नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार (15 जुलाई) को एक जनहित याचिका के संबंध में केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की दिल्ली स्थित जंतर-मंतर में जारी भूख हड़ताल को खत्म करने के संबंध में दायर की गई है। याचिका में वांगचुक की भूख हड़ताल खत्म करने के लिए हस्तक्षेप की मांग की गई है।
दिल्ली हाई कोर्ट में यह याचिका वकील राकेश कुमार सैनी द्वारा दायर की गई है। उनकी याचिका का जिक्र दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया के समक्ष किया किया।
दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
सैनी ने अपनी याचिका में कहा ” एक सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता जो सरकार के एक बेहद अलोकप्रिय और कड़ी आलोचना वाले फैसले के खिलाफ अपने मौलिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए विरोध-प्रदर्शन कर रहा है वह असल में पूरे देश के सामने ‘हाराकिरी’ (अपनी जान लेने का मशहूर जापानी तरीका) कर रहा है। “
अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि गुरुवार (16 जुलाई) को सुनवाई की जाएगी। पीठ ने कहा ” भारत सरकार की ओर से कोई भी मौजूद नहीं है। हम याचिका पर विचार कर रहे हैं। हम इस मामले को कल ही सूचीबद्ध करेंगे और भारत सरकार से निर्देश लेने को कहेंगे। “
इसके बाद न्यायालय ने निर्देश दिया कि याचिका और आदेश की प्रतियां केंद्र और दिल्ली सरकार के विधि अधिकारियों को भेजी जाएं। अदालत ने अपने आदेश में कहा, ” तत्काल आवश्यकता को देखते हुए कल सुनवाई सूचीबद्ध करें। हम माननीय अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और एनसीटी के स्थायी वकील को प्रतियां भेजते हैं। “
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सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल खत्म करने संबंधी याचिका में क्या मांगे रखी थीं?
याचिकाकर्ता ने केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की है कि सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाया जाए और उन्हें जबरन भोजन कराया जाए। याचिका के मुताबिक, वांगचुक की सेहत तेजी से बिगड़ रही है, उनका वजन 8.5 किलो कम हो गया है और अगर वे भूख हड़ताल जारी रखते हैं तो दो दिनों में उनकी जान जा सकती है।
याचिका में आगे कहा गया है कि अगर उनकी मृत्यु हो जाती है तो यह देश और दुनिया के लिए बहुत शर्मनाक होगा।
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के उस विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लिया था जिसमें शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग की गई थी। यह मांग शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों और कथित तौर पर प्रश्न-पत्र लीक होने के मामलों को लेकर की गई थी।
कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत एक ऑनलाइन व्यंग्यात्मक आंदोलन के तौर पर हुई थी जिसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खासकर युवा यूजर्स के बीच काफी लोकप्रियता मिली।
इसकी शुरुआत अमेरिका के बोस्टन निवासी अभिजीत दिपके ने की थी। यह संगठन राजनीतिक व्यंग्य के माध्यम से बेरोजगारी, संस्थागत जवाबदेही और मीडिया की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर टिप्पणी करता है। सीजेपी के सदस्य 20 जून से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही है।
उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार वांगचुक को एक कट्टर अपराधी, आतंकवादी या देशद्रोही की तरह मान रही है और उसकी बिल्कुल भी परवाह नहीं कर रही है।
याचिका में कहा गया है कि सरकार कम से कम उनकी जान बचाने के लिए उसे सही मेडिकल देखभाल तो दे ही सकती है भले ही इसके लिए जबरदस्ती करनी पड़े।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि जहां एक ओर लोग यह आरोप लगाने लगे हैं कि देश की अंतरात्मा मर चुकी है वहीं याचिकाकर्ता को पूरा विश्वास है कि न्यायालयों की अंतरात्मा अभी जीवित है।
इसलिए उन्होंने केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश देने की प्रार्थना की है कि वांगचुक की जान बचाने के लिए उसे जबरन भोजन दिया जाए।
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