दुनिया के ऊर्जा व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट में ईरान और अमेरिका के बीच तनातनी अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति की जीवनरेखा कहे जाने वाले इस समुद्री मार्ग पर जारी गतिरोध को सुलझाने के लिए पिछली शांति वार्ताओं में कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका था, और अब दूसरे दौर की बातचीत भी पूरी तरह अधर में लटकी हुई है।
इसी बीच, खबर है कि ईरान ने होर्मुज में एक कंटेनर शिप पर गोलीबारी की है। ईरान की अर्धसैनिक इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा बुधवार को ओमान के पास एक कंटेनर जहाज पर की गई इस गोलीबारी ने क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों को बड़ा झटका दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ताजा हमले का सीधा असर पाकिस्तान में प्रस्तावित शांति वार्ता पर पड़ सकता है।
ब्रिटेन की सैन्य इकाई यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) के अनुसार, यह घटना स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 7:55 बजे हुई। जहाज की पहचान फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सकी है लेकिन एजेंसी ने बताया कि आईआरजीसी की एक गनबोट ने खुले समुद्र में एक कंटेनर जहाज का पीछा किया और उस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें जहाज के ब्रिज को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इस हमले में किसी के हताहत होने या पर्यावरण को किसी तरह के खतरे की खबर नहीं है।
गोलीबारी की तीसरी घटना!
यूकेएमटीओ के मुताबिक, यह जहाज ओमान के तट से लगभग 15 समुद्री मील दूर था, जब ईरानी गनबोट ने उसके करीब आकर हमला किया। गौरतलब है कि होर्मुज के क्षेत्र में यह तनाव अचानक पैदा नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे हालिया सैन्य कार्रवाइयों की एक कड़ी है।
कुछ ही दिनों पहले अमेरिकी नौसेना ने ईरान के कंटेनर जहाज ‘टोस्का’ को उस समय अपने कब्जे में ले लिया था, जब उसने अमेरिकी नाकाबंदी को दरकिनार कर आगे बढ़ने का प्रयास किया था। अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस स्प्रांस ने चेतावनी के बाद जब जहाज के इंजन रूम पर निशाना साधा, तब उसे कस्टडी में लिया गया। इस कार्रवाई के विरोध में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिकी जहाजों पर ड्रोन हमलों का दावा किया था।
इतना ही नहीं, हाल के दिनों में भारतीय जहाजों ‘जग अर्णव’ और ‘सन्मार हेराल्ड’ पर भी ओमान के उत्तर-पूर्व में इसी तरह की गोलीबारी की गई थी, जिसके बाद भारत सरकार ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए ईरानी राजदूत को तलब किया था।
होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही लगभग ठप पड़ी है। हालांकि कुछ ईरानी तेल टैंकर अब भी अमेरिकी प्रतिबंधों को चुनौती देते हुए आगे बढ़ रहे हैं। इस बीच सबसे बड़ी राहत यही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्षविराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने की घोषणा की है। हालांकि साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होगी।
दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने दो टूक कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी घेराबंदी पूरी तरह नहीं हटाता, ईरान किसी भी प्रकार की वार्ता की मेज पर नहीं लौटेगा। ईरान के कई शीर्ष नेताओं ने भी इसी रुख को दोहराया है।

