नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संसद में पेश किए गए तीन विधेयकों पर जारी चर्चा में हिस्सा लेते हुए विपक्ष को नसीहत दी कि वो इसका विरोध नहीं करे। महिला आरक्षण के विषय में उन्होंने कहा कि जो इसका विरोध करेगा, उसे लंबे तक खामियाजा चुकाना होगा। प्रधानमंत्री ने साथ ही डीलिमिटेशन और इससे जुड़ी शंकाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि परिसीमन को लेकर किसी भी राज्या या क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा, ये उनकी गारंटी है, उनका वादा है। डीलिमिटेशन बिल को लेकर सबसे मुखर विरोध दक्षिण भारत के राज्यों में है।
मेरी गारंटी…भेदभाव नहीं होगा: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने डीलिमिटेशन पर सदन में कहा कि मैं आज जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं कि चाहे दक्षिण हो, उत्तर हो, पूर्व हो या पश्चिम, छोटे राज्य हों या बड़े, यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव या अन्याय नहीं करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पहले हुए परिसीमन के दौरान जो अनुपात तय किया गया था, उसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और आगे की वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी।
पीएम मोदी ने कहा, ‘अगर किसी को भरोसा चाहिए तो वह गारंटी देने को भी तैयार हैं। अगर गारंटी चाहिए तो मैं गारंटी देता हूं, वादा चाहिए तो वादा देता हूं। जब नीयत साफ होती है तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं होती। कुछ लोग इस प्रक्रिया को उनके राजनीतिक स्वार्थ से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन यह पूरी तरह गलत है। अगर आप इसका विरोध करेंगे तो स्वाभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे मिल सकता है, लेकिन अगर साथ चलेंगे तो किसी का नुकसान नहीं होगा। हमें किसी क्रेडिट की जरूरत नहीं है। बिल पारित होने के बाद मैं सभी दलों को श्रेय देने के लिए तैयार हैं। सरकार खर्च पर सभी के श्रेय वाला विज्ञापन दिलवा सकता हूं।’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘हम देश को क्षेत्रीय नजरिए से बांटकर नहीं देखते। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हम एक देश हैं।’
उन्होंने कहा, ‘आइए हम सभी महिलाओं को आरक्षण देने के इस महत्वपूर्ण अवसर को न चूकें। मैं आप सभी से अपील करने आया हूं – इसे राजनीतिक नजरिए से न देखें, यह राष्ट्रीय हित में है।’
‘जो आज विरोध करेगा उसे कीमत चुकानी होगी…’
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं को अधिकार देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका हक है। हम यह न सोचें कि हम नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं, यह उनका अधिकार है, जिसे दशकों से रोका गया है। आज हमें उस गलती का प्रायश्चित करने का अवसर मिला है। लोकतंत्र की जननी होने के नाते, यह भारत की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता है। इसी प्रतिबद्धता के कारण पंचायतों में ऐसी व्यवस्था स्थापित की गई।
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पीएम मोदी ने कहा, ‘हम सब भाग्यवान हैं कि हमें ऐसे महत्वपूर्ण और देश की आधी आबादी को राष्ट्र निर्माण की नीति निर्धारण की प्रक्रिया में हिस्सेदार बनाने का सौभाग्य मिल रहा है। मैं चाहता हूं कि सभी सांसद इस महत्वपूर्ण अवसर को जाने न दें। हम सब मिलकर देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। हमारी शासन व्यवस्था को संवेदनशीलता से भरने का एक सार्थक प्रयास करने के लिए जा रहे हैं। मुझे विश्वास है कि इस मंथन से जो अमृत निकलेगा वो देश की राजनीति की दिशा और दशा तय करने वाला है।’
प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक को जल्द से जल्द लागू करने के लिए पुरजोर वकालत करते हुए कहा कि सांसदों को इस महत्वपूर्ण अवसर को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं उन लोगों को नहीं भूली हैं जो उनके अधिकारों के खिलाफ खड़े हुए है।

