नई दिल्लीः दक्षिण दिल्ली में शनिवार देर रात एक बड़ा हादसा हो गया। यहां के सैदुलाजब इलाके में साकेत मेट्रो स्टेशन के पास एक पांच मंजिला इमारत ढह गई। इस दुर्घटना में 26 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जबकि आठ लोग घायल हुए हैं। पूरी रात चले राहत एवं बचाव अभियान में अब तक नौ लोगों को मलबे से बाहर निकाला जा चुका है। हालांकि प्रशासन को आशंका है कि अभी भी कुछ लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं, जिसके चलते खोज अभियान जारी है।
समाचार एजेंसी आईएएनएस के अनुसार, यह हादसा वेस्टर्न मार्ग स्थित उस इमारत में हुआ, जहां कथित तौर पर पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास, मेस, कोचिंग संस्थान, कैफे और कुछ कार्यालय संचालित हो रहे थे। बताया जा रहा है कि हादसे के समय इमारत की तीसरी मंजिल पर निर्माण कार्य भी चल रहा था।
दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) को शाम 7:44 बजे घटना की सूचना मिली, जिसके बाद चार दमकल गाड़ियों को तत्काल मौके पर भेजा गया। बाद में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), दिल्ली पुलिस, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए), नगर निगम, सिविल डिफेंस और कैट्स एम्बुलेंस सेवा की टीमें भी बचाव अभियान में शामिल हो गईं।
अधिकारियों के अनुसार, रविवार तड़के करीब 3:45 बजे तक नौ लोगों को मलबे से बाहर निकाल लिया गया था। इनमें से आठ घायलों को एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जबकि रवि (26) नामक युवक को अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दिया गया।
घायलों में गुरुग्राम निवासी तरुण कुमार (26), बिहार की साइका खान (27), सैदुलाजब निवासी नीलम यादव (25), आदित्य शर्मा (24) और आस्था (25), नोएडा निवासी क्षितिज प्रताप (25), साकेत निवासी अनुज दीक्षित (25) और विशाल (24) शामिल हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों ने सुनाई खौफनाक कहानी
हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरने के बाद चारों ओर धूल का गुबार छा गया और मलबे के नीचे दबे लोगों की चीखें सुनाई दे रही थीं।
एक स्थानीय निवासी ने पीटीआई से कहा, “हमें सिर्फ मलबे के नीचे से लोगों की चीखें सुनाई दे रही थीं। धूल का बड़ा गुबार उठ गया था। जब वह छंटा तो पता चला कि पास की एक अन्य संरचना को भी नुकसान पहुंचा है।”
स्थानीय लोगों का दावा है कि इमारत के आसपास रोज बड़ी संख्या में छात्र और दफ्तरों में काम करने वाले लोग आते-जाते थे। कुछ लोगों ने आशंका जताई कि हादसे के समय परिसर में काफी लोग मौजूद हो सकते थे।
स्थानीय निवासी रविंद्र सिंह ने पीटीआई को बताया, “यहां कई कैफे, कोचिंग सेंटर और कॉर्पोरेट कार्यालय चल रहे थे। इमारत अपेक्षाकृत नई थी और करीब चार-पांच साल पहले बनी थी।”
परिजनों ने उठाए सवाल
हादसे के बाद मौके पर मौजूद कई परिवार अपने प्रियजनों की जानकारी के लिए परेशान नजर आए। एक महिला, जिसकी मां के मलबे में फंसे होने की आशंका थी, ने एएनआई से बातचीत में राहत कार्यों को लेकर नाराजगी जताई।
महिला ने कहा, “हम अपने परिवार वालों के बारे में पूछ रहे हैं लेकिन कोई जवाब नहीं दे रहा। स्थानीय लोगों ने पुलिस से पहले लोगों को बाहर निकाला। हमने पहले भी इस इमारत के निर्माण को लेकर शिकायत की थी। मैं सिर्फ अपनी मां को देखना चाहती हूं, लेकिन मुझे जाने नहीं दिया जा रहा।”
इसी तरह आसपास के पीजी में रहने वाले 23 वर्षीय गौरव कुमार ने बताया कि उनका एक मित्र अक्सर उसी मेस में खाना खाता था और हादसे के बाद से उसका फोन नहीं उठ रहा है। उन्होंने कहा कि वह उसकी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं।
कैंटीन पर गिरी इमारत
स्थानीय लोगों के अनुसार, इमारत का एक हिस्सा बगल में स्थित टिन शेड वाली कैंटीन पर गिर गया, जहां उस समय कुछ बच्चे और अन्य लोग खाना खा रहे थे। इसके कारण कई लोग मलबे में दब गए।
रविवार सुबह भी भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम जारी रहा। पुलिस और बचाव एजेंसियों का कहना है कि जब तक हर संभावित फंसे व्यक्ति का पता नहीं चल जाता, तब तक तलाशी अभियान जारी रहेगा।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और बचाव अभियान में सभी उपलब्ध संसाधन लगाए गए हैं। उन्होंने कहा, “फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए सभी एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं। नागरिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
फिलहाल इमारत गिरने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
समाचार एजेंसी आईएएनएस इनपुट के साथ

