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‘भारत वापस आ जाओ यदि…’, बॉम्बे हाई कोर्ट ने विजय माल्या की याचिका पर सुनवाई के दौरान की टिप्पणी

बॉम्बे हाई कोर्ट ने विजय माल्या की याचिका पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि भारत वापसी पर विचार करना चाहिए।

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फोटोः आईएएनएस

मुंबईः बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार (12 फरवरी) को विजय माल्या द्वारा भगोड़े के रूप में यूनाइटेड किंगडम (यूके) में रहकर भारतीय अधिकारियों से बचने के प्रयास पर आपत्ति जताई। बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अनखड़ की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि माल्या अदालत में अपनी याचिका पर सुनवाई चाहते हैं तो उन्हें भारत लौटना चाहिए।

गौरतलब है कि माल्या ने भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 (एफईओ अधिनियम) की वैधता को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?

पीठ ने चेतावनी देते हुए कहा कि “आपको वापस आना होगा। यदि आप वापस नहीं आते तो हम इस याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकते।”

बॉम्बे हाई कोर्ट माल्या की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उन्होंने आर्थिक अपराधी अधिनियम और उन्हें भगोड़ा घोषित करने की कार्यवाही को चुनौती दी थी।

अदालत की टिप्पणी 23 दिसंबर के उस आदेश के संदर्भ में आई है जिसमें माल्या को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया था कि वह ब्रिटेन से भारत कब लौटने का इरादा रखते हैं? अदालत ने उनसे यह भी स्पष्ट करने को कहा था कि भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर तब तक सुनवाई नहीं होगी जब तक वह पहले अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं कर लेते।

इन निर्देशों के बावजूद पीठ ने आज कहा कि माल्या अपने भारत लौटने के इरादे के बारे में हलफनामा देने में असमर्थ रहे हैं। अदालत ने टिप्पणी की “आप (भारतीय और ब्रिटिश) अदालत की प्रक्रिया से बच रहे हैं, इसलिए आप भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम को चुनौती देने वाली इस याचिका का लाभ नहीं उठा सकते।”

तुषार मेहता ने क्या कहा?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरफ से पक्ष रख रहे थे। उन्होंने कहा कि माल्या ने हलफनामा दायर कर दावा किया है कि बैंकों द्वारा उनसे पैसों की मांग करना गलत था और वह मामले को वसूली कार्यवाही में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने तर्क दिया कि माल्या ने 2018 के अधिनियम को तभी चुनौती दी जब वह भगोड़ा बन चुका था और भारत लंदन में प्रत्यर्पण कार्यवाही के अंतिम चरण में था। उन्होंने कहा कि माल्या भारत आकर सब कुछ तर्क दे सकते हैं लेकिन उन्हें भारतीय कानून पर अविश्वास नहीं करना चाहिए और फिर भी न्याय का दावा करना चाहिए।

पीठ ने मेहता से समयसीमा और विवरण प्रस्तुत करने को कहा जिसे वे अगली सुनवाई में अपने आदेश में दर्ज करेंगे। इस मामले में माल्या की ओर से अमित देसाई से पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि कानून की प्रकृति को देखते हुए माल्या को भारत आए बिना भी सुनवाई का अवसर दिया जा सकता है।

हालांकि पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि माल्या को अपनी वापसी की तारीख बताने का निर्देश देने वाला एक मौजूदा आदेश मौजूद है। चूंकि उन्होंने इसका पालन नहीं किया है, इसलिए अगली तारीख को भी ऐसा न करने पर अदालत को गैर-अनुपालन के आधार पर आदेश पारित करना होगा।

अदालत ने माल्या से कहा, “आपके साथ निष्पक्षता बरतते हुए, हम इसे खारिज नहीं कर रहे हैं; हम आपको एक और अवसर दे रहे हैं।” इसके बाद मामले की सुनवाई अगले सप्ताह के लिए स्थगित कर दी गई।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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