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UP के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना का मामला बंद, निजी संपत्ति पर नमाज से जुड़ा है विवाद

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना का मामला बंद कर दिया। यह मामला निजी संपत्ति पर नमाज अदा करने से जुड़ा है।

allahabad high court close contempt case against up officials for obstructing namaz on private property, इलाहाबाद हाई कोर्ट
फोटो- आईएएनएस

प्रयागराजः इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार (1 अप्रैल) को निजी संपत्ति पर नमाज पढ़ने में बाधा डालने वाले मामले में कार्यवाही बंद कर दी है। अदालत ने मोहम्मदगंज गांव में निजी संपत्ति पर नमाज अदा करने में बाधा डालने के मामले में बरेली जिले के जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का केस बंद कर दिया है।

गौरतलब है कि जनवरी में जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने आदेश दिया था कि उत्तर प्रदेश में निजी संपत्ति पर धार्मिक पाठ करने के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है।

मोहम्मदगंज गांव के निवासी ने क्या आरोप लगाया?

हालांकि, मोहम्मदगंज गांव के एक निवासी ने अधिकारियों पर फैसले का पालन न करने का आरोप लगाया। युवक ने अपने परिसर में प्रार्थना में बाधा डालने के लिए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

उस समय पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस श्रीधरन ने बरेली के जिला मजिस्ट्रेट और एसएसपी को समन भेजा था। इस दौरान अदालत ने मकान मालिक हसीन खान की सुरक्षा का भी आदेश दिया था।

हाई कोर्ट में हालिया रोस्टर बदलाव के बाद यह मामला जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रशाद की पीठ के पास पहुंचा। 25 मार्च को अदालत ने कहा कि वह अधिकारियों द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण से संतुष्ट है और उन्हें अवमानना कार्यवाही से बरी कर दिया।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्या कहा?

आज हुई सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य की दलील को भी दर्ज किया। राज्य ने दलील दी कि अदालत द्वारा संरक्षण की आड़ में याचिकाकर्ता संपत्ति पर नमाज के लिए कम से कम 52-62 लोगों को इकट्ठा कर रहा था। राज्य ने यह भी कहा कि इस तरह की प्रथा क्षेत्र की शांति और सुकून के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।

इसके बाद याचिकाकर्ता की तरफ से पक्ष रख रहे वकील ने कहा कि ” इस याचिका में उल्लिखित संपत्ति पर नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा नहीं करेगा। ” इसके बाद अदालत ने इस उम्मीद के साथ याचिका का निपटारा कर दिया कि वह वचन का पालन करेगा। अदालत ने उल्लंघन की स्थिति में उसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राज्य को भी स्वतंत्रता दी।

इसके अलावा अदालत ने याचिकाकर्ता के इस बयान को भी दर्ज किया कि उसे किसी प्रकार की सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है। इसलिए अदालत ने राज्य को याचिकाकर्ता को पहले दी गई सुरक्षा वापस लेने का निर्देश दिया।

अदालत ने राज्य को याचिकाकर्ता और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ की गई कार्रवाई वापस लेने का भी निर्देश दिया।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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