Home विचार-विमर्श खेती बाड़ी-कलम स्याहीः कौन-कौन सुर्खियां बटोर रहा बंगाल में?

खेती बाड़ी-कलम स्याहीः कौन-कौन सुर्खियां बटोर रहा बंगाल में?

गुरुवार को देश के तीन राज्यों में वोटिंग के बीच पश्चिम बंगाल में प्रचार के लिए पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ममता बनर्जी पर अप्रत्यक्ष तौर पर हमला बोला। प्रधानमंत्री मोदी ने हल्दिया में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि इस बार भबानीपुर में नंदीग्राम होगा।

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एआई निर्मित इमेज।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। दोनों दलों के कद्दावर नेताओं की रैलियों से बंगाल में चुनावी तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल में मोर्चा संभाल लिया है। अमित शाह शुक्रवार (10 अप्रैल) को खड़गपुर में एक रोड शो करेंगे। शनिवार (11 अप्रैल) को बांकुड़ा के ओंडा में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। भाजपा का दावा है कि इन कार्यक्रमों से दक्षिण बंगाल के चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल जायेंगे।

वहीं गुरुवार को देश के तीन राज्यों में वोटिंग के बीच पश्चिम बंगाल में प्रचार के लिए पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ममता बनर्जी पर अप्रत्यक्ष तौर पर हमला बोला। प्रधानमंत्री मोदी ने हल्दिया में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि इस बार भबानीपुर में नंदीग्राम होगा। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भबानीपुर सीट से लड़ रही हैं। भाजपा ने उनके सामने सुभेंदु अधिकारी को उतारा है। 2021 के चुनावों में ममता बनर्जी नंदीग्राम से हार गई थीं। नरेंद्र मोदी ने कहा कि बंगाल ने इस बार हर विपरीत परिस्थिति को पराजित करने का फैसला कर लिया है। भाजपा की विजय, इस उत्साह और उमंग में दिखाई पड़ती है। ये परिवर्तन की आंधी है। ये टीएमसी की निर्मम सरकार के जाने का ऐलान है। हल्दिया की जनसभा में पीएम मोदी टीएमसी नेता ममता बनर्जी के 10 प्रण के जवाब ने बंगाल के लिए 6 वादे किए।

दूसरी ओर बंगाल में तृणमूल के बागी और अब अपनी पार्टी बना चुके हुमायूं कबीर का एक ऑडियो क्लिप खूब सुर्खियां बटोर रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने गुरुवार को अपने पूर्व विधायक हुमायूं कबीर और उनकी नई बनी ‘आम आदमी उन्नयन पार्टी’ (एएयूपी) पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ 1,000 करोड़ रुपए की डील करने का आरोप लगाया। यह डील पश्चिम बंगाल विधानसभा की उन सीटों पर अल्पसंख्यक वोटों को बांटने के लिए की गई है, जहां आगामी चुनावों में कबीर के उम्मीदवार असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रहे हैं। इस आरोप पर हुमायूं कबीर ने तुरंत पलटवार करते हुए इसका खंडन किया।

एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री- फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास और तृणमूल के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने एक ऑडियो क्लिप जारी की, जिसमें कथित तौर पर कबीर को किसी अज्ञात व्यक्ति से इसी तरह की बातें करते हुए सुना गया। गौरतलब है कि इन तीनों ने यह ऑडियो क्लिप उस समय जारी करने का फैसला किया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वी मेदिनीपुर जिले के हल्दिया में एक विशाल चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। यह उस दिन राज्य में उनकी निर्धारित तीन रैलियों में से पहली थी।

ऑडियो क्लिप में कबीर को कथित तौर पर उस अज्ञात व्यक्ति को यह भरोसा दिलाते हुए सुना गया कि यदि भाजपा इस बार ज्यादातर हिंदू वोट हासिल करने में सफल हो जाती है, तो वह मुस्लिम मतदाताओं को बांटने में अहम भूमिका निभाएंगे, और वह ऐसा राज्य से तृणमूल को सत्ता से बाहर करने के लिए करेंगे। कबीर को उस अज्ञात व्यक्ति को यह भरोसा दिलाते हुए भी सुना गया कि यदि इस बार पश्चिम बंगाल में भाजपा सत्ता में आती है, तो वह और उनकी पार्टी नए भाजपा मुख्यमंत्री को शत-प्रतिशत समर्थन देंगे।

ऑडियो क्लिप में, उन्हें विधानसभा में विपक्ष के नेता सुभेंदु अधिकारी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के साथ नियमित संपर्क में होने का दावा करते हुए भी सुना गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में हकीम ने कहा कि कबीर को अल्पसंख्यक मतदाताओं को मूर्ख समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह पैसों के लिए अपनी अंतरात्मा भाजपा को बेच सकते हैं। लेकिन आम अल्पसंख्यक मतदाता ऐसा कभी नहीं करेंगे। वहीं कबीर ने इन आरोपों का खंडन किया और सबूत की मांग की है।

कबीर ने कहा कि 1,000 करोड़ रुपए बहुत बड़ी रकम है। भारतीय जनता पार्टी के साथ मेरा 1 करोड़ रुपए का भी कोई सौदा नहीं हुआ है। वे जो चाहें कह सकते हैं। लेकिन सबसे पहले, उन्हें इस बात का सबूत देना चाहिए कि या तो मैं भाजपा के किसी व्यक्ति से मिला हूं, या कोई भाजपा नेता मुझसे मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि तृणमूल द्वारा जारी की गई ऑडियो क्लिप फर्जी है। कबीर ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस राजनीतिक रूप से मेरा मुकाबला नहीं कर सकी, और इसलिए अब उन्होंने ऐसी घटिया हरकतों का सहारा लिया है।

उन्होंने यह भी कहा कि मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद बनाने के अपने मिशन में वे शहीद होने के लिए भी तैयार हैं। यह मस्जिद यूपी के अयोध्या में 6 दिसंबर, 1992 को गिराए गए मूल ढांचे जैसी ही होगी। कबीर ने कहा कि मैं अपने मिशन में शहीद होने के लिए तैयार हूं। लेकिन मैं यह कह रहा हूं कि मस्जिद बनाने का काम पूरी तेजी से चल रहा है, और यह अगले दो सालों में पूरा हो जाएगा।

इन सब सियासी खबरों के बीच आज यानी शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खड़गपुर सदर सीट से भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष के समर्थन में चुनाव प्रचार करने जा रहे हैं। यह मेगा रोड शो दोपहर करीब 3:00 बजे मालिंचा के अतुलमनी स्कूल के सामने से शुरू होगा और खरिदा के घड़ी इलाके में जाकर संपन्न होगा। शहर को बैनर-पोस्टर से पाट दिया गया है।

रोड शो के अगले दिन यानी शनिवार को अमित शाह बांकुड़ा जिले के ओंडा विधानसभा क्षेत्र के रामसागर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। ओंडा में वह भाजपा विधायक और उम्मीदवार अमरनाथ शाखा, विष्णुपुर और कोतुलपुर के उम्मीदवारों के लिए लोगों से वोट की अपील करेंगे।

अमित शाह के इन कार्यक्रमों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। भाजपा इसे चुनाव प्रचार की नई गति मान रही है, तो तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्षी दल भी केंद्रीय गृह मंत्री की गतिविधियों पर नजर बनाये हुए हैं। बांकुड़ा और खड़गपुर दोनों ही क्षेत्रों में भाजपा अपनी पकड़ मजबूत बनाये रखने की कोशिश में है।

दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक चुनावी जनसभा में कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण-एसआईआर के जरिए मतदाता सूची से 90 लाख से अधिक नाम हटाकर बंगाल पर कब्जा करने के भारतीय जनता पार्टी के कथित प्रयासों के बावजूद उनकी पार्टी आगामी चुनावों में जीत हासिल करेगी। मीनाखान में एक जनसभा में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मतदाता सूची से सभी धर्मों और समुदायों के लोगों के नाम हटाए गए हैं।

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गिरीन्द्र नाथ झा
गिरीन्द्र नाथ झा ने पत्रकारिता की पढ़ाई वाईएमसीए, दिल्ली से की. उसके पहले वे दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक कर चुके थे. आप CSDS के फेलोशिप प्रोग्राम के हिस्सा रह चुके हैं. पत्रकारिता के बाद करीब एक दशक तक विभिन्न टेलीविजन चैनलों और अखबारों में काम किया. पूर्णकालिक लेखन और जड़ों की ओर लौटने की जिद उनको वापस उनके गांव चनका ले आयी. वहां रह कर खेतीबाड़ी के साथ लेखन भी करते हैं. राजकमल प्रकाशन से उनकी लघु प्रेम कथाओं की किताब भी आ चुकी है.

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