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EPFO ने रिटर्न फाइलिंग को आसान बनाने के लिए पेश की नई ई-चालान-कम-रिटर्न (ECR) सुविधा

नए बदलाव में सिस्टम-आधारित सत्यापन लागू किए गए हैं, जो गलत रिटर्न दाखिल होने से रोकेंगे और डेटा-प्रविष्टि की समस्याओं को खत्म करेंगे।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ/EPFO) ने नियोक्ताओं और प्रतिष्ठानों के लिए रिटर्न फाइलिंग को सरल और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से इलेक्ट्रॉनिक चालान-सह-रिटर्न (ईसीआर) सुविधा को नया रूप दिया है। केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने शुक्रवार को जारी नोटिफिकेशन में बताया गया कि यह नई सुविधा सितंबर के वेतन माह से लागू होगी।

नई सुविधा में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं जिनका उद्देश्य डेटा प्रविष्टि की त्रुटियों को दूर करना और अनुपालन को सरल बनाना है। अब रिटर्न जमा करने की प्रक्रिया को भुगतान करने की प्रक्रिया से अलग कर दिया गया है।

नए बदलाव में सिस्टम-आधारित सत्यापन लागू किए गए हैं, जो गलत रिटर्न दाखिल होने से रोकेंगे और डेटा-प्रविष्टि की समस्याओं को खत्म करेंगे।

यह अपडेटेड सिस्टम कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम की धारा 14B (विलंब के लिए जुर्माना) और 7Q (बकाया राशि पर ब्याज) के तहत लगने वाले हर्जाने और ब्याज की राशि की स्वचालित रूप से गणना करेगा।

अब नियोक्ताओं के लिए मासिक अंशदान के साथ धारा 7Q के तहत देय ब्याज का भुगतान करना अनिवार्य होगा। हालांकि, मौजूदा रिटर्न फाइल प्रारूप (.txt) में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नियोक्ता नियमित, पूरक या संशोधित रिटर्न फाइल करना जारी रख सकेंगे।

ईपीएफओ के एक अधिकारी ने बताया कि इस बदलाव का उद्देश्य संगठन को अधिक यूजर-फ्रेंडली बनाना है। इससे पुराने सिस्टम में होने वाली डेटा एंट्री की समस्याओं और त्रुटियों में कमी आएगी।

नई ईसीआर प्रणाली यह सुनिश्चित करेगी कि कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) में गलत योगदान न हो। उदाहरण के लिए, जिन कर्मचारियों की मासिक आय 15,000 रुपये से अधिक है, वे ईपीएस के पात्र नहीं हैं, लेकिन कई नियोक्ता अभी भी योगदान करते हैं। नया सिस्टम ऐसे मामलों को फाइलिंग से पहले अलर्ट करेगा।

इसके अलावा, ईपीएस सदस्यता 58 वर्ष की आयु पर समाप्त हो जाती है, जब तक कि कर्मचारी डिफर्ड पेंशन का विकल्प न चुनें। पुराने सिस्टम में 58 वर्ष के बाद भी योगदान रोकने का विकल्प नहीं था, जिससे शिकायतें उत्पन्न होती थीं। नई ईसीआर प्रणाली 58 वर्ष के बाद योगदान को खुद ही रोक देगी, जब तक कि नियोक्ता विशेष रूप से डिफर्ड पेंशन के लिए चिह्नित न करे।

ईपीएफओ का कहना है कि इन सुधारों के माध्यम से अनुपालन को सरल बनाना, त्रुटियों को कम करना और नियोक्ताओं व कर्मचारियों दोनों के लिए अधिक स्पष्टता प्रदान करना है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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