कोलकाताः पश्चिम बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण के मतदान के बाद भी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 700 टुकड़ियां तैनात रहेंगीं। चुनाव आयोग ने बुधवार (29 अप्रैल) को इसकी जानकारी दी। गौरतलब है कि 29 अप्रैल को राज्य की 142 विधानसभा सीटों के लिए मतदान संपन्न हुआ।
चुनाव आयोग के अधिकारी ने कहा कि केंद्रीय बलों की निरंतर उपस्थिति का उद्देश्य शांति बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव के बाद की अवधि में कोई अप्रिय घटना न हो।
CAPF की तैनाती पर चुनाव आयोग ने क्या कहा?
पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण की वोटिंग समाप्त होने के बाद यह बयान चुनाव आयोग की तरफ से आया। शाम 6 बजे तक हुई वोटिंग में करीब 90 फीसदी वोटिंग हुई।
अधिकारी के मुताबिक, “चुनाव आयोग द्वारा 19 मार्च को जारी तैनाती योजना के अनुसार आज मतदान समाप्त होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए CAPF की 700 कंपनियां अगले आदेश तक राज्य में तैनात रहेंगी।”
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उन्होंने आगे कहा, “ये बल संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात रहेंगे और राज्य प्रशासन को सामान्य स्थिति बनाए रखने में सहायता करेंगे।”
SIR के दौरान तैनात की गईं थीं 2,400 टुकड़ियां
विशेष मतदाता सूची (SIR) पर्यवेक्षक सुब्रता गुप्ता के मुताबिक पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के दौरान राज्य में CAPF की 2,400 कंपनियां तैनात की गई थीं। राज्य में सुरक्षा व्यवस्था के बारे में बात करते हुए गुप्ता ने पहले बताया था कि कुछ टुकड़ियों के पास बॉडी कैमरे थे।
निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार सीएपीएफ कर्मियों द्वारा स्ट्रांग रूम की सुरक्षा की जा रही थी। इसके साथ ही प्रवेश द्वारों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी कैमरों की फुटेज उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों के लिए उपलब्ध होगी।
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इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार (29 अप्रैल) को कहा था कि चुनाव खत्म होने के 60 दिनों बाद तक केंद्रीय बल राज्य में तैनात रहेंगे। अधिकारियों के मुताबिक, तैनाती की अवधि और पैमाने के बारे में आगे के फैसले जमीनी आकलन और सुरक्षा एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर किए जाएंगे।
गौरतलब है कि राज्य की 294 विधानसभा सीटों की मतगणना 4 मई को की जाएगी। इससे पहले 29 अप्रैल शाम को घोषित एग्जिट पोल्स में से कुछ जहां भाजपा की बढ़त बता रहे हैं तो वहीं कुछ एग्जिट पोल्स में सत्तारूढ़ टीएमसी की वापसी के संकेत दिख रहे हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि राज्य में फिर से ममता की वापसी होती है या भाजपा सत्ता की कुर्सी का स्वाद चखेगी।

