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‘किसी भी योग्य मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा’, ज्ञानेश कुमार बोले- बंगाल चुनाव स्वतंत्र और शांतिपूर्वक कराना प्राथमिकता

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले जारी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि योग्य मतदाताओं का नाम नहीं हटाया जाएगा।

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फोटोः आईएएनएस

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में आगामी महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं जिसको लेकर चुनाव आयोग तैयारियां कर रहा है। इस बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार (10 मार्च) को इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम बंगाल चुनावों में किसी भी योग्य मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की प्राथमिकता स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्वक चुनाव कराने की है क्योंकि राज्य में तनावपूर्ण राजनैतिक माहौल है।

सीईसी ज्ञानेश कुमार ने क्या कहा?

राज्य में राजनैतिक पार्टियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठकों के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोग हमेशा “शांतिपूर्ण और सहभागी लोकतंत्र” में विश्वास करते हैं।

इस दौरान उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हरेक योग्य मतदाता को अपना वोट देने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि “हमारा उद्देश्य बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना है।”

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि “किसी भी योग्य मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा।”

राज्य में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बारे में बोलते हुए कुमार ने कहा कि यह प्रक्रिया संवैधानिक मानदंडों के अनुसार पूरे देश में चलाई जा रही है। एसआईआर राजनैतिक रूप से संवेदनशील प्रक्रिया है जिसने राज्य में सत्तारूढ़ टीएमसी और विपक्षी दल भाजपा के बीच तीखी बहस को जन्म दे दिया है।

उन्होंने आगे कहा कि “पूरे भारत में एसआईआर प्रक्रिया संवैधानिक मानदंडों के अनुसार चलाई जा रही है।”

सीईसी के मुताबिक, एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को “शुद्ध” रखना है।

कुमार ने इस दावे का खंडन किया कि तार्किक विसंगतियां केवल बंगाल के लिए ही उठाई गईं हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह समस्याएं सभी 12 राज्यों में उठाई गई हैं।

SIR प्रक्रिया के बीच आपत्तियों पर क्या बोले सीईसी?

एसआईआर अभ्यास के दौरान सामने आए आंकड़ों के पैटर्न की व्याख्या करते हुए कुमार ने कहा कि जनगणना प्रपत्र जमा करने के बाद लगभग 4-5 फीसदी मतदाता 2002 की मतदाता सूचियों से अपना मिलान नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि इन्हें ‘असंबद्ध मतदाता’ की श्रेणी में रखा गया।

उन्होंने आगे कहा कि ” लगभग 7-8 फीसदी मतदाता जानबूझकर या अनजाने में हुई गलतियों के कारण गलत पाए गए हैं।” उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल में बहुत से मामले अभी जांच के लिए लंबित हैं।

सीईसी ने आगे कहा कि ” पश्चिम बंगाल में, ईआरओ और एईआरओ के स्तर पर कई मामले लंबित हैं। ” उन्होंने आगे कहा कि “विचाराधीन” श्रेणी में रखे गए मामलों पर न्यायिक निर्देशों का सख्ती से पालन किया जा रहा है।

सीईसी कुमार ने कहा कि “विचाराधीन नामों के संबंध में, सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार प्रक्रिया जारी है और न्यायिक अधिकारी इस कार्य को संभाल रहे है।”

उन्होंने आगे कहा कि 28 फरवरी को एसआईआर के बाद की मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद चुनाव आयोग उचित समय पर अपनी वेबसाइट पर पूरक मतदाता सूचियां भी अपलोड करेगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त की यह टिप्पणी सत्तारूढ़ टीएमसी के उन आरोपों के बीच आई है कि चुनाव आयोग ने एसआईआर के बाद मतदाता सूची से लगभग 64 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं और लगभग 60 लाख अन्य मतदाताओं की जांच शुरू कर दी है।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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