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दुर्गापुर गैंगरेप केसः एनसीडब्ल्यू की रिपोर्ट में सुरक्षा और जांच में गंभीर लापरवाही उजागर

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में कथित गैंगरेप के पांचों आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी उसकी बहन की मदद से पकड़ा गया।

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IANS

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की सदस्य डॉ. अर्चना मजूमदार ने दुर्गापुर के आईक्यू सिटी मेडिकल कॉलेज में मेडिकल छात्रा से हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले पर अपनी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट में अस्पताल और कॉलेज परिसर की सुरक्षा व्यवस्था, जांच प्रक्रिया और प्रशासनिक जिम्मेदारी में गंभीर खामियां बताई गई हैं।

आयोग ने पाया कि जिस सड़क से होकर कॉलेज जुड़ा है, वह घने जंगल के बीच से गुजरती है, जहां न तो स्ट्रीट लाइट है और न ही सीसीटीवी कैमरे। पुलिस की गश्त का भी कोई प्रमाण नहीं मिला। ‘रात्रि साथी’ सुरक्षा योजना इस क्षेत्र में निष्क्रिय पाई गई। इसके अलावा अस्पताल में यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति या गाइडलाइन का कोई प्रदर्शन नहीं मिला, जो कानून का उल्लंघन है।

रिपोर्ट के अनुसार, 10 अक्टूबर की रात छात्रा अपने मित्र के साथ बाहर भोजन के लिए गई थी, जब पांच युवकों ने उसका पीछा किया और जंगल क्षेत्र में उसे निशाना बनाया। उसे खून से लथपथ हालत में हॉस्टल लाया गया और बाद में अस्पताल में भर्ती किया गया। एनसीडब्ल्यू ने कहा कि पुलिस ने 12 अक्टूबर तक अपराध स्थल को सील नहीं किया, जिससे सबूत नष्ट होने का खतरा बढ़ गया।

आयोग ने पीड़िता को मुफ्त और उच्चस्तरीय इलाज देने, मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराने और कॉलेज परिसर में स्थायी पुलिस चौकी व सीसीटीवी निगरानी जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में कहा गया कि यह घटना संस्थागत सुरक्षा तंत्र की नाकामी और जांच में लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण है।

पांचों आरोपी गिरफ्तार

बता दें कि पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में कथित गैंगरेप के पांचों आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी उसकी बहन की मदद से पकड़ा गया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि आरोपी सफीक शेख की बहन रोजीना शेख ने सोमवार को दुर्गापुर के आंदल पुल के नीचे उसे ढूंढने में मदद की। रोजीना ने पुलिस से कहा, “मैं चाहती थी कि वह कानून का सामना करे। हमारे परिवार को उसकी वजह से शर्मिंदा नहीं होना चाहिए।” उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करते समय सफीक कांप रहा था।

इसके तुरंत बाद, एक और आरोपी शेख नसीरुद्दीन को भी गिरफ्तार कर लिया गया, जिसकी मोटरसाइकिल का इस्तेमाल कथित तौर पर घटना स्थल से भागने के लिए किया गया था। इन दोनों की गिरफ्तारी के साथ, अब सभी पाँचों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं।

गौरतलब है कि तीन आरोपी रियाजुद्दीन (कॉलेज का पूर्व सुरक्षा गार्ड), अपू बरुई और फिरदौस शेख पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं और उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया दिया गया था। जबकि सोमवार को गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों को नौ दिन की हिरासत में भेजा गया है।

दुर्गापुर बार एसोसिएशन ने आरोपियों का प्रतिनिधित्व करने से इनकार कर दिया है। विधिक सहायता काउंसिल पूजा कुर्मी ने सफीक और नसीरुद्दीन के लिए वकालतनामा दाखिल किया, लेकिन जमानत नहीं मांगी।

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपियों को उस जगह ले जाया जाएगा, जो मेडिकल कॉलेज के गेट के पास स्थित परानागंज कालीबाड़ी शवदाह गृह के पास का जंगल इलाका है। यहीं वारदात हुई थी। सभी आरोपियों की मेडिकल जांच कराई जा रही है और अदालत से डीएनए प्रोफाइलिंग की अनुमति मांगी जाएगी। जैसे ही पीड़िता बयान देने की स्थिति में होगी, पहचान परेड कराई जाएगी। पुलिस दो आरोपियों को पहले ही उनके घरों पर छिपाए गए सबूत बरामद करने के लिए ले जा चुकी है।

घटना कैसे हुई

ओडिशा के बालासोर की रहने वाली 23 वर्षीय छात्रा शुक्रवार रात करीब 8 से 8:45 बजे के बीच अपने पुरुष मित्र के साथ डिनर के लिए बाहर गई थी। तभी पांच युवकों ने उन्हें रोक लिया, फोन छीन लिया और लड़की से बारी-बारी से दुष्कर्म किया। उसका साथी वहां से भाग निकला, जिसे अब पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। आरोपियों में एक अस्पताल कर्मचारी, एक नगर निगम का संविदा कर्मचारी और एक बेरोजगार युवक शामिल है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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