नई दिल्लीः आम आदमी पार्टी में शुक्रवार (24 अप्रैल) दोपहर उथल-पुथल देखने को मिली जब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा समेत 3 सांसदों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्यसभा के 2/3 सांसदों के पार्टी छोड़ने का ऐलान किया। इसमें लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति (चांसलर) अशोक मित्तल (62) भी शामिल हैं। यह घटना प्रवर्तन निदेशालय (ED) के छापे का सामना करने के महज 10 दिन बाद हुई है।
गौरतलब है कि उन्हें हाल ही में राघव चड्ढा की जगह आम आदमी पार्टी के उपनेता नियुक्त किया था। शुक्रवार को अन्य सांसदों समेत वह भी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। आम आदमी पार्टी में उनकी बढ़ती लोकप्रियता और पार्टी छोड़ने के इस अचानक फैसले ने पंजाब और अन्य जगहों पर राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। 2022 में पहली बार सांसद बने मित्तल एक पारिवारिक मिठाई व्यवसाय से उठकर एक प्रमुख निजी विश्वविद्यालय के संस्थापक बने।
बिजनेस फैमिली में हुआ था मित्तल का जन्म
अशोक मित्तल का जन्म जालंधर कैंट में एक पारंपरिक व्यावसायिक परिवार में हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से राजस्थान से ताल्लुक रखता है। उनके दिवंगत पिता बलदेव राज मित्तल द्वारा स्थापित प्रसिद्ध ब्रांड ‘लवली स्वीट्स’ के माहौल में पले-बढ़े। उन्होंने गुरु नानक देव विश्वविद्यालय से कानून में डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने शुरुआत में अपने भाइयों नरेश और रमेश मित्तल के साथ पारिवारिक व्यवसाय में काम किया।
हालांकि मित्तल मिठाई के कारोबार से आगे बढ़ना चाहते थे। 1991 में परिवार ने “लवली ऑटोज” के साथ ऑटोमोबाइल क्षेत्र में कदम रखा। यह उनकी जड़ों से परे पहला बड़ा विस्तार था। वास्तविक मोड़ 2000 में तब आया जब मित्तल ने लवली इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की स्थापना की और परिवार को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाया। इस उद्यम ने उत्तर भारत के सबसे बड़े निजी विश्वविद्यालयों में से एक लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) की नींव रखी। इसकी स्थापना 2005 में हुई थी।
मित्तल के कुलाधिपति रहते हुए एलपीयू एक मामूली परिसर से बढ़कर 600 एकड़ में फैला एक विशाल संस्थान बन गया। इसमें 35,000 से अधिक छात्र पढ़ते हैं और 3,000 से अधिक फैकल्टी और कर्मचारी कार्यरत हैं।
2022 में बने राज्यसभा सांसद
2022 में पंजाब से राज्यसभा सांसद के रूप में मित्तल ने संसद में प्रवेश किया। तब से वह आम आदमी पार्टी (AAP) में एक मुखर और प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में उभरे हैं। हाल ही में राज्यसभा में उन्हें राघव चड्ढा की जगह उपनेता बनाया गया था। बीते 15 अप्रैल को ईडी ने मित्तल के जालंधर स्थित आवास के साथ-साथ उनके संस्थान से जुड़े कई स्थानों पर तलाशी ली। ईडी की यह छापेमारी अशोक मित्तल और उनके बेटे से जुड़े संदिग्ध मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से संबंधित थी।
एजेंसी के इस अभियान के दौरान उनके भाइयों समेत परिवार के अन्य सदस्यों से जुड़ी संपत्तियों की भी तलाशी ली गई। तलाशी में लवली ग्रुप से जुड़े प्रतिष्ठान भी शामिल थे। इनमें एलपीयू के साथ-साथ लवली ऑटो, लवली स्वीट्स और जालंधर एवं फागवारा में फैले एक दूरस्थ शिक्षा केंद्र जैसे व्यवसाय भी शामिल थे। दिन भर तलाशी जारी रहने के दौरान प्रमुख परिसरों के बाहर सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे।
इसके बावजूद उन्होंने सार्वजनिक रूप से विवादों को कम महत्व दिया और संसद में पार्टी की उपस्थिति को मजबूत करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने तीखे रुख अपनाने से भी परहेज नहीं किया। हाल ही में उन्होंने चंडीगढ़ में कानून-व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और तर्क दिया कि केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन केंद्रीय नियंत्रण में आता है और सुरक्षा मुद्दों से निपटने के तरीके पर सवाल उठाए।
मित्तल पंजाब में आम आदमी पार्टी के शासन मॉडल के समर्थक थे। हालांकि, उन्होंने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है। 2027 के शुरुआती महीनों में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी के लिए यह एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। राज्यसभा के सात सदस्यों द्वारा अचानक से पार्टी छोड़ना पार्टी के लिए करारा झटका है।

