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Ebola वायरस के नए स्ट्रेन बुंडीबुग्यो को लेकर क्यों बढ़ी है चिंता? WHO को घोषित करनी पड़ी हेल्थ इमरजेंसी

Ebola Virus: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने रविवार (17 मई) को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में फैले इबोला के प्रकोप (Ebola outbreak) को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंताजनक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न) घोषित किया है। यह इबोला का बुंडीबुग्यो वायरस है जो फैल रहा है।

डब्ल्यूएचओ ने कहा कि वायरस के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैली यह महामारी वैश्विक महामारी की श्रेणी में नहीं आती लेकिन कांगो से भूमि सीमा साझा करने वाले देशों में इसके और अधिक फैलने का खतरा है।

Ebola है गंभीर बीमारी

अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के मुताबिक, इबोला एक गंभीर बीमारी है। यह वायरस अक्सर जानलेवा है। इससे पीड़ित व्यक्ति को बुखार, शरीर में दर्द, उल्टी और दस्त जैसे लक्षण दिखते हैं। यह संक्रमित व्यक्तियों के शरीर के तरल पदार्थों, दूषित पदार्थों या इस बीमारी से मृत व्यक्तियों के सीधे संपर्क से फैलता है। हालांकि यह कोविड-19 की तरह हवा में तेजी से नहीं फैलता। इससे पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में आने से इसके फैलने का खतरा अधिक रहता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इबोला का एक नया और तेजी से फैलता हुआ प्रकोप है जो तीन सप्ताह से अधिक समय से फैल रहा है और आसपास के अफ्रीकी देशों के लिए उच्च जोखिम पैदा कर रहा है।

World Health Organization logo: white emblem with a staff and snake over a globe, surrounded by olive branches on a blue background, with 'World Health Organization' text.
विश्व स्वास्थ्य संगठन फोटोः आईएएनएस

अफ्रीका रोग नियंत्रण केंद्र के आंकडों के मुताबिक, अब तक 336 संभावित मामलों में से कम से कम 88 संदिग्ध मौतें वायरस से हुई हैं। मौत का कारण इबोला का दुर्लभ बंडीबुग्यो स्ट्रेन है, जिसके लिए कोई स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है।

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1976 में कांगो में इसकी खोज हुई थी। देश में अब तक यह 17वीं बार फैला है। यह वायरस कांगो के आसपास के इलाकों में तेजी से फैल रहा है। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि पड़ोसी देश युगांडा और राजधानी किंशासा में भी मामले सामने आए थे। हालांकि बाद में उसने स्पष्ट किया कि किंशासा में पाया गया मरीज वास्तव में नेगेटिव था।

युगांडा में सामने आए दोनों मामले उन लोगों के थे जिन्होंने हाल ही में कांगो से यात्रा की थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बताया कि शनिवार रात तक दोनों मरीज कंपाला के गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती थे।

इसके लिए नहीं उपलब्ध है कोई टीका

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, बुंडीबुग्यो स्ट्रेन आर्थोइबोलावायरस फैमिली का हिस्सा है। यही इबोला जैसी घातक बीमारी का कारण बनता है। भारत में फिलहाल इसका कोई मामला सामने नहीं आया है। एक्सपर्ट्स ने हालांकि लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता बताई है।

इबोला के लिए फिलहाल कोई भी टीका उपलब्ध नहीं है। हालांकि इसके लिए कुछ टीकों पर परीक्षण चल रहा है। इस रोग में मृत्यु दर औसतन लगभग 50% है। पिछले प्रकोपों ​​में मृत्यु दर 25 से 90% तक रही है।

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इबोला बीमारी के कारणों में तीन प्रमुख वायरस हैं। इबोला वायरस, सूडान वायरस और बुंडीबुग्यो वासरस। फिलहाल जो वायरस कांगो और युगांडा में फैला रहा है। यह प्रकोप “असाधारण” है क्योंकि इबोला-जैरे स्ट्रेन के विपरीत, बुंडीबुग्यो वायरस के लिए कोई स्वीकृत उपचार या टीके उपलब्ध नहीं हैं।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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