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अमेरिका बढ़ाएगा H-1B और L-1 वीजा रिन्यूअल फीस? भारतीय कर्मचारियों पर क्या होगा असर?

यह घटनाक्रम तब हुआ है जब पिछले महीने अमेरिका की एक फेडरल अपील कोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया जिसमें ट्रंप प्रशासन के एक हालिया फैसले को रद्द कर दिया गया था। ट्रंप प्रशासन के उस आदेश के तहत बहुत ज्यादा कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए नए H-1B वीजा पर $100,000 की फीस लगाने की बात कही गई थी।

वाशिंगटन: अमेरिका का ट्रंप प्रशासन मौजूदा वीजा को आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त वीजा फीस लगाकर H-1B सिस्टम को और सख्त बना रहा है। अब तक यह फीस सिर्फ नए H-1B और L-1 वीजा के लिए ही देनी पड़ती थी। ऐसे में अब उन कंपनियों का खर्च काफी बढ़ सकता है जो H-1B जैसे वीजा पर अमेरिका में मौजूद विदेशी कर्मचारियों को बनाए रखना चाहती हैं। इसके साथ ही अमेरिका की इस नीति का असर उन भारतीय पेशेवरों पर भी पड़ सकता है जो 2025 में सभी H-1B रिन्यूअल में बड़ी संख्या में शामिल थे।

यह घटनाक्रम तब हुआ है जब पिछले महीने अमेरिका की एक फेडरल अपील कोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया जिसमें ट्रंप प्रशासन के एक हालिया फैसले को रद्द कर दिया गया था। ट्रंप प्रशासन के उस आदेश के तहत बहुत ज्यादा कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए नए H-1B वीजा पर $100,000 की फीस लगाने की बात कही गई थी।

अमेरिकी प्रशासन ने 2024 में जारी किया था प्रस्ताव

इस विस्तृत प्रस्ताव को सबसे पहले जून 2024 में डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी और कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन एजेंसी ने जारी किया था। इसे आधिकारिक तौर पर ‘प्रस्तावित नियम-निर्माण की सूचना’ कहा जाता है। इसे अमेरिकी फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया गया था।

बाद में यह प्रस्ताव ट्रंप प्रशासन के 2026 के यूनिफाइड रेगुलेटरी एजेंडा (जिसे जुलाई की शुरुआत में DHS और अन्य एजेंसियों ने जारी किया था) में अंतिम नियम के तौर पर लंबित आइटम के रूप में शामिल किया गया। उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में इसका अंतिम नियम आ जाएगा। इस अंतिम नियम को अमेरिकी सरकार के ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट (OMB) और ऑफिस ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड रेगुलेटरी अफेयर्स (OIRA) द्वारा सार्वजनिक किया जाएगा।

अगर इसे लागू किया जाता है तो योग्य एम्प्लॉयर्स को न सिर्फ नए H-1B और L-1 आवेदनों और एम्प्लॉयर बदलने से जुड़े आवेदनों के लिए बल्कि मौजूदा कर्मचारियों के लिए रहने की अवधि बढ़ाने (रूटीन एक्सटेंशन) के अनुरोध के समय भी ” 9-11 रिस्पॉन्स एंड बायोमेट्रिक एंट्री-एक्जिट फीस ” देनी होगी।

US is preparing for major changes to H-1B  Indians will be the most affected, अमेरिका
फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

बताते चलें कि मौजूदा समय में यह शुल्क केवल तभी लागू होता है जब कोई पात्र एंप्लॉयर प्रारंभिक H-1B या L-1 आवेदन दाखिल करता है या जब कोई विदेशी कर्मचारी नियोक्ता बदलता है। प्रस्तावित नियम के तहत यह शुल्क तब भी देय होगा जब वही नियोक्ता मौजूदा H-1B या L-1 कर्मचारी के प्रवास की अवधि बढ़ाने का प्रयास करेंगे।

9/11 रिस्पांस और बायोमेट्रिक प्रवेश-निकास शुल्क के दायरे को विस्तारित करने का प्रस्ताव अमेरिका में 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले एंप्लॉयर को टारगेट करता है जहां कम से कम आधे कर्मचारियों के पास H-1B और L-1 वीजा है।

ये नियोक्ता वर्तमान में नए H-1B आवेदनों के लिए कम से कम 4,000 डॉलर और नए L-1 आवेदनों के लिए 4,500 डॉलर का भुगतान करते हैं। इस प्रस्ताव के तहत, ये शुल्क इन एंप्लॉयर्स दाखिल किए गए सभी प्रवास विस्तार (extend the stay) आवेदनों पर लागू होंगे।

भारतीय कर्मचारियों पर क्या पड़ेगा असर?

अमेरिकी प्रशासन द्वारा प्रस्तावित इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन एम्प्लॉयर्स पर पड़ने की उम्मीद है जो भारतीय प्रोफेशनल्स पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं क्योंकि H-1B एक्सटेंशन की मंजूरी पाने वालों में इनकी संख्या सबसे ज्यादा होती है।

US सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) के डेटा के मुताबिक, एजेंसी ने FY2025 में 4,06,348 H-1B याचिकाओं को मंजूरी दी। इनमें से 2,91,542 (लगभग 72%) नौकरी जारी रखने के लिए थीं। इन मंजूरी में भारतीयों की संख्या 2,26,359 थी। यह सभी H-1B एक्सटेंशन का 77.6% है।

इसके चलते अगर H-1B और L-1 वीजा रिन्यूअल याचिकाओं पर अतिरिक्त शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव लागू होता है तो बड़ी संख्या में भारतीय कर्मचारियों को काम पर रखने वाले एम्प्लॉयर्स खासकर टेक्नोलॉजी सेक्टर में, को इन कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए काफी ज्यादा लागत का सामना करना पड़ेगा।

इस प्रस्ताव से उन मल्टीनेशनल कंपनियों की लागत भी बढ़ जाएगी जो L-1 वीजा को आगे बढ़ाती हैं। इन वीजा का इस्तेमाल विदेशी ऑफिसों से एग्जीक्यूटिव, मैनेजर और खास जानकारी रखने वाले कर्मचारियों को अमेरिका भेजने के लिए किया जाता है।

अगर यह नियम लागू होता है तो सबसे ज्यादा असर टेक कंपनियों और आईटी सर्विसेज फर्म्स पर पड़ेगा। क्योंकि अधिकतर इन्हीं सेक्टर्स या कंपनियों के लिए काम करने के लिए एच-1बी, एल-1 वीजा लिया जाता है।

नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) के मुताबिक, फिस्कल ईयर 2025 में नौकरी जारी रखने के लिए मंजूर हुई H-1B याचिकाओं में सबसे ज्यादा संख्या Amazon की थी; इसके बाद Tata Consultancy Services (5,293), Microsoft (4,863), Meta (4,740), Apple (4,610) और Google (4,509) का नंबर आता है। NFAP का कहना है कि ये आंकड़े अलग-अलग कर्मचारियों के बजाय मंजूर हुई याचिकाओं को दिखाते हैं क्योंकि एक H-1B वर्कर को ट्रांसफर या बदली हुई फाइलिंग की वजह से एक साल में कई मंजूरी मिल सकती हैं।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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