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छत्तीसगढ़: भारी विरोध के बीच जमीन दरों की नई गाइडलाइन के कई आदेश सरकार ने लिए वापस

इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने सरकार के यूटर्न के बावजूद सवाल खड़ा किया है कि ‘गाइडलाइन दरों में अभी सुधार कहां हुआ?’ उन्होंने कहा कि थोड़े बहुत और परिवर्तन हुए हैं, वे बहुत असरकारी नहीं हैं।

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Bastar: Members of the Congress Committee burn an effigy of the state government to protest against the new guidelines issued for increasing land rates in Chhattisgarh, at Jagdalpur in Bastar district, Saturday, November 29, 2025. (Photo: IANS)

रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जमीन रजिस्ट्री की दरें बढ़ा दी गई थी। फैसले का विरोध भाजपा के नेता भी कर रहे थे। रायपुर के बीजेपी सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र भी लिखा था। अब इस मामले पर सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए गाइडलाइन दरों के कई आदेश को वापस ले लिया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की घोषणा के बाद महानिरीक्षक पंजीयन की ओर से सोमवार को अधिकृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी गई। महानिरीक्षक पंजीयन ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि प्राप्त आपत्तियों, सुझावों और ज्ञापनों का पुनः परीक्षण कर 31 दिसंबर तक नई गाइडलाइन दरों के पुनरीक्षण प्रस्ताव भेजें।

5 से 9 गुना तक बढ़ गई थी कीमतें

दरअसल, जमीन की दरों को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जारी किए गए गाइडलाइन में कीमतें 5 से 9 गुना तक बढ़ा दी गई थी। जमीन रजिस्ट्री की दरें भी इसी अनुपात में बढ़ गई थी। नई दरों को लेकर सत्तारूढ़ दल के भीतर भी तीखा विरोध उभर आया था। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि यदि दरें वापस नहीं ली गईं तो राज्य की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।

उन्होंने कहा था कि सरकार बिना अध्ययन, बिना जनसुनवाई के फैसले ले रही है। ये प्रदेश की आर्थिक रीढ़ पर सीधी चोट है। इसका असर जनता, किसानों और छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा। इसके अलावा विपक्षी दलों, रियल एस्टेट कारोबारियों और आम लोगों का विरोध भी लगातार बढ़ रहा था।

इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने सरकार के यूटर्न के बावजूद सवाल खड़ा किया है कि ‘गाइडलाइन दरों में अभी सुधार कहां हुआ?’ उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा ‘जैसा कि मैंने कहा था कि सरकार को गाइडलाइन की दरों संबंधी आदेश में सुधार करना पड़ा. लेकिन यह सुधार सतही है और जनता को बहुत कम राहत देने वाला है। दरअसल अभी गाइडलाइन की दरों में सुधार नहीं हुआ है। बस एक जबरदस्ती थोपे गए नियम को वापस लिया गया है। थोड़े बहुत और परिवर्तन हुए हैं, वे बहुत असरकारी नहीं हैं।’

उन्होंने आगे कहा, ‘जब तक अनापशनाप बढ़ाई गई गाइडलाइन दरों को नहीं सुधारा जाएगा, काम नहीं बनेगा। जनता पर प्रॉपर्टी टैक्स का जो बोझ आने वाला है, वह तो अभी बरकरार दिखता है। सरकार को और संशोधन करना पड़ेगा। और वह मजबूर होकर करेगी, लिखकर रखिए।’

बहरहाल, अब केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक में हितधारकों से प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का परीक्षण करने के बाद ये फैसले लिए गए-

  1. शहरी क्षेत्र में 1400 वर्ग मीटर तक की भूमि पर बढ़ोतरी का प्रावधान खत्म।

इंक्रीमेंटल आधार पर मूल्यांकन का नियम हटाकर पहले की तरह नगर निगम में 50 डेसिमल, नगर पालिका में 37.5 डेसिमल, नगर पंचायत में 25 डेसिमल तक स्लैब दरें यथावत लागू होंगी।

  1. फ्लैट/दुकान/ऑफिस की कीमत तय करने का तरीका बदला

बहुमंजिला भवनों में अब सुपर बिल्ट-अप एरिया नहीं, बल्कि बिल्ट-अप एरिया के आधार पर कीमत तय होगी। यह मांग लंबे समय से उठ रही थी, जिससे वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा ।

  1. बहुमंजिला भवनों में राहत

बेसमेंट और प्रथम तल: 10% कमी, द्वितीय तल और ऊपर के तल: 20% कमी के साथ मूल्यांकन होगा। इससे मध्यम वर्ग को किफायती फ्लैट मिलने की उम्मीद है ।

  1. कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में दूरी के आधार पर छूट

कॉम्प्लेक्स के मुख्य मार्ग से 20 मीटर बाद स्थित संपत्तियों पर 25% कमी के साथ मूल्यांकन किया जाएगा।

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प्रवीण सिंह
छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले का रहने वाला हूं। पिछले 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिष्ठित चैनल ईटीवी और सहारा समय के प्रदेश में पहले रिपोर्टर, 2001 में मुंबई से रायपुर आने के बाद लगातार विभिन्न चैनलों , प्रिंट और ईटीवी भारत की वेबसाइट में भी अपनी सेवाएं दी है।

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