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अमेरिका के बाद अब मेक्सिको ने लगाया भारत पर 50% टैरिफ, किस सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर?

नए टैरिफ से कई ट्रेड कैटेगरी पर असर पड़ेगा, जिससे कई सामानों की कीमतों में 35 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होगी। माना जा रहा है कि मेक्सिको के इस कदम से ऑटोमोबाइल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होगा।

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Kananaskis: Prime Minister Narendra Modi meets President of Mexico Claudia Sheinbaum Pardo on the sidelines of the 51st G7 Summit at Kananaskis, in Canada, Tuesday, June 17, 2025. (Photo: IANS)

नई दिल्ली: अमेरिका के बाद अब मेक्सिको ने भारत और उन कुछ दूसरे एशियाई देशों के कुछ चुनिंदा सामानों के आयात पर 50% तक का टैरिफ लगाने का फैसला किया है जिनका मेक्सिको सिटी के साथ कोई ट्रेड डील नहीं है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम की सरकार पर वॉशिंगटन से चीन के साथ बिजनेस कम करने का बहुत ज्यादा दबाव है। हालांकि, मेक्सिको के स्थानीय बिजनेस ग्रुप इसका विरोध कर रहे हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि ज्यादा टैरिफ से लागत बढ़ेगी।

ये नए टैरिफ ऑटो पार्ट्स, हल्की कारें, खिलौने, कपड़े, टेक्सटाइल, प्लास्टिक, फर्नीचर, जूते-चप्पल, स्टील, घरेलू उपकरण, चमड़े का सामान, एल्यूमीनियम, कागज, ट्रेलर, कांच, साबुन, कार्डबोर्ड, मोटरसाइकिल, परफ्यूम और कॉस्मेटिक्स के इंपोर्ट पर लगाए गए हैं।

भारत-मेक्सिको व्यापार: किस सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर

भारत और मेक्सिको ने पिछले कुछ वर्षों में मजबूत व्यापार साझेदारी विकसित की है। कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के डेटा के अनुसार दोनों देशों के बीच व्यापार 2019-20 में 7.9 अरब डॉलर से बढ़कर 2023-24 में 8.4 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है।

नए टैरिफ से कई ट्रेड कैटेगरी पर असर पड़ेगा, जिससे कई सामानों की कीमतों में 35 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होगी। माना जा रहा है कि मेक्सिको के इस कदम से ऑटोमोबाइल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी 20 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत हो जाएगी, जिससे फॉक्सवैगन, हुंडई, निसान और मारुति सुजुकी जैसे बड़े वाहन निर्यातकों को बड़ा झटका लगेगा।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार नए टैरिफ से फॉक्सवैगन और हुंडई सहित प्रमुख भारतीय कार एक्सपोर्टर्स के 1 बिलियन डॉलर के शिपमेंट पर असर पड़ने की उम्मीद है।

हाल में सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स ने कथित तौर पर नवंबर में भारत के वाणिज्य मंत्रालय से मेक्सिको पर दबाव डालने का आग्रह किया था ताकि भारत से भेजे जाने वाले वाहनों पर टैरिफ के मामले में मौजूदा स्थिति बनाए रखी जाए। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स एक इंडस्ट्री ग्रुप है जिसके सदस्यों में VW, हुंडई और सुजुकी शामिल हैं।

फिलहाल यह अभी साफ नहीं हुआ कि कार बनाने वाली कंपनियां, इंडस्ट्री बॉडी और भारत सरकार आगे क्या कदम उठाएंगी।

बहरहाल, टैरिफ में बढ़ोतरी से भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों को मेक्सिको पर निर्भर अपनी रणनीतियों पर फिर से विचार करना पड़ सकता है, जो दक्षिण अफ्रीका और सऊदी अरब के बाद भारत का तीसरा सबसे बड़ा कार एक्सपोर्ट मार्केट है। भारत में कार बनाने वाली कंपनियां प्रोडक्शन को ज्यादा से ज्यादा करने और बड़े पैमाने पर उत्पादन का फायदा उठाने के लिए निर्यात पर निर्भर रही हैं। कुछ कंपनियां धीमी घरेलू बिक्री से होने वाले नुकसान को कम करने या मार्जिन बेहतर करने के लिए भी निर्यात पर निर्भर हैं।

अमेरिका के बाद अब मैक्सिको के टैरिफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत को चीन के मुकाबला सस्ते मैन्युफैक्चरिंग विकल्प के तौर पर पेश करने की कोशिशों को भी झटका पहुंचेगा। फॉक्सवैगन की भारतीय यूनिट- स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन के प्रमुख पीयूष अरोड़ा ने कहा कि भारत कई सालों से एक मजबूत एक्सपोर्ट बेस रहा है और कंपनी यहां से 40 से ज्यादा देशों में शिपिंग करती है।

टैरिफ अप्रूव होने से पहले अरोड़ा ने कहा, ‘मेक्सिको लगातार हमारे महत्वपूर्ण एक्सपोर्ट बाजारों में से एक रहा है, क्योंकि वहां डिमांड बढ़ रही है और हमारे भारत में बने मॉडल्स को पसंद किया जा रहा है।’

मेक्सिको क्यों लगा रहा है भारत पर टैरिफ?

मेक्सिको की क्लाउडिया शिनबाम सरकार ने घरेलू बाजार को मजबूत करने और इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने की कोशिश के तहत इन प्रयासों की वकालत की है। हालांकि टैरिफ प्लान के विरोधियों ने चेतावनी दी है कि इससे देश में कीमतें बढ़ सकती हैं।

टैरिफ के बिल पर वोटिंग में 35 लोग गैर-हाजिर रहे। मेक्सिको को कई सांसदों ने कहा है कि बिल जल्दबाजी में लाया गया था और महंगाई पर इसके असर को लेकर और ज्यादा विश्लेषण करने की जरूरत है।

मेक्सिको की कांग्रेस के निचले सदन ने 281 वोटों के मुकाबले 24 वोटों से प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जबकि 149 सदस्यों ने वोट नहीं दिया और कहा कि इस पर और चर्चा की जरूरत है।

हालांकि, टैरिफ को लेकर असली वजह अमेरिका से जुड़ी है। मेक्सिकन इंस्टीट्यूट फॉर कॉम्पिटिटिवनेस के इकोनॉमिक डेवलपमेंट के डायरेक्टर ऑस्कर ओकाम्पो ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा, ‘इसका संबंध USMCA (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) के रिव्यू से है जो होने वाला है, और उन टैरिफ में कमी और छूट पाने के लिए बातचीत से है जिनका सामना इस समय मेक्सिको को अमेरिकी बाजार में पहुँचने के लिए करना पड़ रहा है।’

मेक्सिको को अभी भी ऑटोमोटिव सेक्टर, स्टील और एल्युमीनियम पर बड़े अमेरिकी टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। ओकाम्पो ने कहा कि मेक्सिको एक अप्रत्याशित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुक रहा है और अपनी कमर्शियल पॉलिसी को ‘गलत दिशा में’ ले जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मेक्सिको की सरकार कई सेक्टरों, जिसमें ऑटो पार्ट्स, प्लास्टिक, केमिकल और टेक्सटाइल शामिल हैं, उनके लिए समस्याएँ पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि नए टैरिफ से सप्लाई चेन में रुकावटें आएंगी और ऐसे समय में जब अर्थव्यवस्था धीमी हो रही है, यह महंगाई को बढ़ा सकता है।

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...

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