नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार (24 जुलाई) को फैसला सुनाया कि OpenAI का अपने बड़े भाषा मॉडल (LLMs) को ओरिजिनल कॉपीराइट वाले काम पर ट्रेन करना ‘फेयर डीलिंग’ (उचित व्यवहार) है और यह कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं है।
गौरतलब है कि समाचार एजेंसी ANI मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 2024 में OpenAI Inc (OAI) और OpenAI OpCo LLC के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में मामला दर्ज कराया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि OpenAI ने LLM ट्रेनिंग के लिए उनके कॉपीराइट वाले मटीरियल का उल्लंघन किया है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने OpenAI के पक्ष में सुनाया फैसला
कॉपीराइट वाले मटीरियल के ‘फेयर यूज’ (उचित इस्तेमाल) पर यह टिप्पणी किसी भारतीय संवैधानिक अदालत की ओर से पहली बार आई है।
दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस अमित बंसल ने शुक्रवार को खुली अदालत में अपना फैसला सुनाते हुए कहा, “मेरी शुरुआती राय है कि ChatGPT के पीछे काम करने वाले LLM को ट्रेन करने के लिए ANI के ओरिजिनल काम को स्टोर करने का OpenAI का काम कॉपीराइट एक्ट की धारा 52(1)(a) (फेयर डीलिंग) के दायरे में आता है और इसलिए यह कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं है…”
जस्टिस बंसल ने आगे कहा कि “ मैं प्रथम दृष्टया इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि चैटजीपीटी द्वारा आरएजी (रिट्रीवल-ऑगमेंटेड जेनरेशन) तकनीक का उपयोग करके उत्पन्न आउटपुट कॉपीराइट अधिनियम के तहत उल्लंघन नहीं हैं क्योंकि ओपनएआई द्वारा उत्पन्न आउटपुट एएनआई (इनपुट) के समान नहीं थे। ”
उन्होंने यह भी कहा कि एएनआई अदालत को यह साबित करने में विफल रहा है कि चैटजीपीटी द्वारा उत्पन्न प्रतिक्रियाओं के माध्यम से एएनआई के मूल पुनर्प्राप्त कार्यों का दोहराव हुआ है।
कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि “ ऊपर हुई चर्चा को देखते हुए ANI अंतरिम रोक के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनाने में विफल रही है। ” कोर्ट ने यह भी माना कि सुविधा का पलड़ा OpenAI के पक्ष में है। कोर्ट ने तर्क दिया कि अगर ANI के पक्ष में कोई अंतरिम रोक (interim injunction) लगाई जाती है तो इससे न केवल OpenAI को बल्कि आम जनता को भी अपूरणीय क्षति होगी।
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ANI और OpenAI ने क्या पक्ष रखा?
बताते चलें कि OpenAI एक अमेरिकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन है और इसका मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को में है। इसने जेनरेटिव AI मॉडल की ChatGPT सीरीज विकसित की है।
ANI ने OpenAI के इन कामों का विरोध किया था – अपने LLM को ट्रेन करने के लिए ANI के पब्लिकली उपलब्ध कॉपीराइट वाले मटीरियल का इस्तेमाल करना; ChatGPT में कोई सवाल पूछने पर कॉपीराइट वाले मटीरियल को हूबहू दोहराना और ChatGPT द्वारा गलत जानकारी देना और उसे गलत तरीके से ANI से जोड़ना।
OpenAI ने कहा था कि वह सीधे तौर पर डेटा स्टोर नहीं कर रहा है और कॉपीराइट कानून के तहत डेटा के इस्तेमाल पर कोई सामान्य रोक नहीं है। ठीक वैसे ही जैसे किसी किताब को पढ़ने की तुलना उसके “इस्तेमाल” से नहीं की जा सकती।
OpenAI ने यह भी तर्क दिया था कि प्री-ट्रेनिंग की प्रक्रिया भारत के बाहर हुई थी। ट्रेनिंग डेटा विदेशी सर्वर पर स्टोर किया गया था और OpenAI ने समय के साथ अपने मॉडल को बेहतर बनाया था ताकि वे पहले से मौजूद जानकारी को हूबहू न दोहराएं (regurgitation)। कंपनी ने यह भी कहा कि प्री-ट्रेनिंग के चरण के बाद एक तय तारीख के बाद OpenAI के मॉडल की ओरिजिनल ट्रेनिंग डेटा तक पहुंच नहीं थी।
इससे पहले नवंबर 2024 में OpenAI ने कोर्ट को बताया था कि उन्होंने ANI के डोमेन को पहले ही “ब्लॉकलिस्ट” कर दिया था। इसका मतलब था कि इसे OpenAI के सॉफ्टवेयर की भविष्य की ट्रेनिंग से बाहर कर दिया गया था।
कई अन्य संगठन जिनमें मीडिया और पब्लिशिंग संगठन और ‘फेडरेशन ऑफ़ इंडियन पब्लिशर्स’, ‘डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन’ और ‘इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री’ जैसे एसोसिएशन शामिल हैं जिन्होंने OpenAI के ट्रेनिंग मॉडल पर इसी तरह की आपत्तियां उठाई थीं, भी इस मुकदमे में शामिल थे।



