Home भारत बंगाल में SIR के बीच फिर एक बीएलओ ने की खुदकुशी, निर्वाचन...

बंगाल में SIR के बीच फिर एक बीएलओ ने की खुदकुशी, निर्वाचन अधिकारी ने मांगी रिपोर्ट, सुसाइड नोट में क्या बातें लिखीं?

घटना के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने नदिया के जिलाधिकारी अनीश दासगुप्ता से तुरंत रिपोर्ट देने को कहा है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, भारत निर्वाचन आयोग ने भी फोन पर मामले की जानकारी ली।

0
CBSE KVS NVS VARIOUS POST RECRUITMENT INCLUDING PRINCIPAL VICE PRINCIPAL AND NON TEACHING POSTS

पश्चिम बंगाल में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की लगातार हो रही मौतों ने प्रशासन और चुनाव आयोग दोनों को चिंता में डाल दिया है। शनिवार सुबह नदिया जिले के कृष्णानगर के शास्तीतला इलाके में 51 वर्षीय बीएलओ रिंकू ताराफदार अपने घर में फांसी के फंदे से लटकी मिलीं। परिवार ने आरोप लगाया कि उन्हें स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के काम का अत्यधिक दबाव था, जिसकी वजह से उन्होंने यह कदम उठाया।

पुलिस के अनुसार, कमरे से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। इसमें उन्होंने लिखा कि उनकी मौत के लिए परिवार नहीं, चुनाव आयोग जिम्मेदार है। नोट में यह भी उल्लेख है कि वह किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ी थीं, लेकिन एसआईआर के अमानवीय काम के बोझ को सहन नहीं कर पा रही थीं। वह पार्ट-टाइम टीचर थीं और बेहद कम तनख्वाह में परिवार चला रही थीं।

पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और मामले की जांच जारी है। राज्य मंत्री उज्ज्वल बिस्वास भी रिंकू ताराफदार के घर पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की।

जलपाईगुड़ी में भी ऐसी ही मौत, CEO ने मांगी तत्काल रिपोर्ट

घटना के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने नदिया के जिलाधिकारी अनीश दासगुप्ता से तुरंत रिपोर्ट देने को कहा है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, भारत निर्वाचन आयोग ने भी नदिया के जिलाधिकारी से फोन पर बात कर पूरे मामले की जानकारी ली।

सूत्रों का कहना है कि जलपाईगुड़ी जिले में बुधवार को हुई एक अन्य बीएलओ की मौत पर भी अब तक जिला प्रशासन ने रिपोर्ट नहीं भेजी है, जिस पर आयोग ने नाराजगी जताई है।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले जलपाईगुड़ी के मालबाजार में एक महिला बीएलओ शांति मुनी एक्का ने भी कथित तौर पर काम के दबाव में आत्महत्या कर ली थी। परिवार ने आरोप लगाया कि वह एसआईआर के असहनीय काम के दबाव को झेल नहीं पाईं।

नदिया जिले की घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर बीएलओ की मौत को लेकर चुनाव आयोग पर हमला बोला। पार्टी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “एसआईआर के डर ने एक और निर्दोष जान ले ली। नदिया की शास्तीतला की बीएलओ रिंकू ताराफदार अमानवीय प्रशासनिक दबाव, अवास्तविक समय-सीमा और ज़रा सी गलती पर सज़ा के भय से मानसिक रूप से टूट गई थीं। यह असहनीय स्थिति उन्हें आत्महत्या के रास्ते पर ले गई।”

तृणमूल के आधिकारिक हैंडल ने पोस्ट में आगे लिखा, “चुनाव आयोग की जटिल डिजिटल प्रक्रिया, अवास्तविक डेडलाइन, सज़ा का डर और रात में निगरानी के नाम पर कर्मचारियों पर मानसिक अत्याचार पूरी तरह अस्वीकार्य है। बीएलओ पर अमानवीय दबाव से जानें जा रही हैं, जबकि बीजेपी केवल राजनीतिक फायदा उठाने में लगी है। यही बीजेपी की क्रूर, अमानवीय और गैर-जिम्मेदार राजनीति का असली चेहरा है।”

ममता बनर्जी की आयोग से एसआईआर रोकने की मांग

लगातार मौतों के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चिंता जाहिर की है। ममता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह अयोजित और जबरन चलाया जा रहा अभियान और लोगों की जान ले सकता है।

ममता बनर्जी ने दावा किया कि एसआईआर शुरू होने के बाद से लगभग 28 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कर्मचारी और बीएलओ शामिल हैं।

‘अनियोजित, अराजक और खतरनाक’, ममता बनर्जी ने SIR को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखा पत्र

राज्य सरकार ने हालिया घटनाओं के बाद मृत बीएलओ के परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। जलपाईगुड़ी की मृतक बीएलओ शांति मुनी एक्का के परिवार को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। हुगली की तपति बिस्वास के परिवार को भी 1 लाख रुपये और कोचबिहार के ललित अधिकारी, जिनकी सड़क हादसे में मौत हुई थी, उनके परिवार को भी 2 लाख रुपये मुआवजे की राशि सौंपी गई। यह मुआवजा संबंधित जिला अधिकारियों की ओर से परिवारों को दिया गया है।

author avatar
अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version