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AAP विधायक संजीव अरोड़ा नकली iPhone एक्सपोर्ट घोटाले के मास्टरमाइंड; ED की चार्जशीट में क्या खुलासा हुआ?

आप विधायक संजीव अरोड़ा पर 102 करोड़ रुपये से ज्यादा की मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में शामिल होने का आरोप है। यह मामला नकली मोबाइल फोन (iPhone) एक्सपोर्ट बिल से जुड़े धोखाधड़ी वाले गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) ट्रांजैक्शन से संबंधित है।

Man in a beige waistcoat and purple shirt speaks into a microphone at a press conference, with a wooden paneled background.
फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जेल में बंद पंजाब के पूर्व मंत्री और AAP विधायक संजीव अरोड़ा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। उन पर 102 करोड़ रुपये से ज्यादा की मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में शामिल होने का आरोप है। यह मामला नकली मोबाइल फोन (iPhone) एक्सपोर्ट बिल से जुड़े धोखाधड़ी वाले गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) ट्रांजैक्शन से संबंधित है।

अरोड़ा को इस साल 9 मई को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में ED ने गिरफ्तार किया था। वह अभी न्यायिक हिरासत में हैं और उन्होंने रेगुलर जमानत के लिए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की है।

iPhone एक्सपोर्ट घोटाले मामले में ED की चार्जशीट में क्या पता चला?

गुरुग्राम की अदालत में मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी एजेंसी की ओर से दायर चार्जशीट के अनुसार जांच में पता चला कि हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (HSRL) ने AAP नेता के कंट्रोल और निर्देश में कथित तौर पर मोबाइल फोन के झूठे और फर्जी एक्सपोर्ट ट्रांजैक्शन के जरिए ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग की एक जटिल योजना बनाई।

बता दें कि यह कंपनी इस मामले में अरोड़ा के साथ सह-आरोपी है और अरोड़ा इसके प्रमोटर-डायरेक्टर हैं। इसे पहले M/s रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RPIL) के नाम से जाना जाता था।

ED की चार्जशीट में कहा गया है कि इस योजना में बिना असली सामान की सप्लाई के शेल और अकोमोडेशन-एंट्री कंपनियों के जरिए फंड का लेन-देन करना, मोबाइल फोन की एक ऐसी सप्लाई चेन बनाना जो काल्पनिक और असल में नामुमकिन थी, इंसेंटिव और GST फायदे पाने के लिए एक्सपोर्ट की वैल्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना और गैर-कानूनी फंड को वैध बिजनेस इनकम और कैपिटल के तौर पर दिखाने के लिए पहले से फंड किए गए एक्सपोर्ट रेमिटेंस और ग्रुप-कंपनी के निवेश का इस्तेमाल करना शामिल था।

काम करने का तरीका तीन आपस में जुड़े हुए स्तरों पर काम करता था, घरेलू खरीद का एक झूठा रिकॉर्ड बनाना, एक्सपोर्ट से जुड़े कागजात और कस्टम्स प्रक्रियाओं में हेर-फेर करना और एक्सपोर्ट से मिलने वाले पैसे GST रिफंड और ग्रुप की कंपनियों व अचल संपत्तियों में निवेश के जरिए फंड को मिलाना।

ईडी की चार्जशीट के मुताबिक, HSRL ने कथित तौर पर M/s SK Enterprises, M/s Global Traders, M/s Worldwide Electronics, M/s GMG Tradelink Pvt. Ltd., M/s Shree Lakshmi Enterprises, M/s Mobile Style, M/s US Enterprises, M/s Anjani International, M/s Maruti Nandan Telecom LLP और अन्य सप्लायर कंपनियों से महंगे Apple iPhone और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस खरीदे।

कई कंपनियां शेल कंपनियों की तरह कर रही थी काम

इन कंपनियों की विस्तृत जांच और PMLA, 2002 की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों से यह पता चला कि इनमें से कई कंपनियां ‘शेल’ या ‘अकोमोडेशन-एंट्री’ वाली कंपनियां थीं जिनका कोई असली बिजनेस नहीं था या न के बराबर था। इनका इस्तेमाल सिर्फ कैश के बदले फंड को इधर-उधर करने और लेयरिंग (फंड को कई खातों में घुमाकर छिपाने) के लिए किया जाता था।

एचएसआरएल के प्रमुख कर्मचारियों के बयानों से पुष्टि हुई कि मोबाइल फोन की कोई भौतिक प्राप्ति, भंडारण या निरीक्षण कभी नहीं हुआ और वे केवल इनवॉइस, ई-वे बिल और बैंकिंग दस्तावेजों को ही संभालते थे तथा उन्हें माल के वास्तविक अस्तित्व या आवागमन की कोई जानकारी नहीं थी।

कंपनी के कर्मचारियों ने यह भी स्वीकार किया कि आपूर्तिकर्ताओं को कोई खरीद आदेश जारी नहीं किए गए थे और संचार मुख्य रूप से व्हाट्सएप के माध्यम से होता था जिसका कोई सत्यापन योग्य रिकॉर्ड नहीं है।

सबूतों से पता चलता है कि एचएसआरएल और उसके सहयोगियों ने फर्जी संस्थाओं के माध्यम से एक मनगढ़ंत घरेलू खरीद श्रृंखला बनाई। जांच में इस चरण में 43 शिपिंग बिलों के माध्यम से किए गए फर्जी निर्यात लेनदेन से प्राप्त अपराध की आय 102,99,21,974 रुपये आंकी गई है।

जांच में यह भी पता चला कि हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड के मोबाइल फोन एक्सपोर्ट बिजनेस के पीछे मुख्य फैसला लेने वाले संजीव अरोड़ा थे जबकि कंपनी मुख्य रूप से रियल एस्टेट सेक्टर में काम करती थी।

जांच के दौरान मिली जानकारी से खास तौर पर यह पता चला कि अरोड़ा मोबाइल डिवीज़न के लिए ICICI बैंक में रखे गए अकाउंट के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (ऑथराइज़्ड सिग्नेटरी) थे और उस अकाउंट का इस्तेमाल एक्सपोर्ट से मिली लगभग 102.50 करोड़ रुपये की रकम पाने के लिए किया गया था, जो अपराध से हासिल हुई कमाई थी।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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