे के रणनीतिक साझेदार हैं।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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