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दुलारचंद हत्याकांड में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह गिरफ्तार, अबतक 80 पकड़े गए

मोकामा में दुलारचंद यादव हत्याकांड की जांच औपचारिक रूप से बिहार पुलिस अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने संभाल लिया है। जांच सीआईडी ​​के डीआईजी जयंत कांत के नेतृत्व में की जा रही है।

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जन सुराज पार्टी के कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की हत्या मामले में पटना पुलिस ने शनिवार देर रात जदयू उम्मीदवार और मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया। पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय शर्मा ने गिरफ्तारी की पुष्टि की। अनंत सिंह के साथ उनके दो सहयोगी मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम को भी बेदना गांव से पकड़ा गया है।

पुलिस के मुताबिक, शनिवार रात पटना के पास बाढ़ स्थित अनंत सिंह के आवास पर करीब 150 पुलिसकर्मियों ने घेराबंदी कर छापा मारा। सिंह को हिरासत में लेकर पटना लाया गया। पुलिस ने बताया कि जांच जारी है और विस्तृत जानकारी रविवार तड़के प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी जाएगी।

30 अक्टूबर को हुआ था दुलारचंद पर हमला

घटना 30 अक्टूबर की है, जब मोकामा ताल इलाके में दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच हिंसक झड़प हुई। 75 वर्षीय दुलारचंद यादव, जो जन सुराज के प्रत्याशी पियूष प्रियदर्शी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। इसी दौरान अज्ञात हमलावर ने गोली मारी और फिर उन्हें वाहन से कुचल दिया गया। बाढ़ में एक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में तीन डॉक्टरों के पैनल ने लगभग दो घंटे तक पोस्टमार्टम किया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में रिबकेज कुचलने की पुष्टि हुई है, जिससे साफ है कि उन्हें गोली मारने के बाद वाहन से रौंदा गया।

बता दें कि मोकामा में दुलारचंद यादव हत्याकांड की जांच औपचारिक रूप से बिहार पुलिस अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने संभाल लिया है। जांच सीआईडी ​​के डीआईजी जयंत कांत के नेतृत्व में की जा रही है। जयंत कांत खुद घटना वाली जगह पहुंचे थे और सभी पहलुओं की जांच की। पुलिस की कई टीमें शनिवार को बसावन चक पहुंची थीं, जहां यह घटना घटी थी।

सीआईडी ​​अधिकारियों ने एफएसएल टीम के साथ मिलकर पूरे इलाके की जांच की। सूत्रों ने बताया कि कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। जांचकर्ताओं ने घटना में शामिल क्षतिग्रस्त वाहनों का भी निरीक्षण किया। इन वाहनों से फोरेंसिक नमूने एकत्र किए गए हैं।

मोकामा ताल में अपराध स्थल के निरीक्षण के दौरान, जांचकर्ताओं ने रेलवे पटरियों पर आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले पत्थर बरामद किए। अधिकारियों ने बताया कि मोकामा ताल में ऐसे पत्थर प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते हैं, जिससे संभावित साजिश का सवाल उठता है। नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के अनुसार, “मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन के सबूत मिले हैं। घटना के समय अनंत सिंह मौके पर मौजूद थे और मुख्य आरोपी के रूप में उनकी भूमिका स्पष्ट हुई है। उन्हें और उनके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। सभी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।”

80 लोगों की हुई है गिरफ्तारी

पटना डीएम थियागराजन एसएम ने कहा कि प्रशासन ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, पिछले 48 घंटे से हमारी टीम लगातार मौके पर कैंप कर रही थी। फिलहाल स्थिति पूरी तरह सामान्य है। चूंकि यह मामला चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा है, इसलिए हमने हर पहलू से इसकी गहन जांच की है। इसमें शामिल सभी असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

थियागराजन ने आगे बताया कि कल 80 लोगों को गिरफ्तार किया गया था और आज मुख्य आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। जो लोग चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे, उनकी पहचान कर उनके खिलाफ पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने निर्देश दिया कि चुनाव के दौरान सभी लाइसेंसी हथियार जमा कराए जाएं ताकि मतदान शांति से संपन्न हो सके।

एफआईआर में किसका नाम?

दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने दर्ज एफआईआर में अनंत सिंह, उनके दो भतीजों करमवीर और रणवीर, तथा दो अन्य लोगों को आरोपी बनाया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “यह कार्रवाई स्वागतयोग्य है, लेकिन इसे पहले होना चाहिए था। जिस दिन एफआईआर दर्ज हुई, उसी दिन गिरफ्तारी हो जानी चाहिए थी। अब देखना होगा कि पुलिस जांच कितनी निष्पक्ष करती है। यह उनके परिवार के लिए राहत की बात है।”

चुनाव आयोग ने दो अधिकारियों पर की कार्रवाई

हत्या के बाद चुनाव आयोग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पटना ग्रामीण एसपी और मोकामा के रिटर्निंग ऑफिसर को हटाने का आदेश दिया। तीन अन्य अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। एसडीपीओ अभिषेक सिंह को निलंबित कर दिया गया है, और आयोग ने 2 नवंबर दोपहर तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।

मोकामा विधानसभा सीट पर 6 नवंबर को मतदान होना है। यह इलाका लंबे समय से बाहुबलियों के गढ़ के रूप में कुख्यात रहा है, जहां चुनावों के दौरान हिंसा और दबदबा आम बात रही है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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