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सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता होगी खत्म? JDU ने लोकसभा अध्यक्ष को दिया नोटिस

लोकसभा में जदयू के नेता दिलेश्वर कामैत ने स्पीकर को नोटिस देकर गिरधारी यादव की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह कदम ‘विरोधी गतिविधियों’ के आरोप में उठाया गया है।

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गिरधारी यादव। फोटोः फेसबुक (गिरधारी यादव)

नई दिल्ली: जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने पार्टी लाइन से अलग जाकर ईवीएम पर सवाल उठाने वाले अपने सांसद गिरधारी यादव के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।

लोकसभा में जदयू के नेता दिलेश्वर कामैत ने स्पीकर को नोटिस देकर यादव की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह कदम ‘विरोधी गतिविधियों’ के आरोप में उठाया गया है।

जदयू नेतृत्व ने गिरधारी यादव के खिलाफ कार्रवाई की मांग में उनके पिछले बयानों को भी आधार बनाया है।

गिरधारी लाल ने क्या कहा था?

पिछले साल गिरधारी यादव ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया था। इसके साथ ही उन्होंने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना भी की थी। उनका कहना था कि आयोग को न तो बिहार के इतिहास की व्यावहारिक समझ है और न ही भौगोलिक परिस्थितियों की।

जदयू नेता ने कहा था कि जरूरी दस्तावेज जुटाने में उन्हें 10 दिन लगे, जबकि उनके बेटे जैसे लोग, जो विदेश में रहते हैं, एक महीने में यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाएंगे। उन्होंने इस प्रक्रिया को जल्दबाजी में थोपे जाने वाला फैसला बताते हुए कम से कम छह महीने का समय देने की मांग की थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि यह उनका निजी मत है और सच बोलना उनका अधिकार है।

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गिरधारी यादव ने यह भी सवाल उठाया था कि अगर लोकसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची सही थी, तो कुछ ही महीनों बाद विधानसभा चुनाव के लिए वह गलत कैसे हो गई। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा था कि क्या उनका खुद का निर्वाचन गलत मतदाता सूची के आधार पर हुआ है।

इन बयानों को लेकर जदयू ने जुलाई 2025 में उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में कहा गया था कि ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया पर उनकी सार्वजनिक टिप्पणियां पार्टी के आधिकारिक रुख के खिलाफ हैं और इससे संगठन की छवि को नुकसान पहुंचा है। पार्टी ने दोहराया था कि वह हमेशा से चुनाव आयोग और ईवीएम के इस्तेमाल का समर्थन करती रही है, चाहे वह पहले INDIA गठबंधन में रही हो या अब एनडीए का हिस्सा हो।

पार्टी ने इसे अनुशासन में चूक बताते हुए कहा था कि चुनावी साल में इस तरह के बयान न सिर्फ अनुशासनहीनता दर्शाते हैं, बल्कि विपक्ष के “बेबुनियाद और राजनीतिक आरोपों” को भी बल देते हैं।

गौरतलब है कि यह मामला राजनीतिक रूप से इसलिए भी संवेदनशील बना, क्योंकि विधानसभा चुनाव के दौरान गिरधारी यादव के बेटे चाणक्य प्रकाश रंजन ने बेलहर सीट से राजद के टिकट पर चुनाव लड़ा था, जहां उनका मुकाबला जदयू उम्मीदवार से था, जिससे पार्टी के भीतर असहज स्थिति बनी थी।

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नीतीश कुमार फिर बने जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष

इसी बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक बार फिर सर्वसम्मति से जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया है। उनके अलावा इस पद के लिए किसी अन्य नेता ने नामांकन नहीं किया।

जदयू नेता अनिल हेगड़े ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नामांकन की अंतिम तिथि 22 मार्च थी, 23 मार्च को जांच हुई और 25 मार्च को नाम वापस लेने की अंतिम समय सीमा तय थी। चूंकि केवल नीतीश कुमार ने ही नामांकन दाखिल किया था, इसलिए उन्हें निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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