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वर्कर वीजा से लेकर एच-1बी तक, अमेरिकी वीजा नियमों में बदलाव का भारतीयों पर क्या असर होगा?

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अमेरिका में वीजा नीतियों से बदलाव पर भारतीयों पर असर, फोटोः आईएएनएस

नई दिल्लीः अमेरिका में ट्रंप प्रशासन बीते कुछ महीनों में विभिन्न अमेरिका वीजा प्रणालियों में बदलाव कर रहा है। इसमें विदेशी ड्राइवरों के लिए श्रमिक वीजा पर रोक लगाने से लेकर ऑटोमेटिक वर्क परमिट को नवीनीकरण को समाप्त करना है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के इन नियमों के परिणामस्वरूप भारतीयों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है।

होमलैंड सिक्योरिटी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 में भारत सबसे ज्यादा प्रवासी भेजने वाला देश था। भारत द्वारा अमेरिका जाने वाले कुल गैर-आप्रवासी आबादी का 33 फीसदी था।

अमेरिका में रहकर काम करने वाले अस्थायी कामगारों की संख्या में भारत का काफी हिस्सा है। इस क्षेत्र में भारत के कामगारों की संख्या लगभग 47 फीसदी है। डीएचएस के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 70 फीसदी भारतीय गैर-आप्रवासी अस्थायी लगभग 70 फीसदी गैर-आप्रवासी अस्थायी कर्मचारी और 30 फीसदी छात्र थे।

वित्त वर्ष 2024 में कुल 11,90,000 भारतीय निवासी गैर-आप्रवासी आबादी अमेरिका में थी। हाल के कुछ महीनों में ट्रंप प्रशासन द्वारा विभिन्न वीजा प्रतिबंध लगाए गए हैं। इनका असर भारतीय लोगों पर पड़ा है।

विदेशी श्रमिकों के लिए श्रमिक वीजा पर रोक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 21 अगस्त को ट्रक ड्राइवरों के लिए अचानक से अमेरिकी वीजा जारी करना बंद कर दिया था। प्रशासन द्वारा यह कदम अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे एक भारतीय ट्रक ड्राइवर के साथ हुई घातक दुर्घटना के बाद उठाया गया था। इसने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था।

इसके लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक पोस्ट कर घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि तुरंत प्रभाव से हम वाणिज्यिक ट्रक चालकों के लिए श्रमिक वीजा जारी करने पर रोक लगा रहे हैं।

इस कदम को उठाने के पीछे के कारणों का हवाला देते हुए रुबियो ने कहा था कि अमेरिका में बड़े ट्रैक्टर-ट्रेलर ट्रक चलाने वाले विदेशी ड्राइवरों की बढ़ती संख्या “अमेरिकी जीवन को खतरे में डाल रही है और अमेरिकी ट्रक चालकों की आजीविका को कम कर रही है।”

अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में साल 2000-2021 के बीच विदेशी मूल के ट्रक ड्राइवरों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। इसमें आधे से अधिक लैटिन अमेरिका से आते हैं जबकि भारत और पूर्वी यूरोपीय देशों की संख्या भी अधिक है।

अमेरिकी ट्रकिंग उद्योग में भारतीय-अमेरिकी ड्राइवरों की संख्या में भी उल्लेखनीय रूप से वृद्धि हुई है। इसमें सिख समुदाय के अधिक लोग हैं। कैलिफोर्निया में हजारों ट्रक चालक भारतीय मूल के हैं।

इनमें से कई लोग सिख समुदाय के हैं या उनके वंशज हैं। ये लोग ट्रकिंग व्यवसायों और ट्रक स्टॉप में सक्रिय रूप से शामिल हैं।

इन समुदायों ने अमेरिका में लंबे समय से चली आ रही ड्राइवरों की कमी को भरा है। ऐसे में श्रमिक वीजा पर रोक के बाद भारतीय मूल के लोगों समेत दुनियाभर के ड्राइवरों पर असर पड़ेगा।

नई छात्र वीजा नीति

इसी साल अगस्त के अंत में ट्रंप प्रशासन ने एक नई अमेरिकी छात्र वीजा नीति का प्रस्ताव रखा। इसके तहत अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए एफ वीजा के लिए एक निश्चित समय अवधि निर्धारित की जाएगी तथा वे वीजा के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों के तहत आने वाले आगंतुकों को अमेरिका में काम करने की अनुमति दी जाएगी।

ट्रंप प्रशासन के इस प्रस्ताव से अंतर्राष्ट्रीय छात्रों, विनिमय कर्मचारियों समेत विदेशी पत्रकारों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। इन लोगों को अमेरिका में रहने के लिए विस्तार हेतु आवेदन करना पड़ा। अमेरिकी प्रशासन के नियमों के तहत छात्र और विनिमय वीजा की अवधि चार वर्ष से अधिक नहीं होगी।

हालांकि इस साल भारत से अमेरिका जाने वाले छात्रों की संख्या आधी हो गई है। अब इस नए कदम के बाद से यह संख्या और भी घटने की संभावना है।

वहीं, सितंबर महीने में अमेरिकी विदेशी विभाग ने गैर-आप्रवासी वीजा आवेदकों के लिए नियमों में बदलाव किया तथा साक्षात्कार नियुक्तियों के मानदंडों को कड़ा कर दिया है।

विभाग ने इस दौरान यह भी कहा कि गैर-आप्रवासी वीजा (एनआईवी) के लिए आवेदक को अपने निवास देश में अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास में अपना वीजा साक्षात्कार निर्धारित करना चाहिए तथा यह भी कहा कि जो लोग अपने देश से बाहर ऐसा करते हैं, ऐसे लोगों के लिए अर्हता प्राप्त करने में अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।

इसमें आगे यह भी कहा गया कि वीजा साक्षात्कार और आवेदन के लिए भुगदान किया गया शुल्क भी कभी वापस नहीं किया जाएगा। इन कड़े वीजा नियमों के तहत भारतीय आवेदकों को साक्षात्कार के लिए महीनों इंतजार करना पड़ेगा।

एच-1बी वीजा शुल्क में वृ्द्धि

बीती 19 सितंबर को राष्ट्रपति ट्रंप ने एच-1बी वीजा शुल्क में वृ्द्धि की घोषणा की। यह शुल्क बढ़ाकर 1,00,000 डॉलर हो गया। यह 21 सितंबर से प्रभावी हो गया।

ट्रंप के इस फैसले से दुनियाभर के लोगों पर प्रभाव पड़ा। हालांकि प्रशासन ने बाद में स्पष्ट किया कि यह वार्षिक शुल्क नहीं बल्कि एकबार लिया जाने वाले शुल्क है। यह शुल्क नए आवेदकों के लिए है न कि पुराने वीजा धारकों के लिए।

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका लॉटरी के जरिए हर साल करीब 85,000 एच-1 बी वीजा जारी करता है। इनमें से 70 फीसदी भारतीय वीजा धारक होते हैं।

अमेरिकी प्रशासन ने 29 अक्तूबर को कार्य नवीनीकरण की शर्तों में भी बदलाव की घोषणा की। इसका असर अमेरिका में रहने वाले विदेशी पेशेवरों, भारतीय पेशेवरों पर भी पड़ेगा।

इन नए नियमों के मुताबिक, यदि विदेशी पेशेवरों को वीजा नवीनीकरण को समाप्ति तिथि से पहले मंजूरी नहीं मिलती है तो वे कार्य करने का अधिकार खो देंगे।

इससे पहले पेशेवरों के पास वर्क परमिट की अवधि समाप्त होने के बाद भी अमेरिका में रहने की अनुमति थी।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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