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अमरनाथ यात्रा: ‘खूनी नाला’ का खतरा होगा खत्म, जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर 3.5 किमी लंबी टनल तैयार

अमरनाथ यात्रा की तैयारियां भी अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। यात्रा के शुभारंभ से पहले सोमवार को ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर पवित्र अमरनाथ गुफा में प्रथम पूजा का आयोजन किया जाएगा।

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amarnath yatra
Amarnath yatra। आईएएनएस इमेज (एआई की मदद के साथ)

इस साल की अमरनाथ यात्रा शुरू होने से ठीक पहले जम्मू-कश्मीर को एक बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना की सौगात मिलने जा रही है। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-44) पर रामबन जिले में बनी 3.5 किलोमीटर लंबी एटी-03 साउथ बाउंड टनल अब लगभग पूरी तरह तैयार है और अगले कुछ दिनों में इसे वाहनों के लिए खोलने की तैयारी चल रही है। इसके शुरू होने से वर्षों से हादसों और भूस्खलन के लिए बदनाम ‘खूनी नाला’ और पंथ्याल के बेहद संवेदनशील हिस्से से गुजरने की जरूरत काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

करीब 846 करोड़ रुपये की लागत से सरला प्रोजेक्ट वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित यह सुरंग जम्मू-श्रीनगर हाईवे के आधुनिकीकरण की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। यह न केवल यात्रा को सुरक्षित और तेज बनाएगी, बल्कि हर मौसम में निर्बाध सड़क संपर्क सुनिश्चित करने की दिशा में भी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

अमरनाथ यात्रा से पहले मिलेगी राहत

इस वर्ष बाबा अमरनाथ की 57 दिवसीय पवित्र यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी। हर साल लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं और जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग उनके लिए जीवनरेखा की तरह काम करता है।

ऐसे में यात्रा शुरू होने से पहले इस नई सुरंग के चालू होने से श्रद्धालुओं को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे खतरनाक पहाड़ी मोड़ों, पत्थर गिरने वाले क्षेत्रों और लंबे ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी, जिससे यात्रा अधिक सुरक्षित और सुगम बन सकेगी।

Vehicles parked inside a long, curved tunnel under construction with temporary lights and fencing along the walls.
IANS

‘खूनी नाला’ क्यों था सबसे बड़ी चुनौती?

रामबन जिले का खूनी नाला और पंथ्याल क्षेत्र दशकों से जम्मू-श्रीनगर हाईवे का सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जाता है। मानसून के दौरान यहां अक्सर भूस्खलन, पहाड़ों से चट्टानें गिरने, अचानक बाढ़ और कई-कई घंटों तक हाईवे बंद रहने जैसी घटनाएं होती रही हैं। इन्हीं कारणों से इस हिस्से को स्थानीय लोग ‘खूनी नाला’ के नाम से जानते हैं।

नई सुरंग बनने के बाद वाहनों को इस खतरनाक मार्ग से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे पूरे वर्ष सुरक्षित और निर्बाध यातायात संभव हो सकेगा। सरला प्रोजेक्ट वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के टेक्निकल मैनेजर हरीश कुंजा ने बताया कि 3.5 किलोमीटर लंबी एटी-03 साउथ बाउंड टनल का मुख्य निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। फिलहाल अंतिम फिनिशिंग और कुछ सहायक कार्य किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि लगभग 846 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना ट्रैफिक संचालन के लिए लगभग पूरी तरह तैयार है और अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले इसे वाहनों के लिए खोलने की तैयारी की जा रही है।

Tunnel entrance labeled AT-03 SOUTH BOUND with yellow-black safety stripes and vehicles nearby on a road under construction.
IANS

स्थानीय लोगों ने बताया ‘गेम चेंजर’

नई सुरंग को लेकर स्थानीय लोगों में भी उत्साह है। स्थानीय निवासी नरेश सिंह ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि अब लोगों को खूनी नाला वाले हादसाग्रस्त रास्ते से नहीं गुजरना पड़ेगा।

उन्होंने बताया कि पहले सड़क पर लगातार पत्थर गिरने और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता था। आज भी उस इलाके में चट्टानें गिर रही हैं, लेकिन सुरंग शुरू होने के बाद जम्मू और श्रीनगर के बीच आने-जाने वाले हजारों वाहन सुरक्षित रास्ते से गुजर सकेंगे।

स्थानीय व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि यह परियोजना सड़क सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगी।

बाबा अमरनाथ की प्रथम पूजा आज

इधर, अमरनाथ यात्रा की तैयारियां भी अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। यात्रा के शुभारंभ से पहले सोमवार को ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर पवित्र अमरनाथ गुफा में प्रथम पूजा का आयोजन किया जाएगा।

इसमें भाग लेने के लिए बाबा अमरनाथ एवं बाबा बुड्ढा अमरनाथ यात्री न्यास के महासचिव सुदर्शन खजूरिया समेत कई प्रतिनिधि बालटाल के लिए रवाना हो चुके हैं। श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड के अधिकारियों के साथ उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के भी प्रथम पूजा में शामिल होने की संभावना है।

57 दिनों तक चलेगी पवित्र यात्रा

समुद्र तल से लगभग 3,880 मीटर (करीब 12,700 फीट) की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि हिम शिवलिंग का आकार चंद्रमा के घटने-बढ़ने के साथ बदलता रहता है।

श्रद्धालु पारंपरिक पहलगाम मार्ग या अपेक्षाकृत छोटे बालटाल मार्ग से गुफा तक पहुंचते हैं। पहलगाम मार्ग से यात्रा पूरी करने में लगभग चार दिन लगते हैं, जबकि बालटाल मार्ग से आने-जाने वाले श्रद्धालु एक ही दिन में दर्शन कर वापस लौट सकते हैं। दोनों मार्गों पर हेलीकॉप्टर सेवा की सुविधा भी उपलब्ध रहती है।

नई एटी-03 सुरंग के शुरू होने से इस वर्ष अमरनाथ यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, तेज और सुगम होने की उम्मीद है। साथ ही जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पूरे साल निर्बाध यातायात बनाए रखने की दिशा में यह परियोजना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।

समाचार एजेंसी आईएएनएस इनपुट के साथ

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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