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‘कोर्ट को इसमें न घसीटें’, CJP के प्रदर्शन में पुलिस के ज्यादा बल प्रयोग के आरोपों वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने सोमवार (20 जुलाई) को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप वाली याचिका को सूचीबद्ध करने के याचिकाकर्ता के अनुरोध के जवाब में यह टिप्पणी की।

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फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार (21 जुलाई) को याचिकाकर्ताओं से आग्रह किया कि वे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सरकार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में अदालत को न घसीटें।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने सोमवार (20 जुलाई) को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप वाली याचिका को सूचीबद्ध करने के याचिकाकर्ता के अनुरोध के जवाब में यह टिप्पणी की।

दिल्ली हाई कोर्ट ने CJP के संसद मार्च के दौरान पुलिस बल प्रयोग पर क्या कहा?

सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग को लेकर दायर याचिका में वकील की बात के जवाब में जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने बताया कि “अदालत को इन सबमें न घसीटें।”

गौरतलब है कि बार-बार परीक्षा के पेपर लीक होने के मामले में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को देशभर के छात्र और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के कार्यकर्ता जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के अन्य इलाकों में जमा हुए।

प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन तक मार्च करने की योजना बनाई थी लेकिन दिल्ली पुलिस ने बीच में ही उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े जाने पर भी रिपोर्ट आईं। सोशल मीडिया पर इसको लेकर कई वीडियो भी वायरल हो रहे हैं।

इसी मामले को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी।

CJP का संसद मार्च

बताते चलें कि नीट-यूजी परीक्षा 2026 पेपर लीक की जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर में विरोध प्रदर्शन के बीच 20 जुलाई को
सीजेपी द्वारा ‘चलो संसद’ का आह्वान किया गया था जिसको लेकर भारी संख्या में लोग जुटे।

प्रदर्शनकारियों शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। इसको लेकर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक, ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) के तीन छात्रों समेत अन्य छात्र भूख हड़ताल पर बैठे थे। सोनम वांगचुक को 18 जुलाई सुबह करीब 7 बजे दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल से उठाकर ले गई और उन्हें सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट किया गया था।

20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के बीच सीजेपी के प्रतिनिधियों की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात होती है और तीन प्रमुख मांगों का ज्ञापन देते हैं। इन मांगों में आत्महत्या करने नीट छात्रों के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा, सोनम वांगचुक की रिहाई और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शामिल है।

सोमवार को संसद मार्च के दौरान हुए पुलिस लाठीचार्ज और आंसू गैस के बाद जंतर-मंतर पर फिर से प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। इस बीच 21 जुलाई को भी सीजेपी ने संसद मार्च का आह्वान किया है।

वहीं सोनम वांगचुक ने आमरण अनशन जारी रखने का फैसला किया है। उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने मंगलवार को वांगचुक के संदेश को वीडियो के जरिए साझा किया। आंग्मो के अनुसार वांगचुक ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ हुई कार्रवाई को देखते हुए उन्होंने अपना अनशन जारी रखने का निर्णय लिया है।

सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि संगठन का आंदोलन जारी रहेगा और मंगलवार को भी संसद मार्च किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से नहीं हटेंगे।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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