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I-PAC पर ईडी का शिकंजा, विनेश चंदेल की गिरफ्तारी के बाद 50 करोड़ रुपये किए बरामद

चुनावी प्रबंधक फर्म I-PAC पर ईडी ने शिकंजा कसा है। I-PAC पश्चिम बंगाल में टीएमसी के लिए विधानसभा चुनाव का काम देख रही है।

ED recovered 50 crore from I-PAC during raid after arrest of vinesh chandel, ईडी, आई-पैक
फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

नई दिल्लीः प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC (आई-पैक) पर छापेमारी के दौरान 50 करोड़ रुपये बरामद किए हैं। इससे पहले सोमवार को जांच एजेंसी ने I-PAC के निदेशक और सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी की थी। यह मामला कथित कोयला तस्करी से संबंधित है जिसमें ईडी ने अब तक 50 करोड़ रुपये की बरामदगी की है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, विनेश चंदेल के पास कंपनी की 33 फीसदी हिस्सेदारी है। ईडी ने सोमवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था। उन्हें देर रात पटियाला हाउस कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बरनाला टंडन के समक्ष पेश किया गया।

चंदेल को 10 दिनों की हिरासत में भेजा गया

मंगलवार मध्यरात्रि को उन्हें 10 दिनों की हिरासत में भेजा गया। एक सूत्र के मुताबिक, अदालत में “ सुनवाई 13 अप्रैल की रात से 14 अप्रैल की सुबह तक चली। अदालत ने चंदेल को 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया। ”

ईडी ने आई-पैक के खिलाफ यह जांच दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के आधार पर शुरू की है। खबर के मुताबिक, ” I-PAC कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अपराध से प्राप्त धन को मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से कई करोड़ रुपये में बदला गया है जिसमें से अब तक 50 करोड़ रुपये बरामद किए जा चुके हैं। तलाशी में आपत्तिजनक सामग्री मिली है और संबंधित व्यक्तियों के बयानों से चंदेल की संलिप्तता साबित हुई है, जो निदेशक के रूप में सहमति, मिलीभगत या लापरवाही से किए गए अपराधों के लिए उत्तरदायी हैं। “

इस जांच के दौरान लेन-देन में शामिल विभिन्न व्यक्तियों के बयान दर्ज किए गए।

ईडी की गिरफ्तारी गलत और अनावश्यकः विकास पाहवा

विनेश चंदेल के वकील विकास पाहवा ने उनकी गिरफ्तारी को पूरी तरह गलत और अनावश्यक करार दिया। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ” यह मामला जनवरी 2026 में शुरू हुआ था, जब ईडी ने आई-पैक के दफ्तर पर छापा मारा। शुरू में जांच 2020 की पुरानी एफआईआर, चार्जशीट और ईडी के पुराने ईसीआईआर पर आधारित थी, जो कोयला घोटाले से संबंधित था। बाद में ईडी को एहसास हुआ कि आई-पैक का कोयला घोटाले से कोई सीधा संबंध नहीं है। इसके बावजूद एजेंसी ने एक नया ईसीआईआर और नई एफआईआर दर्ज की, जिसके आधार पर विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया गया। “

उन्होंने आगे बताया कि ये मामले आयकर अधिनियम, जीएसटी अधिनियम या आरबीआई नियमों के उल्लंघन हो सकते हैं। लेकिन इनमें कोई ‘शेड्यूल्ड ऑफेंस’ (पीएमएलए के तहत निर्धारित अपराध) नहीं है। बिना शेड्यूल्ड ऑफेंस के ईडी का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं बनता।

ईडी ने दावा किया कि जांच के दौरान कुछ ईमेल और चैट डिलीट किए गए जिससे सहयोग नहीं मिल रहा था। हालांकि पाहवा ने इसका जवाब देते हुए कहा कि कैश में फीस लेना धोखाधड़ी नहीं है।

उन्होंने कहा कि “अगर आप नई एफआईआर, ईसीआईआर और लगाए गए आरोपों को देखें तो उनमें कोई गंभीर अपराध बनता ही नहीं दिखता। आरोपों में कुछ कंसल्टेंसी फीस का 50 प्रतिशत चेक से और 50 प्रतिशत कैश में लेना, उस पर जीएसटी चुकाना और कुछ नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (एनबीएफसी) से लोन लेना शामिल है। ऐसे में कई लोग अपनी इनकम कैश में लेते हैं, जिस पर टैक्स लग सकता है, लेकिन इसे मनी लॉन्ड्रिंग नहीं बनाया जा सकता। जीएसटी उल्लंघन या प्राइवेट पार्टी से लोन लेना भी पीएमएलए के दायरे में नहीं आता, क्योंकि इसमें कोई धोखाधड़ी या साजिश साबित नहीं होती।”

प्रशांत किशोर ने की थी I-PAC की स्थापना

I-PAC की स्थापना चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने की थी। यह फर्म पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का प्रबंधन सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए देख रही है।

वहीं, चंदेल इसकी स्थापना के साथ ही इससे जुड़े हुए हैं। उन्होंने भोपाल के राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय (एनएलआईयू) से स्नातक किया है। चंदेल ने कुछ समय तक बतौर पत्रकार भी काम किया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में वकालत भी की।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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