महाराष्ट्र के नागपुर में साइबर पुलिस ने बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप समेत चार सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इन पर आरोप है कि इन्होंने E20 (20% इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी सहित वाहन निर्माता कंपनी टोयोटा को लेकर भ्रामक और गलत जानकारी फैलाई।
यह मामला बीजेपी सोशल मीडिया सेल के शहर अध्यक्ष शिशिर त्रिपाठी की शिकायत पर दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 356 और 296 के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस को लेकर किए गए थे दावे
एफआईआर के मुताबिक मनीष कश्यप ने अपने यूट्यूब चैनल पर कई वीडियो अपलोड किए, जिनमें उन्होंने दावा किया कि उनकी टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस में E20 पेट्रोल भरवाने के बाद खराबी आने लगी। जबकि कंपनी के अनुसार यह मॉडल 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के इस्तेमाल के लिए अधिकृत और अनुकूल है।
मनीष कश्यप ने एक वीडियो में वाहन के फ्यूल सिस्टम के अलग-अलग हिस्सों से लिए गए ईंधन के नमूने दिखाते हुए दावा किया कि उनमें इथेनॉल की मात्रा असामान्य थी और ईंधन इससे प्रभावित हुआ था। दूसरे वीडियो में उन्होंने कार का फ्यूल टैंक हटाकर दिखाया और दावा किया कि फ्यूल पंप तथा फिल्टर असेंबली पर असर पड़ा है।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि इस समस्या को ‘फ्यूल कंटैमिनेशन’ माना जाता है, तो वाहन की जांच, सफाई और पार्ट्स बदलने का खर्च कंपनी की एक्सटेंडेड वारंटी के तहत आएगा या नहीं।
गडकरी की चुनौती- एक भी ऐसी कार बताइए
E20 पेट्रोल पर जारी बहस के बीच मंगलवार को विकसित भारत कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए नितिन गडकरी ने इथेनॉल मिश्रण का जोरदार बचाव किया। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, ‘देश में एक भी ऐसी कार का नाम बताइए, जिसमें E20 पेट्रोल की वजह से कोई समस्या आई हो। ऐसी एक भी घटना नहीं है।’
गडकरी ने आरोप लगाया कि E20 पेट्रोल के खिलाफ ‘झूठा नैरेटिव’ तैयार किया जा रहा है और इसे ‘पेड कैंपेन’ के जरिए फैलाया जा रहा है।
गडकरी ने कहा कि भारत आज भी जीवाश्म ईंधन के आयात पर भारी रकम खर्च करता है। उनके मुताबिक, देश हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर खर्च करता है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल जैसे स्वच्छ ईंधन का उपयोग बढ़ाने से न केवल कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।
बताते चलें कि भारत ने 2025 में ही पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इसके बाद से देश में आम तौर पर अब 20 प्रतिशत इथेनॉल मिला पेट्रोल ही मिलता है। हालांकि, इससे गाड़ियों पर पड़ने वाले असर को लेकर बहस चली आ रही है। सरकार कई बार यह दावा कर चुकी है कि इथेनॉल मिले पेट्रोल का गाड़ियों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। हालांकि, सरकार ने ये भी माना है कि इससे माइलेज में मामूली असर दिख सकता है।
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