इस्लामाबाद: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में रविवार (2 अगस्त) को एक शांति रैली के दौरान एक आत्मघाती हमला हुआ। इस हादसे में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और कई लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
समाचार एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, जिला अधिकारियों ने बताया कि यह धमाका तब हुआ जब स्वात जिले के काबल टाउन में स्वात शांति रैली चल रही थी। सोशल मीडिया पर इसके कुछ वीडियो देखे जा सकते हैं जिसमें हमले के बाद अफरातफरी की स्थिति देखी जा सकती है।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में धमाका, 14 की मौत
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, धमाके में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों अन्य घायल हो गए। स्वात के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DIG), फिदा हुसैन ने AFP को बताया, “हमलावर ने… अपनी विस्फोटक जैकेट में धमाका किया। एक आत्मघाती हमलावर ने चौराहे पर स्थित पुलिस स्टेशन में घुसने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उसे मुख्य गेट पर ही रोक लिया।”
शांति रैली के दौरान हुए इस धमाके के बाद अफरातफरी का माहौल हो गया। इससे लोग घायल हुए। बता दें कि स्वात घाटी कभी इस्लामी उग्रवादियों का गढ़ हुआ करती थी जो शरिया (इस्लामी कानून) की सख्त व्याख्या लागू करते थे। 2007 में पाकिस्तानी सेना ने एक बड़ा ऑपरेशन चलाकर उन्हें वहां से खदेड़ दिया और सरकार का नियंत्रण बहाल किया।

इस हमले की हालांकि अभी तक किसी भी समूह ने जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि इस आत्मघाती हमले का शक तहरीक-ए-तालिबान (TTP) पर जा सकता है क्योंकि 2021 में तालिबान शासन की वापसी के बाद इसके नेताओं और लड़ाकों ने क्षेत्र में पनाह ली है। इसको लेकर पाकिस्तान और तालिबान की मौजूदा सरकार के बीच तनाव जारी है।
PTI के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके की घेराबंदी कर ली और बचाव दलों ने घायलों को पास के अस्पतालों में पहुंचाया।
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने इस हमले की निंदा की। उन्होंने एक बयान जारी कर मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की।
इस प्रांत में बढ़ रहे हमले
गौरतलब है कि पाकिस्तान के इस क्षेत्र में हाल के दिनों में हमलों की कई घटनाएं देखने को मिली हैं। पाकिस्तान ने पहले भी सीमावर्ती इलाकों में हुए ऐसे हमलों के लिए अफगानिस्तान से पनपने वाले उग्रवाद को जिम्मेदार ठहराया है। काबुल में मौजूद तालिबान सरकार इन हमलों में अफगानिस्तान की किसी भी भूमिका से इनकार करती है।
स्वात पीस रैली का आयोजन ‘स्वात अमन जिरगा’ (स्थानीय आदिवासी परिषद) ने किया था। इसमें शामिल लोगों ने नारे लगाए और प्लेकार्ड लेकर इलाके में शांति की मांग की क्योंकि पिछले कुछ महीनों में वहां सुरक्षा व्यवस्था बिगड़ी है।
शुक्रवार को सेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस साल चरमपंथियों के हमलों और उसके बाद हुए ऑपरेशन्स में 819 सुरक्षाकर्मी और आम नागरिक मारे गए हैं।
इन आरोपों के चलते इस्लामाबाद और काबुल के बीच गहरी दरार और यहां तक कि सशस्त्र संघर्ष भी शुरू हो गया है। पाकिस्तान ने घातक हवाई हमले किए हैं। इस्लामाबाद का कहना है कि इन हमलों में अफगानिस्तान की जमीन पर मौजूद चरमपंथियों को निशाना बनाया गया।
वहीं, तालिबान सरकार और संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि जून में पूर्वी अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हालिया हमलों में दर्जनों आम नागरिक मारे गए।
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