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ब्रिटेन: किएर स्टार्मर ने दिया प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा, 10 साल में सातवें पीएम ने छोड़ा पद

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने घोषणा की है कि वह लेबर पार्टी के नेता का पद छोड़ देंगे। उन्होंने यह मान लिया है कि उनकी पार्टी अब यह नहीं मानती कि वह अगले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हैं।

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फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने सोमवार (22 जून) को इस्तीफे का ऐलान कर दिया है। ब्रिटिश मीडिया के मुताबिक, यूके की विदेश सचिव येवेट कूपर ने सोमवार (21 जून) को स्टार्मर को पद छोड़ने के लिए कहा था। बता दें कि स्टार्मर बीते 10 सालों में ब्रिटेन के पीएम पद से इस्तीफा देने वाले सातवें व्यक्ति हैं।

स्काई न्यूज के मुताबिक, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने घोषणा की है कि वह लेबर पार्टी के नेता का पद छोड़ देंगे। उन्होंने यह मान लिया है कि उनकी पार्टी अब यह नहीं मानती कि वह अगले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हैं।

किएर स्टार्मर ने प्रधानमंत्री पद से दिया इस्तीफा

स्टार्मर के सबसे सीनियर मंत्रियों में से एक कूपर ने पिछले हफ्ते के अंत में स्टार्मर को प्राइवेट तौर पर यह मैसेज दिया। समर्थकों से बात करते हुए किएर स्टार्मर ने कहा कि उन्होंने जो भी फैसले लिए। वे देश को सबसे पहले रखने की इच्छा से लिए थे। उन्होंने कहा कि ” मैंने अपनी पार्टी से जवाब सुना है और मैं उस जवाब को खुशी-खुशी स्वीकार करता हूं। “

बता दें स्टार्मर ने सत्ता का सही तरीके से बदलाव सुनिश्चित करने का वादा किया है। वह लेबर पार्टी के अगले नेता और प्रधानमंत्री के आने तक इस पद की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनके बाद आने वाले को ऐसा ब्रिटेन विरासत में मिलेगा जो दो साल पहले के मुकाबले ज्यादा मजबूत और सही होगा।

किएर स्टार्मर ने पार्टी की कमान संभालने के दौरान छह साल तक अपने दोस्तों, साथ काम करने वालों, डाउनिंग स्ट्रीट के स्टाफ और सिविल सर्विस को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद भी दिया।

गौरतलब है कि दो वर्ष पहले किएर स्टार्मर ने लेबर पार्टी को बंपर चुनावी जीत दिलाई थी। पार्टी को 174 सीटों के साथ बहुमत मिला। उस समय इसे लेबर के लिए एक निर्णायक राजनीतिक वापसी माना गया था। हालांकि स्टार्मर का कार्यकाल कई विवादों और नीतिगत बदलावों के कारण लगातार दबाव में रहा।

एंडी बर्नहैम बन सकते हैं अगले प्रधानमंत्री

कई नीतिगत यू-टर्न्स और विवादों का सामना उनकी सरकार को करना पड़ा। बुजुर्गों के लिए विंटर फ्यूल भुगतान से जुड़े फैसले और वॉशिंगटन में पीटर मैंडेलसन को ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त करने का निर्णय सबसे ज्यादा विवाद का सबब बना। इन घटनाओं ने स्टार्मर की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े किए और पार्टी के भीतर असंतोष को बढ़ाया।

हाल ही में हुए जनमत सर्वेक्षणों में लेबर पार्टी की स्थिति कमजोर हुई है वहीं प्रधानमंत्री स्टार्मर की व्यक्तिगत लोकप्रियता भी गिरी। इस बीच रिफॉर्म यूके दल लगातार 300 से अधिक राष्ट्रीय सर्वेक्षणों में बढ़त बनाए हुए है। इससे राजनीतिक परिदृश्य और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।

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पार्टी के कई सांसदों का मानना है कि यदि नेतृत्व में बदलाव नहीं किया गया तो आगामी चुनावों में लेबर पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है और ‘रिफॉर्म यूके’ के नेता नाइजल फैराज के सत्ता में आने की संभावना बढ़ सकती है। इसी वजह से पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की मांग तेज होती जा रही है। इसमें एंडी बर्नहैम का नाम सबसे ऊपर है।

भारी दबाव में थे स्टार्मर

इससे पहले मई में भी स्टार्मर पर दबाव था लेकिन उन्होंने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था लेकिन इस बार बात कुछ अलग है। हाल ही में उत्तरी इंग्लैंड के मेकरफील्ड निर्वाचन क्षेत्र में हुए उपचुनाव में अच्छी खासी जीत हासिल की। इतना ही नहीं उन्होंने अपने टक्कर में खड़े रिफॉर्म यूके के कैंडिडेट को पराजित किया। वो भी ऐसे समय में जब लेबर पार्टी की साख लगातार गिर रही है। इससे पहले वे ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर के रूप में कार्यरत थे जो ब्रिटेन के सबसे बड़े और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण शहरों में से एक है।

56 वर्षीय बर्नहैम को अब लेबर पार्टी के भीतर एक ऐसे नेता के रूप में देखा जा रहा है जो ब्रिटेन की आर्थिक दिशा को नए सिरे से परिभाषित करने की क्षमता रखते हैं। उनके समर्थक उनके दृष्टिकोण को “मैनचेस्टरिज्म” नाम दे रहे हैं जो मैनचेस्टर के तीव्र आर्थिक विकास और शहरी पुनर्निर्माण के अनुभवों पर आधारित एक मॉडल है।

इस विचारधारा का उद्देश्य ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पुनर्गठित करना है जो वर्षों से धीमी वृद्धि, अस्थिर नीतियों और सार्वजनिक वित्त पर दबाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। बर्नहैम के समर्थकों का मानना है कि मैनचेस्टर के सफल विकास मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करके आर्थिक असमानताओं को कम किया जा सकता है और क्षेत्रीय विकास को गति दी जा सकती है।

(समाचार एजेंसी आईएएनएस से इनपुट्स के साथ)

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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