वाशिंगटनः अमेरिका और ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम 22 अप्रैल की आधी रात को समाप्त होने से कुछ ही घंटे पहले खतरे में है। दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल को 15 दिनों के लिए युद्धविराम पर सहमति बनी थी। ऐसे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक ऐसा अल्टीमेटम जारी किया है जिसमें अवसर और चेतावनी दोनों छिपे हैं। सोशल प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर एक पोस्ट में ट्रंप ने ईरान पर संघर्षविराम का कई बार उल्लंघन करने का आरोप भी लगाया है।
सीएनबीसी को दिए एक साक्षात्कार में, अमेरिकी राष्ट्रपति ने लगभग पांच दशकों के तनाव के बाद लंबे समय से प्रतीक्षित इस घटनाक्रम में वाशिंगटन को निर्णायक भूमिका में होने का दावा किया।
ईरान पर डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने घोषणा की कि “मुझे लगता है कि हम बातचीत में बहुत मजबूत स्थिति में हैं और वही कर सकते हैं जो अन्य राष्ट्रपतियों को 47 वर्षों के दौरान करना चाहिए था – इन खूनी लोगों के साथ 47 वर्ष।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका “उनके साथ बहुत सफलतापूर्वक बातचीत कर रहा है” और एक निर्णायक मोड़ संभव है। फिर भी उन्होंने ईरान को एक स्पष्ट विकल्प दिया: इस अवसर का लाभ उठाएं या परिणाम भुगतें।
ट्रंप ने कहा कि “अगर ईरान समझौता कर लेता है तो वह खुद को बहुत अच्छी स्थिति में ला सकता है। वह खुद को फिर से एक मजबूत राष्ट्र, एक शानदार राष्ट्र बना सकता है। उनके पास अद्भुत लोग हैं… उन्हें तर्क और सामान्य ज्ञान का उपयोग करना होगा।”
ट्रंप ने इस दौरान युद्धविराम की समय सीमा को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें अगले 48 घंटों में कम से कम एक हस्ताक्षरित समझौते की संभावना चाहिए या वे सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू करेंगे तो उन्होंने बिना किसी झिझक के जवाब दिया: “ठीक है, मुझे बमबारी करने की उम्मीद है क्योंकि मुझे लगता है कि यही आगे बढ़ने का बेहतर तरीका है – लेकिन हम तैयार हैं।”
उन्होंने 22 अप्रैल को समाप्त होने वाली युद्धविराम की समय सीमा को आगे बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया और सीधे कहा कि “मैं ऐसा नहीं करना चाहता। हमारे पास इतना समय नहीं है।”
पाकिस्तान में शांति वार्ता को लेकर है अनिश्चितता
दोनों देशों के बीच स्थायी युद्धविराम को लेकर पाकिस्तान में होने वाली दूसरे दौर की वार्ता को लेकर अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। इस बीच ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सोशल ट्रुथ पर आरोप लगाया है कि ईरान ने कई बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है।
ऐसे में दोनों ओर विश्वास और भरोसे की कमी स्पष्ट दिख रही है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन हों, स्पीकर एमबी गालिबाफ हों या फिर विदेश मंत्री अब्बास अराघची सभी एक सुर में अमेरिका की मंशा पर संशय कर रहे हैं।
हालिया बयान में, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका की “उकसाने वाली कार्रवाइयां” और युद्धविराम उल्लंघन दोनों देशों के बीच शांति वार्ता को जारी रखने में बड़ी बाधाएं हैं।
अराघची ने ईरानी वाणिज्यिक जहाजरानी के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाइयों की निंदा की जिसमें कंटेनर पोत टुस्का और उसके चालक दल की कथित जब्ती भी शामिल है। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, उन्होंने वॉशिंगटन की “विरोधाभासी नीतियों और धमकी भरी बयानबाजी” का भी हवाला दिया।

