नई दिल्लीः दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार (5 मई) को कहा कि वह अरविंद केजरीवाल द्वारा जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को बहिष्कार करने के बाद तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को सहायक के रूप में नियुक्त करेगी। गौरतलब है कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य को आबकारी नीति मामले में बरी किए जाने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हो रही है।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने यह निर्देश दिए हैं। इससे पहले केजरीवार और आम आदमी पार्टी के दो अन्य नेताओं मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने सीबीआई द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका पर उनकी अदालत में कार्यवाही का बहिष्कार किया था।
दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस कांता शर्मा ने क्या कहा?
जस्टिस ने कहा कि “मैं 8, 18 और 19 के लिए एक वरिष्ठ अधिवक्ता को एमिकस के रूप में नियुक्त करूंगी। इसलिए एमिकस की नियुक्ति के बाद सीबीआई की दलीलें सुनना उचित होगा। “
अदालत ने कहा कि इनकी नियुक्ति अगली सुनवाई के दिन शुक्रवार (8 मई) को की जाएगी। गौरतलब है कि केजरीवाल, सिसोदिया और पाठक ने इससे पहले जस्टिस कांता शर्मा को इस मामले से अलग करने की मांग की थी। हालांकि, 20 अप्रैल को जस्टिस कांता शर्मा ने इस आवेदन को अस्वीकार कर दिया था।
जस्टिस ने इस आवेदन को खारिज करते हुए कहा था कि एक राजनेता को अविश्वास के बीज बोने की अनुमति नहीं दी जा सकती और उनकी बर्खास्तगी की मांग करने वाला आवेदन न्यायपालिका को कटघरे में खड़ा करने के बराबर है।
सीबीआई ने 2022 में दर्ज की थी एफआईआर
यह मामला साल 2022 का है जब सीबीआई ने एक एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर में सीबीआई ने दिल्ली में शराब के व्यापार में एकाधिकार और कार्टेलाइजेशन को सुविधाजनक बनाने के लिए 2021-22 की दिल्ली उत्पाद नीति में हेरफेर किया गया था।
जांच एजेंसी ने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) और उसके नेताओं ने नीति में हेरफेर करके शराब निर्माताओं से रिश्वत ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बाद में इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया।
इसके बाद पार्टी के नेताओं की गिरफ्तारी का सिलसिला शुरू हुआ जिसकी कुछ हलकों ने राजनीतिक रूप से प्रेरित होने के कारण आलोचना की। दिल्ली 2025 विधानसभा चुनाव में यह एक बड़ा मुद्दा बना था जिसके चलते पार्टी को हार का सामना भी करना पड़ा था।

यह आरोप लगाया गया कि आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा एक आपराधिक साजिश रची गई थी। इनमें केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य अज्ञात नेताओं के शामिल होने की बात कही गई थी कि नीति निर्माण में इन्होंने हिस्सा लिया।
यह आरोप था कि इस साजिश के तहत नीति में जानबूझकर खामियां छोड़ी गईं या बनाई गईं। दावा यह भी किया गया कि इन खामियों का उद्देश्य निविदा प्रक्रिया के बाद कुछ शराब लाइसेंसधारियों और साजिशकर्ताओं को लाभ पहुंचाना था।
निचली अदालत से बरी हुए थे अरविंद केजरीवाल और अन्य
इस वर्ष 27 फरवरी को एक निचली अदालत ने केजरीवाल और 22 अन्य आरोपियों को मामले से बरी कर दिया। सीबीआई ने इस आदेश को चुनौती दी है और वर्तमान में जस्टिस शर्मा इसकी सुनवाई कर रही हैं।
9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने इस मामले में नोटिस जारी कर मामले की जांच करने वाले सीबीआई अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के लिए निचली अदालत के निर्देश पर रोक लगा दी। जस्टिस शर्मा ने प्रथम दृष्टया यह भी पाया कि निचली अदालत द्वारा अपने आदेश में की गई कुछ टिप्पणियां त्रुटिपूर्ण थीं। उन्होंने निचली अदालत को सीबीआई के मामले पर आधारित पीएमएलए कार्यवाही को स्थगित करने का निर्देश भी दिया।
इसके बाद केजरीवाल, सिसोदिया, पाठक और अन्य ने जज को इस मामले से हटाने के लिए आवेदन दायर किए थे। जिसे जस्टिस कांता शर्मा ने खारिज कर दिया था और कहा था कि वह मामले की सुनवाई जारी रखेंगी।

