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अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह पर प्रतिबंधों से भारत को छह महीने की छूट दी: विदेश मंत्रालय

अमेरिका ने भारत को चाबहार बंदरगाह पर प्रतिबंधों से भारत को छह महीने की छूट दी है। इसे भारत के लिए एक कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।

AMERICA EXEMPT INDIA FROM SANCTION ON CHABHAR PORT FOR SIX MONTHS, अमेरिका
अमेरिका ने चाबहार पोर्ट पर भारत को प्रतिबंधों से छह माह की छूट दी, फोटोः आईएएनएस

नई दिल्लीः भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार, 30 अक्टूबर को कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी प्रतिबंधों से भारत को छह महीने की छूट दी है। इसे भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ” ईरान में चाबहार बंदरगाह के लिए हमें अमेरिकी प्रतिबंधों से छह महीने की छूट दी गई है।”

भारत को मिलेगी मदद

अमेरिका के इस कदम से नई दिल्ली को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह परियोजना में अपनी भागीदारी जारी रखने में मदद मिलेगी, जो पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए एक प्रमुख व्यापार और संपर्क मार्ग के रूप में कार्य करता है ।

भारत को अस्थायी छूट देने का अमेरिका का नवीनतम निर्णय ईरान में चाबहार बंदरगाह परियोजना पर 29 सितंबर को लगाए गए प्रतिबंधों के एक महीने बाद आया है।

ये प्रतिबंध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर दबाव बढ़ाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा थे जिसका असर भारत पर भी पड़ा।

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ये प्रतिबंध विशेष रूप से चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत की भागीदारी को दर्शाते हैं। ये उपाय 
ईरान पर संयुक्त राष्ट्र के व्यापक प्रतिबंधों को फिर से लागू करने के बाद किए गए हैं।

साल 2018 में, ट्रम्प के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिकी प्रशासन ने भारत के लिए एक अपवाद बनाया था, जिसमें छूट दी गई थी जिससे भारतीय कंपनियों को ईरान पर व्यापक अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चाबहार में परिचालन जारी रखने की अनुमति मिली थी।

हालांकि, क्षेत्रीय गतिशीलता में बदलाव, विशेष रूप से अफगानिस्तान में पश्चिमी समर्थित सरकार के पतन के कारण वाशिंगटन को पिछले महीने छूट वापस लेनी पड़ी, जिससे यह परियोजना उसके नवीनतम प्रतिबंधों के दायरे में आ गई।

रूस से तेल के आयात पर क्या बोले रणधीर जायसवाल?

इस दौरान रणधीर जायसवाल ने रूस से तेल खरीद को लेकर किए गए एक सवाल के जवाब में कहा कि हमारे निर्णय स्वाभाविक रूप से वैश्विक तेल बाजार की उभरती गतिशीलता को ध्यान में रखते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि हम रूसी तेल कंपनियों पर हाल ही में लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं।

इस दौरान अमेरिका के साथ भारत के संबंधों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि भारत हमेशा अमेरिका के साथ अपनी साझेदारी को महत्व देता है। उन्होंने कहा कि हम इसे मजबूत करने के लिए दोनों देशों के साथ लगातार जुड़े हुए हैं।

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गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयातित वस्तुओं पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया है। वहीं, रूस से तेल खरीद और अन्य सैन्य उत्पादों की खरीद को लेकर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगाया है।

ट्रंप इसके पीछे यह तर्क देते रहे हैं कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीद से रूस को यूक्रेन के विरुद्ध युद्ध लड़ने में आर्थिक रूप से मदद मिल रही है।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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