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दिल्ली में हुए धमाके की जांच में एक और कार इकोस्पोर्ट मिली, पुलिस ने क्या बताया?

राजधानी दिल्ली में हुए धमाके में लाल रंग की इकोस्पोर्ट कार शामिल होने का संदेह है। पुलिस गाड़ी की तलाश करने में जुटी है।

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दिल्ली धमाके में एक और कार के शामिल होने का संदेह, फोटोः आईएएनएस

दिल्लीः राजधानी दिल्ली में सोमवार, 10 नवंबर को लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके के बाद हाई अलर्ट जारी किया। दिल्ली पुलिस को शक था कि इस विस्फोट में ह्युंडाई आई20 कार के अलावा एक और कार शामिल थी। पुलिस को यह कार हरियाणा में मिली है। यह कार लाल रंग की इकोस्पोर्ट है। सोमवार को हुए इस धमाके में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए।

गाड़ी का नंबर DL10 CK 0458 है। एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि विस्फोट में प्रयुक्त हुंडई आई20 से पहले से जुड़े अन्य संदिग्धों के पास एक अन्य लाल रंग की कार भी थी। इसे हरियाणा के खांडवाली गांव में एक फॉर्महाउस में पाया गया। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि एक युवक को पिछली सीट पर देखा गया और जांच एजेंसियां उसे अपने साथ ले गईं। दिल्ली के सभी पुलिस थानों, पुलिस चौकियों और सीमा चौकियों को लाल इकोस्पोर्ट कार पर नजर रखने के लिए सतर्क किया गया था।

पुलिस टीमें कर रही हैं गाड़ी की तलाश

इस गाड़ी का पता लगाने के लिए दिल्ली पुलिस की कम से कम पांच टीमों को तैनात किया गया था, जबकि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश और हरियाणा पुलिस को भी कड़ी सतर्कता बरतने और तलाशी में सहायता करने के लिए सतर्क किया गया था।

खबर के मुताबिक यह कार उमर उन नबी के नाम पर रजिस्टर्ड है। उसे कार का दूसरा मालिक बताया गया है। यह कार दिल्ली के राजौरी गार्डन RTO में 22 नवंबर 2017 को रजिस्टर हुई थी।

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डॉ. उमर जो एक व्यापक आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा था और हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में कार्यरत था, सोमवार शाम लाल किले के पास हुए विस्फोट वाली कार चला रहा था। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा चलाए गए अभियान के दौरान यह पाया गया कि डॉ. उमर जो आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा था। उसने एजेंसियों के दबाव के कारण अपना स्थान बदल दिया था।

इस मामले में अल-फलाह-विश्वविद्यालय भी जांच के दायरे में है और सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, विश्वविद्यालय ने खुद को इस घटना से अलग कर लिया है। विश्वविद्यालय ने इस बाबत एक आदेश भी जारी किया है इसमें लिखा कि “हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि एक जिम्मेदार संस्थान के रूप में हम राष्ट्र के साथ एकजुटता में खड़े हैं और अपने देश की एकता, शांति और सुरक्षा के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।”

अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने खुद को किया अलग

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वविद्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया “हम इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से बेहद दुखी और व्यथित हैं और इसकी निंदा करते हैं। हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं इन दुखद घटनाओं से प्रभावित सभी निर्दोष लोगों के साथ हैं।”

बयान में कहा गया कि हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि विश्वविद्यालय का इन लोगों से कोई संबंध नहीं है सिवाय इसके कि वे विश्वविद्यालय में आधिकारिक पदों पर काम कर रहे हैं।

अल-फलाह विश्वविद्यालय की स्थापना साल 2014 में हुई थी। विश्विद्यालय अनुदान आयोग द्वारा यूजीसी अधिनियम 1956 की धारा 2(एफ) और 12(बी) के अंतर्गत मान्यता भी दी गई थी।

यह विश्वविद्यालय अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट का एक प्रयास है। इस परिसर में तीन कॉलेज चल रहे हैं। इसमें अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (1997 से), ब्राउन हिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (2008 से) और अल-फलाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (2006 से) शामिल हैं।

विश्वविद्यालय करीब 70 एकड़ में फैला हुआ है। परिसर में एक 600 बेड वाला अस्पताल है जहां बहु विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मुफ्त परामर्श और मामूली कीमतों पर जांच की सुविधा उपलब्ध है।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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