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नाश्ते की मेज पर क्या सुलझेगी ‘पावर’ की लड़ाई? शिवकुमार ने सिद्धारमैया को घर पर खिलाई नाटी चिकन और इडली

नाटी चिकन और इडली खिलाने के बाद शिवकुमार तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा, “आज मैंने अपने आवास पर माननीय मुख्यमंत्री की नाश्ते के लिए मेजबानी की, जिसके साथ हमने कांग्रेस के दृष्टिकोण के तहत सुशासन और हमारे राज्य के निरंतर विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।”

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कर्नाटक में नेतृत्व को लेकर जारी खींचतान के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंगलवार सुबह एक बार फिर साथ में नाश्ता किया। यह एक हफ्ते में दोनों की दूसरी बैठक थी और मौजूदा हालात के मद्देनजर इसे बेहद अहम माना जा रहा है।

सिद्धारमैया मंगलवार सुबह शिवकुमार के आवास पहुंचे जहां खुद डीके और उनके भाई व पूर्व सांसद डीके सुरेश ने उनका स्वागत किया। थोड़ी देर बाद तीनों ने साथ बैठकर पारंपरिक नाटी चिकन और इडली का नाश्ता किया। इससे पहले 29 नवंबर को भी दोनों नेता साथ में ब्रेकफास्ट मीटिंग की थी। उस दिन शिवकुमार, सिद्धारमैया के सरकारी आवास पर पहुंचे थे। नाश्ते के बाद सिद्धारमैया ने कहा था कि शिवकुमार ने भी उन्हें नाश्ते पर आमंत्रित किया।

शिवकुमार ने सिद्धारमैया के साथ नाश्ते और बाद की तस्वीरें दो अलग-अलग पोस्ट में साझा की है। उन्होंने लिखा, “आज मैंने अपने आवास पर माननीय मुख्यमंत्री की नाश्ते के लिए मेजबानी की, जिसके साथ हमने कांग्रेस के दृष्टिकोण के तहत सुशासन और हमारे राज्य के निरंतर विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।”

शिवकुमार ने सिद्धारमैया के साथ एक अलग तस्वीर के साथ लिखा, “माननीय मुख्यमंत्री का आज मेरे आवास पर स्वागत करके सम्मानित महसूस किया। हम कर्नाटक के विकास और हमारे लोगों की प्रगति के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”

दोनों नेताओं की चार दिनों में दूसरी बैठक को राज्य नेतृत्व के संकट के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 29 नवंबर को पहली नाश्ते पर बैठक के बाद सिद्धारमैया और शिवकुमार ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। दोनों ने दावा किया था कि मुख्यमंत्री पद को लेकर उनके बीच किसी तरह का कोई मतभेद नहीं है। दोनों नेताओं ने एकता का संदेश देने की कोशिश की थी, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार बातचीत में कोई खास प्रगति नहीं हो सकी। कहा जा रहा है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर अडिग बने हुए हैं।

इन लगातार मुलाकातों के पीछे पार्टी हाईकमान की पहल मानी जा रही है। पिछले बीस दिनों से दोनों नेताओं के समर्थक अपने-अपने नेता को मुख्यमंत्री पद पर देखने की मांग कर रहे हैं। कहा जाता है कि 2023 में सरकार बनने के समय मुख्यमंत्री पद के लिए ढाई-ढाई साल की अदला-बदली का समझौता हुआ था, हालांकि सिद्धारमैया खेमा इसे हमेशा नकारता रहा है।

‘नाश्ते’ से कर्नाटक कांग्रेस में थमा नेतृत्व संकट? सिद्धारमैया–शिवकुमार ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस हाईकमान विवाद के शुरुआती समाधान के लिए सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है। एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दोनों नेताओं को 2023 में बने उस समझौते का सम्मान करने को कहा है, जिसके आधार पर सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया गया था।

बताया जाता है कि इस कथित फॉर्मूले के अनुसार सरकार के आधे कार्यकाल पूरा होने पर शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाना था। हालांकि कांग्रेस ने कभी सार्वजनिक तौर पर ऐसी किसी व्यवस्था की पुष्टि नहीं की है। मंगलवार की यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि 8 दिसंबर से बेलगावी में विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है और पार्टी चाहती है कि उससे पहले एकता का मजबूत संदेश जाए।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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