Home भारत डीलिमिटेशन बिल पर संसद में हंगामे के आसार, राहुल गांधी बोले- ये...

डीलिमिटेशन बिल पर संसद में हंगामे के आसार, राहुल गांधी बोले- ये BJP की खतरनाक योजना; स्टालिन ने जलाई बिल की कॉपी

सत्ता समेत विपक्षी पार्टियों ने अपने-अपने सदस्यों को संसद में मौजूद रहने का व्हिप जारी किया हुआ है। सरकार को संविधान संशोधन से जुड़े ये बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी और ऐसे में उसे गठबंधन से बाहर की दूसरी पार्टियों से सहयोग लेना होगा।

0
Lok Sabha (Photo- IANS)
फाइल फोटो- IANS

नई दिल्ली: संसद का तीन दिनों का विशेष सत्र आज से शुरू होने जा रहा है। लोक सभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े 3 बिल पेश किए जाएंगे। इन बिलों में महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 2029 से 33% आरक्षण देने का प्रस्ताव है। इन संशोधनों में लोकसभा सांसदों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इसके लिए डीलिमिटेशन बिल भी सरकार पेश करेगी। इसे लेकर सरकार और विपक्ष के बीच संसद में जबर्दस्त बहस और हंगामे के आसार हैं।

इन बिलों पर तीन दिन- 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद में चर्चा होगी। लोकसभा में चर्चा के लिए 18 घंटे का समय रखा गया है। वहीं, राज्य सभा में 10 घंटे चर्चा होगी। सत्ता समेत विपक्षी पार्टियों ने अपने-अपने सदस्यों को संसद में मौजूद रहने का व्हिप जारी किया हुआ है। सरकार को संविधान संशोधन से जुड़े ये बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी और ऐसे में उसे गठबंधन से बाहर की दूसरी पार्टियों से सहयोग लेना होगा।

राहुल गांधी ने कहा- ये भाजपा की खतरनाक योजना

विपक्ष का आरोप है कि सरकार डीलिमिटेशन प्रक्रिया से उत्तर भारत के राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ाना चाहती है। दूसरी ओर दक्षिण भारत के राज्यों में सीटें कम बढ़ेगी और इससे उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों में सीटों का फासला काफी बढ़ जाएगा और एक असंतुलन पैदा होगा। विपक्ष के आरोपों के अनुसार ये सीधे-सीधे भाजपा को फायदा पहुंचाएगा क्योंकि वो उत्तर भारत में मजबूत है। जबकि दक्षिण भारत के राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व कमजोर होगा।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को विपक्षी नेताओं के साथ बैठक के बाद कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है लेकिन लोकसभा में सीटें बढ़ाने के खिलाफ है। पूरा विपक्ष संसद में इसके खिलाफ वोट करेगा।

वहीं, राहुल गांधी ने एक्स पर बुधवार शाम पोस्ट किया, ‘यह भाजपा की खतरनाक योजनाओं में से एक है, 2029 के चुनावों के लिए सभी लोकसभा सीटों का अपने फायदे के लिए ‘हेरफेर’ करना। प्रस्तावित विधेयक परिसीमन पर सभी संवैधानिक सुरक्षा उपायों को हटा देते हैं, जिससे परिसीमन आयोग को पूर्ण शक्ति मिल जाती है, जिसकी नियुक्ति और संचालन सरकार खुद करेगी। हमने देखा है कि भाजपा यह कैसे करती है – उसने असम और जम्मू-कश्मीर में परिसीमन पर कब्जा कर लिया, जहां उसने चुनावी लाभ के लिए भाजपा विरोधी क्षेत्रों और समुदायों को विभाजित कर दिया।

राहुल ने आगे लिखा, ‘चुनाव आयोग पर कब्जा करने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी को विश्वास है कि वह परिसीमन आयोग पर भी कब्जा कर सकते हैं। कांग्रेस ऐसा होने नहीं देगी। परिसीमन एक पारदर्शी नीतिगत ढांचे पर आधारित होना चाहिए, जिसे व्यापक विचार-विमर्श और सर्वसम्मति के बाद विकसित किया गया हो। भारत के सभी समुदायों और राज्यों के लोगों को यह भरोसा होना चाहिए कि उनका प्रतिनिधित्व किया जाएगा और उनकी आवाज सुनी जाएगी। यही हमारे लोकतंत्र की रक्षा और उसे मजबूत करने का एकमात्र रास्ता है।’

स्टालिन ने फहराया काला झंडा

दूसरी ओर तमिलनाडु में परिसीमन के मुद्दे को लेकर डीएमके प्रमुख और राज्य के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार को विरोध जताते हुए काला झंडा फहराया और परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव की प्रति को जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान सीएम स्टालिन ने नारा दिया, ‘तमिलनाडु लड़ेगा, तमिलनाडु जीतेगा।’

चेन्नई में उनके आवास के बाहर काला झंडा फहराया गया। मुख्यमंत्री द्वारा ‘निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन विधेयक’ की प्रतियां जलाए जाने के बाद, डीएमके सुबह 11:00 बजे विधेयक की प्रतियां जलाकर पूरे राज्य में निगम, शहर, कस्बा, संघ, वार्ड और बूथ स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेगी। डीएमके ने जनता से यह अपील भी की है कि वे केंद्र सरकार के इस विधेयक की निंदा करते हुए, गुरुवार से शुरू होने वाले अगले तीन दिनों तक अपने सभी घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर काले झंडे फहराएं।

दरअसल, सीएम स्टालिन ने एक दिन पहले बुधवार को वीडियो संदेश जारी कर तमिलनाडु के लोगों से अपील की थी कि वे गुरुवार को अपने घरों और सार्वजनिक स्थानों पर काले झंडे लगाकर इस प्रस्ताव के खिलाफ विरोध दर्ज कराएं। स्टालिन कह चुके हैं कि परिसीमन केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए और इस कानून को लागू नहीं होने दिया जाएगा।

2023 में पास हुआ महिला आरक्षण विधेयक, अब संशोधन क्यों?

नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका है। हालांकि, पुराने कानून में 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन की बात कही गई थी और फिर कानून लागू होता। ऐसे में यह 2034 तक टल सकता था। अब ताजा संशोधन के बाद 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जा सकेगा और 2029 तक ये लागू हो जाएगा।

परिसीमन बिल पास होता है तो लोकसभा सीटें अधिकतम 850 हो जाएंगी। राज्यों में 815 और केंद्र शासित क्षेत्रों के लिए 35 सीटें होंगी। इसका असर सभी राज्यों की विधानसभाओं पर भी होगा। वहां भी सीटों की संख्या बदल जाएंगी।

इसके बाद कुल सीटों में से 33% यानी संसद में 850 में से 273 महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। महिलाओं के लिए यह आरक्षण 15 साल के लिए होगा। इसके बाद इसे फिर से बढ़ाने का फैसला संसद करेगी।

परिसीमन बिल पास होगा? संसद में क्या नंबर गेम

संविधान संशोधन से जुड़े बिल पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत चाहिए होता है। यह कुल सदस्यों का बहुमत (50% से अधिक) और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई होना चाहिए। लोकसभा की वर्तमान संख्या 540 है। ऐसे में दो तिहाई के लिहाज से 360 सांसदों को बिल के पक्ष में वोट देना होगा। वर्तमान में सत्तारूढ़ एनडीए के पास 293 सांसद हैं। इसमें बीजेपी के पास 240, टीडीपी- 16, जदयू- 12, शिवसेना- 7 और अन्य सहयोगी-18 शामिल हैं। ऐसे में लोक सभा जरूरी बहुमत से 67 सीटें उसके पास कम हैं। दूसरी ओर राज्यसभा के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा 163 है और एनडीए के पास कम से कम 142 सदस्य हैं, यहां भी 21 सीटें कम है।

यह भी पढ़ें- महिला आरक्षण और परिसीमन: नए बिल में क्या कुछ है, 850 हो जाएंगी लोकसभा सीटें; दक्षिण के राज्यों पर विवाद क्यों?

author avatar
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version