Homeभारतनागरिकों को क्या भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा, अगर लोग...

नागरिकों को क्या भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा, अगर लोग प्रदर्शन करें तो केस हो जाता है: बॉम्बे हाई कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि ‘याचिकाकर्ता ने बस ‘बीजेपी सरकार मुर्दाबाद’, ‘अमित शाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए हैं… नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए शहर से बाहर निकालने के आदेश क्यों?’

मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल इसलिए कि कोई नागरिक केंद्र सरकार के कुछ फैसलों का विरोध कर रहा है और उसके खिलाफ नारे लगा रहा है, उसे किसी क्षेत्र से निष्कासित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता के खिलाफ मुंबई पुलिस की कार्रवाई पर सख्ती से सवाल उठाते हुए कहा कि ‘क्या सभी नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है, वे प्रदर्शन नहीं कर सकते, वे विरोध नहीं जता सकते…ये सब क्या है?’

वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस माधव जामदार की एकल पीठ ने मुंबई पुलिस की कड़ी आलोचना की। पुलिस ने दरअसल सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव 49 वर्षीय सेक्रेटरी सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी को शहर से बाहर जाने का आदेश (एक्सटर्नमेंट ऑर्डर) जारी किया था। चौधरी केंद्र सरकार के कई फैसलों के खिलाफ सक्रिय रूप से मोर्चे और धरने आयोजित करते रहे हैं।

याचिका को देखने के बाद जज ने जानना चाहा कि सईद को एक साल के लिए शहर से बाहर भेजने का आदेश क्यों दिया गया। जबकि यह आदेश मुख्य रूप से भारत सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए उनके खिलाफ दर्ज पांच एफआईआर पर आधारित था। कोर्ट ने अपने फैसले में दिसंबर 2025 और मार्च 2026 में पारित निर्वासन संबंधी दोनों आदेशों को रद्द करने का आदेश दिया।

‘क्या नागरिकों को गुलाम बनाया जा रहा…’

इससे पहले कोर्ट ने मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, ‘यह क्या है? सभी नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है…वे विरोध-प्रदर्शन नहीं कर सकते, आंदोलन नहीं कर सकते, यह सब क्या है? अब इतने सारे पेपर लीक हो गए हैं। अगर लोग विरोध करते हैं, तो आप उन पर केस कर देंगे…यह क्या है? विरोध करना नागरिकों का अधिकार है…याचिकाकर्ता ने बस ‘बीजेपी सरकार मुर्दाबाद’, ‘अमित शाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए हैं… नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए शहर से बाहर निकालने के आदेश क्यों?’

जज ने आगे कहा कि पुलिस नागरिकों को सिर्फ इसलिए शहर से बाहर नहीं निकाल सकती क्योंकि उन्होंने सरकार के फैसलों का विरोध किया है। जस्टिस जामदार ने कहा, ‘पुलिस मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की नौकर नहीं है, वे जनसेवक हैं… मैं आपके अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाने जा रहा हूँ…।’

‘पाला बदल लीजिए…एक वॉशिंग मशीन है’

जस्टिस जामदार ने इसी दौरान महाराष्ट्र की राजनीति में चल रही कथित ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ (विधायकों और सांसदों के दल-बदल) पर भी टिप्पणी की। जस्टिस जामदार ने इन बातों का जिक्र उस समय किया, जब उन्होंने गौर किया कि सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी भी SDPI नाम की एक राजनीतिक पार्टी से जुड़े हैं।

जज ने हल्क-फुल्के अंदाज में कहा, ‘परसों ही एक 10 साल के बच्चे की दुर्घटना में मौत हो गई और राज्य विधानसभा में इस बात पर चर्चा हो रही थी कि पीठासीन अधिकारी का चुनाव कैसे होता है और वह एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कैसे चले गए…यह क्या है? आपको (सईद) भी पाला बदल लेना चाहिए…वैसे भी पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) चल रही है। आपके (सईद) खिलाफ कुछ FIR दर्ज हैं…इसके बारे में सोचिए, एक वॉशिंग मशीन है।’

आदेश में हाई कोर्ट ने क्या कहा?

अपने लिखित आदेश में जस्टिस जामदार ने स्पष्ट किया कि सरकार के किसी फैसले का विरोध करना महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति को निर्वासित करने का वैध आधार नहीं हो सकता। अगर ऐसा किया जाता है तो इससे बोलने और सम्मान के मौलिक अधिकार पर असर पड़ेगा।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अपनी राजनीतिक भूमिका के तहत केंद्र सरकार के कुछ फैसलों के विरोध में मोर्चे और धरने आयोजित किए थे। केवल इसी वजह से उनके खिलाफ की गई कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होती है। हाई कोर्ट ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत नागरिकों को प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा के साथ जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन करती है।

यह भी पढ़ें- सरकारी स्कूलों में छात्रों को हिंदू प्रार्थनाओं के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

author avatar
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular