Home भारत TMC को I-PAC चला रही थी, निलंबित नेता रिजु दत्ता का दावा-...

TMC को I-PAC चला रही थी, निलंबित नेता रिजु दत्ता का दावा- टिकट के बदले मांगे गए 50 लाख

0
Bearded man with glasses speaking into a microphone in a beige-walled room.
टीएमसी के निलंबित नेता रिजु दत्ता। IANS

कोलकाताः तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित किए जाने के बाद पार्टी के पूर्व प्रवक्ता रिजु दत्ता ने गंभीर आरोप लगाकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने दावा किया है कि पिछले छह महीनों से पार्टी का संचालन राजनीतिक रणनीतिकार संस्था आईपैक (I-PAC) कर रही थी और विधानसभा चुनाव का टिकट देने के बदले उनसे 50 लाख रुपये की मांग की गई थी।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में रिजु दत्ता ने कहा, “पश्चिम बंगाल में पिछले छह महीने से तृणमूल कांग्रेस को आईपैक ही चला रही थी। मुझे पहले ही बता दिया गया था कि मेरा टिकट लगभग तय है, लेकिन बाद में मुझसे 50 लाख रुपये मांगे गए। मेरे पास इतनी रकम नहीं थी। एक रात मेरी पत्नी और मां ने अपने गहने तक मुझे दे दिए थे, लेकिन अगले ही दिन मैंने उन्हें वापस कर दिया। मैं 50 लाख रुपये की व्यवस्था नहीं कर सका और इसी वजह से मुझे टिकट नहीं मिला।”

उन्होंने कहा कि यह मांग सीधे टीएमसी नेतृत्व की ओर से नहीं, बल्कि आईपैक से जुड़े लोगों की तरफ से की गई थी। दत्ता ने कहा कि प्रतीक जैन ने उनसे पैसे नहीं मांगे थे, बल्कि अर्जुन नाम के एक व्यक्ति ने यह रकम मांगी थी।

‘13 साल पार्टी के लिए काम किया, परिवार को मिली धमकियां’

रिजु दत्ता ने कहा कि वह पिछले 13 वर्षों से टीएमसी के साथ जुड़े रहे और पार्टी के लिए पूरी निष्ठा से काम किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने मुझे पहचान और सम्मान दिया, लेकिन हालात तब बदले जब 4 मई को सत्ता परिवर्तन हुआ। इसके बाद सीपीएम के कुछ लोग, जो बाद में टीएमसी छोड़कर भाजपा में चले गए, उन्होंने हिंसा को अंजाम दिया। पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं की इसमें कोई भूमिका नहीं थी।

रिजु दत्ता ने आरोप लगाया कि उन्हें और उनके परिवार को गंभीर धमकियां मिलीं। उन्होंने दावा किया कि उनकी मां और पत्नी को फोन कॉल और मैसेज के जरिए धमकियां दी गईं। यहां तक कि उनकी पत्नी के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके बीमार ससुर पर हमला किया गया।

दत्ता ने कहा, “उस मुश्किल समय में टीएमसी से किसी ने मेरा फोन तक नहीं उठाया। लेकिन दिल्ली और बंगाल के भाजपा नेताओं ने मेरी बात सुनी। मैंने सिर्फ अपने परिवार की सुरक्षा के लिए भाजपा नेताओं से संपर्क किया और बाद में उनका धन्यवाद किया। शायद यही वजह है कि मुझे पार्टी से निकाल दिया गया।”

‘जान का खतरा था, इसलिए बंगाल छोड़ना पड़ा’

रिजु दत्ता ने दावा किया कि उन्हें अपनी जान बचाने के लिए पश्चिम बंगाल छोड़ना पड़ा। उन्होंने कहा, “शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक की हत्या के बाद मुझे भी एक फोन कॉल आया। उस कॉल के बाद मुझे लगा कि मेरी जान को खतरा है। मैं पूरे परिवार के साथ दिल्ली चला गया।”

दत्ता ने इस दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, शुभेंदु अधिकारी सिर्फ भाजपा के नहीं, पूरे बंगाल के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री बनने से पहले ही सबसे बड़ा काम किया। अगर अपने पीए की हत्या के बाद उन्होंने नर्सिंग होम के बाहर खड़े होकर बदला लेने की बात कही होती, तो उस रात हजारों टीएमसी कार्यकर्ताओं की लाशें गिरतीं। लेकिन उन्होंने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की।

उन्होंने कहा कि शुभेंदु अधिकारी ने संयम दिखाकर हजारों टीएमसी कार्यकर्ताओं की जान बचाई और यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।

‘कमोड लगवाने से बिल्डिंग प्लान पास कराने तक के देने पड़ते थे पैसे’

गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस ने शनिवार को पार्टी विरोधी बयान देने के आरोप में अपने तीन प्रवक्ताओं- रिजु दत्ता, कोहिनूर मजूमदार और कार्तिक घोष को छह साल के लिए निलंबित कर दिया था। पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि इन नेताओं ने सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान दिए, जो पार्टी अनुशासन के खिलाफ हैं।

रिजु ने आरोप लगाया कि मैं सच बोल रहा था इसलिए निलंबित कर दिया गया। रविवार को मीडिया से बातचीत में दत्ता ने सवाल उठाया कि भाजपा की चुनावी जीत के बाद पश्चिम बंगाल में लोग अब खुलकर अपनी बात क्यों कह पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आखिर हालात इस स्तर तक क्यों पहुंच गए? लोग जश्न क्यों मना रहे हैं? हमने कभी आत्ममंथन नहीं किया।

उन्होंने कहा कि घर में कमोड लगवाने से लेकर बिल्डिंग प्लान पास कराने तक हर जगह पैसे देने पड़ते थे। शायद ही कोई ऐसा काम बचा था जिसके लिए लोगों को टीएमसी को भुगतान न करना पड़ता हो। दत्ता ने बहुचर्चित स्कूल भर्ती घोटाले का भी जिक्र किया और कहा कि नौकरी चोरी के आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अगर कोई यह कहे कि नौकरियां नहीं छीनी गईं, तो यह बहुत बड़ा पाप होगा। जब भी मैंने पार्टी मंच पर ऐसे मुद्दे उठाने की कोशिश की, मेरी बात को नजरअंदाज कर दिया गया।”

author avatar
अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version